नए चेहरों और दलबदलुओं का संग्राम, केरल की इन 10 सीटों पर खास नजर
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नए चेहरों और दलबदलुओं का संग्राम, केरल की इन 10 सीटों पर खास नजर

केरल चुनाव 2026 में कई सीटों पर कड़े और त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। वाम दल, कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी जंग तेज हो गई है।


रिकॉर्ड बनने के लिए होते हैं और केरल में वाम मोर्चा पहले ही 2026 में लगातार दूसरी बार सत्ता में आकर एक बड़ा रिकॉर्ड बना चुका है। अब पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार इतिहास रचने के इरादे से बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों को फिर से मैदान में उतार रही है। इसकी रणनीति यह है कि सत्ता विरोधी लहर को हर क्षेत्र में विधायक के पक्ष में मौजूद स्थानीय समर्थन से संतुलित किया जाए।

दूसरी ओर, एक दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस किसी भी कीमत पर वापसी करना चाहती है और उसने कई युवा व नए चेहरों को मौका दिया है। भाजपा, जो अब तक तीसरी ताकत रही है, अपने वोट शेयर को 20 प्रतिशत से ऊपर ले जाने और कुछ सीटें जीतने की कोशिश में है। इस बार कई दल बदलकर आए उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जो केरल की राजनीति में आमतौर पर कम देखने को मिलता है। ऐसे में 2026 का चुनाव काफी दिलचस्प और कई सीटों पर बेहद कड़ा होता दिख रहा है।

केरल में कुल 140 विधानसभा सीटें हैं। 2021 के चुनाव में वाम मोर्चे ने 99 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की थी।

1. मंजेश्वरम: IUML का गढ़

यहां परंपरागत रूप से वाम और कांग्रेस गठबंधन के बीच मुकाबला होता रहा है, लेकिन कासरगोड जिले की इस सीट पर भाजपा भी मजबूत दावेदार रही है। पिछली दो बार भाजपा के के. सुरेंद्रन बहुत कम अंतर से हार गए थे। इस बार उनका मुकाबला IUML के मौजूदा विधायक ए.के.एम. अशरफ से है।

मुख्य फैक्टर: भाजपा की मजबूत चुनौती

तथ्य: पिछले 20 साल से वाम यहां नहीं जीत सका है।

2. पेरावूर: कांग्रेस का किला

कन्नूर जिले की यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। यहां सीपीएम ने वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा को मैदान में उतारा है, जो कांग्रेस के सनी जोसेफ को चुनौती दे रही हैं।

मुख्य फैक्टर: शैलजा की एंट्री

तथ्य: 2006 में शैलजा ने यहां जीत हासिल की थी।

3. पेराम्ब्रा: युवा जोश

यहां युवा नेता फातिमा तहलिया ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। उनका सामना सीपीएम के वरिष्ठ नेता टी.पी. रामकृष्णन से है।

मुख्य फैक्टर: युवा नेतृत्व की एंट्री

तथ्य: मुस्लिम लीग कभी यह सीट नहीं जीत पाई।

4. त्रिथला: कांटे की टक्कर

यहां सीपीएम के एम.बी. राजेश और कांग्रेस के वी.टी. बलराम के बीच कड़ा मुकाबला है। पिछली बार राजेश ने बहुत कम अंतर से जीत दर्ज की थी।

मुख्य फैक्टर: विकास बनाम परंपरागत वोट

तथ्य: यह सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस की रही है।

5. पलक्कड़: मुकाबला गरम

भाजपा की शोभा सुरेंद्रन, कांग्रेस के रमेश पिशारोडी और वाम समर्थित एन.एम.आर. रजाक के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

मुख्य फैक्टर: भाजपा की मजबूत चुनौती

तथ्य: 2011 से कांग्रेस यहां जीतती आ रही है।

6. अरनमुला: सबरीमाला का असर

यहां स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज तीसरी बार जीतने की कोशिश में हैं। कांग्रेस के अबिन वर्की और भाजपा के कुम्मनम राजशेखरन भी मैदान में हैं।

मुख्य फैक्टर: सबरीमाला मुद्दा

तथ्य: पारंपरिक रूप से कांग्रेस की सीट

7. कोट्टारक्करा: दल-बदल का असर

यहां वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल का मुकाबला दल बदलकर आईं आयशा पोट्टी और भाजपा की आर. रेश्मी से है।

मुख्य फैक्टर: उम्मीदवारों का दल बदल

तथ्य: हाल के वर्षों में सीपीएम मजबूत रही है।

8. पथानापुरम: कड़ा मुकाबला

के.बी. गणेश कुमार के सामने कांग्रेस के ज्योतिकुमार चामक्कला चुनौती पेश कर रहे हैं।

मुख्य फैक्टर: व्यक्तिगत छवि और स्थानीय मुद्दे

तथ्य: जीतने पर गणेश कुमार लगातार छठी बार विधायक बनेंगे।

9. वट्टीयूरकावु: हाई-प्रोफाइल लड़ाई

सीपीएम के वी.के. प्रशांत, कांग्रेस के के. मुरलीधरन और भाजपा की आर. श्रीलेखा के बीच मुकाबला है।

मुख्य फैक्टर: बड़े नेताओं की एंट्री

तथ्य: प्रशांत का वोट प्रतिशत बढ़ रहा है।

10. नेमोम: सबसे दिलचस्प मुकाबला

सीपीएम के वी. शिवनकुट्टी, कांग्रेस के के.एस. सबरीनाथन और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

मुख्य फैक्टर: भाजपा का उभार

तथ्य: 2016 में भाजपा ने यहीं अपनी पहली विधानसभा सीट जीती थी।

कझाकूट्टम: उभरती हुई सीट

थिरुवनंतपुरम जिले की यह सीट भी काफी चर्चित हो रही है। यहां भाजपा के वी. मुरलीधरन, सीपीएम के कड़कंपल्ली सुरेंद्रन और कांग्रेस के सरत चंद्र प्रसाद के बीच मुकाबला है। सबरीमाला से जुड़े विवाद भी यहां चुनावी मुद्दा बन रहे हैं।

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