
केरल चुनाव: CPI(M) और IUML में मुनीर की उम्मीदवारी पर आरोप-प्रत्यारोप
सीपीआई(एम) चुनाव प्रचार के दौरान यूडीएफ और जमात-ए-इस्लामी के बीच संबंधों का आरोप लगाती रही है...
कोझिकोड (केरल), 27 मार्च (पीटीआई): सीपीआई (एम) नेता और सीटू के राष्ट्रीय महासचिव एलामारम करीम ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि आईयूएमएल नेता एम. के. मुनीर को 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के हस्तक्षेप के कारण उम्मीदवार नहीं बनाया गया।
सीपीआई(एम) चुनाव प्रचार के दौरान यूडीएफ और जमात-ए-इस्लामी के बीच संबंधों का आरोप लगाती रही है।
हालांकि, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का कहना है कि मुनीर स्वास्थ्य कारणों से चुनावी मैदान से दूर रहे।
यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में करीम ने कहा कि मुनीर आईयूएमएल के प्रमुख नेता हैं और उनकी अनुपस्थिति को केवल स्वास्थ्य कारणों से नहीं जोड़ा जा सकता।
उन्होंने कहा, “उनका रुख मुस्लिम लीग नेतृत्व के लिए असहज हो सकता है। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी की राजनीति पर एक पुस्तक लिखी है।”
करीम ने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी, आरएसएस की तरह, धर्म-आधारित राजनीति पर आधारित है।
उन्होंने आगे दावा किया कि जमात-ए-इस्लामी मुस्लिम लीग और यूडीएफ के साथ समन्वय में चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल है।
उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग के नेता, जिनमें मुनीर भी शामिल हैं, पहले जमात-ए-इस्लामी का कड़ा विरोध करते रहे हैं। यह देखा जाना चाहिए कि ऐसे नेता को चुनाव लड़ने से किसने रोका।”
मुनीर यूडीएफ सरकारों में दो बार मंत्री रह चुके हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोडुवल्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और एलडीएफ उम्मीदवार करात रजाक को हराया था।
हाल ही में जमात-ए-इस्लामी के राजनीतिक संगठन वेलफेयर पार्टी ने यूडीएफ को समर्थन दिया, यह कहते हुए कि यह समाज में संघ परिवार के प्रभाव को रोकने के लिए किया गया है।
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