
सबरीमाला मुद्दे पर राहुल गांधी निशाने पर, केरल में सियासी टकराव तेज
केरल में एलडीएफ-यूडीएफ के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। गठजोड़ और वोट बैंक पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच एलडीएफ ने विकास और समर्थन का दावा किया है।
केरल में अल्पसंख्यक समर्थन, कथित राजनीतिक गठजोड़ और वोटों के रुझान को लेकर चल रही बहस के बीच एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। इन मुद्दों पर ‘द फेडरल’ ने केरल के आबकारी और स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश से बातचीत की।
क्या एलडीएफ अल्पसंख्यकों का समर्थन खो रहा है?
एमबी राजेश ने इस धारणा को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह एक झूठा नैरेटिव है, जिसे कुछ मीडिया संस्थान और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन जानबूझकर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, जमीनी स्तर पर अल्पसंख्यक समुदाय एलडीएफ के साथ है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज भी एलडीएफ सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और फैसलों से संतुष्ट है और उसका समर्थन कर रहा है।
एलडीएफ-बीजेपी गठजोड़ के आरोप पर एम बी राजेश
राजेश ने इन आरोपों को यूडीएफ द्वारा फैलाया गया झूठ बताया। उन्होंने कहा कि यूडीएफ और उससे जुड़े कुछ मीडिया संस्थान चुनाव में जीत की उम्मीद इसी तरह के प्रचार पर टिकाए हुए हैं। उनके मुताबिक, असली समझौता बीजेपी और यूडीएफ के बीच रहा है। उन्होंने “को-ले-बी” (कांग्रेस-मुस्लिम लीग-बीजेपी) शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि यह राजनीतिक शब्दावली यूडीएफ ने ही गढ़ी थी और वही बीजेपी से समझौते की शुरुआत करने वाले थे।
उन्होंने यह भी कहा कि एक आरएसएस नेता ने दावा किया था कि विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने परावूर विधानसभा सीट जीतने के लिए उनका समर्थन मांगा था, लेकिन सतीशन ने इस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।
क्या हिंदू और ओबीसी वोट एलडीएफ से दूर हो रहे हैं?
इस सवाल पर राजेश ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव और 2024 के चुनाव के परिणाम अलग हो सकते हैं, लेकिन 2019 के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने ज्यादा सीटें और वोट शेयर हासिल कर सत्ता में वापसी की थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार एलडीएफ 110 सीटों तक पहुंच सकता है।
क्या सिर्फ विकास के दम पर चुनाव जीता जा सकता है?
राजेश ने कहा कि यह केवल विकास नहीं, बल्कि समावेशी विकास है, जिसका फायदा लोगों ने खुद महसूस किया है। उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार ने हर वर्ग को साथ लेकर काम किया है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
तीसरी बार एलडीएफ को क्यों चुनें?
राजेश ने कहा कि 2021 में किए गए वादों को सरकार ने पूरा किया है। उन्होंने बताया कि 32.5 लाख महिलाओं के बैंक खातों में गृहिणी पेंशन पहुंच रही है। पहले 1600 रुपये मिलने वाली सामाजिक पेंशन अब बढ़ाकर 2000 रुपये कर दी गई है और इसका नियमित भुगतान हो रहा है।
इसके अलावा, राज्य में 5 लाख से ज्यादा घर बनाए गए हैं, सरकारी स्कूलों को हाई-टेक बनाया गया है और सरकारी अस्पतालों में बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है। उनके मुताबिक, ये उपलब्धियां ही जनता के समर्थन के लिए काफी हैं।
यूडीएफ के अभियान और सबरीमाला मुद्दे पर राय
राजेश ने यूडीएफ और राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि यह उनकी “राजनीतिक दिवालियापन” को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता होने के बावजूद राहुल गांधी कोई ठोस वैकल्पिक नीति या राजनीतिक दिशा देने में असफल रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूडीएफ के पास कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है, इसलिए वह बार-बार सबरीमाला जैसे मुद्दों को उठाकर राजनीति करने की कोशिश कर रहा है।

