
‘निरंतरता बनाम बदलाव’ की जंग, केरल में सियासी पारा हाई
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने केरल में तीसरी बार सत्ता के लिए प्रदर्शन को आधार बनाया, एंटी-इंकंबेंसी से इनकार किया और विपक्ष पर कमजोर रिकॉर्ड का आरोप लगाया।
केरल में होने वाले हाई-प्रोफाइल विधानसभा चुनावों से पहले एम ए बेबी (M A बेबी) ने लेफ्ट डेमोक्रिटिक फ्रंट (LDF) की उपलब्धियों को गिनाते हुए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रदर्शन ही एंटी-इंकंबेंसी (विरोधी लहर) का सबसे बड़ा जवाब है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि लेफ्ट डेमोक्रिटिक फ्रंट जो पिनराई विजयन (Pinarayi विजयन) के नेतृत्व में तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है, ने कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में मजबूत काम किया है।
एंटी-इंकंबेंसी पर क्या बोले?
एम ए बेबी का कहना है कि केरल में पारंपरिक रूप से सत्ता परिवर्तन का रुझान रहा है, लेकिन पिछली बार एलडीएफ ने न सिर्फ सत्ता बरकरार रखी, बल्कि 99 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया।उन्होंने कहा कि हाल के स्थानीय निकाय चुनावों और उपचुनावों में कुछ झटके जरूर लगे, लेकिन ये सीमित थे और इन्हें “अपवाद” माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मतदाता अलग-अलग चुनावों में अलग तरह से मतदान करते हैं, इसलिए स्थानीय चुनावों के नतीजे विधानसभा चुनावों का संकेत नहीं होते।
नेतृत्व और छवि पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के अभिनेता मोहनलाल के साथ इंटरव्यू को लेकर उठे विवाद पर बेबी ने कहा कि इसका उद्देश्य उनके व्यक्तिगत संघर्ष और साधारण पृष्ठभूमि को लोगों के सामने लाना था।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष और कुछ पेशेवर समूह एलडीएफ की छवि खराब करने के लिए गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
आंतरिक मतभेदों को किया खारिज
पार्टी के गढ़ माने जाने वाले कन्नूर में असंतोष की खबरों पर बेबी ने कहा कि यह व्यापक प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि कुछ अलग-थलग घटनाएं हैं।उन्होंने माना कि राजनीति में सत्ता और पद की चाह बढ़ रही है, जिसका असर कुछ मामलों में दिखता है, लेकिन पार्टी की सामूहिक कार्यप्रणाली इसे नियंत्रित करने में सक्षम है।
बीजेपी से सांठगांठ के आरोपों पर जवाब
एलडीएफ और Bharatiya Janata Party (भाजपा) के बीच अप्रत्यक्ष लाभ के आरोपों को बेबी ने “गढ़ी हुई कहानी” बताया।उन्होंने कहा कि Indian National Congress (कांग्रेस) और भाजपा के बीच कई बार सहयोग देखने को मिला है, खासकर स्थानीय निकाय चुनावों में।
‘पिनरायिज़्म’ पर सफाई
विपक्ष द्वारा ‘पिनरायिज़्म’ कहकर सत्ता के केंद्रीकरण के आरोपों पर बेबी ने कहा कि सीपीआई-एम में सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति का वर्चस्व नहीं है और सभी निर्णय बहुमत के आधार पर होते हैं।
नई पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी
पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि एलडीएफ युवा और महिला नेताओं को आगे लाने पर काम कर रहा हैउन्होंने बताया कि पार्टी सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक और वैचारिक स्तर पर भी लगातार सक्रिय रहती है।
क्यों चुने मतदाता ‘निरंतरता’?
एम ए बेबी ने कहा कि एलडीएफ सरकार ने कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और बुनियादी ढांचे में ठोस काम किया है, जो जनता के सामने स्पष्ट है।उन्होंने यूडीएफ पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है और वे सिर्फ वादों पर निर्भर हैं।उन्होंने याद दिलाया कि यूडीएफ सरकार के दौरान 600 रुपये मासिक पेंशन भी 18 महीने तक नहीं दी जा सकी थी, जिसे बाद में एलडीएफ ने चुकाया।कुल मिलाकर, एलडीएफ ‘काम के आधार पर वोट’ की अपील कर रहा है, जबकि विपक्ष बदलाव की मांग उठा रहा है। ऐसे में केरल का यह चुनाव ‘निरंतरता बनाम बदलाव’ की सीधी लड़ाई बनता जा रहा है।

