
ममता ने लगाया केंद्र और चुनाव आयोग पर ‘मताधिकार छीनने’ का आरोप लगाया
उन्होंने कहा “राजबंशी समुदाय के नाम SIR के जरिए हटाए जा रहे हैं। महिलाओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं। अगर SIR के कारण मौतें होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (25 मार्च) को बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और लोगों के “मताधिकार छीनने” की कोशिश की जा रही है।
उत्तर बंगाल के मयनागुड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगला कदम नागरिकों की नागरिकता छीनने के प्रयास के रूप में सामने आ सकता है, जिसके लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए कुछ समुदायों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया, “राजबंशी समुदाय के नाम SIR के जरिए हटाए जा रहे हैं। महिलाओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं। अगर SIR के कारण मौतें होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
चुनाव आयोग और केंद्र पर निशाना
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए लोगों से अपील की कि “यहां के इस सज्जन और दिल्ली के उन दो सज्जनों को विदा कर दीजिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से अधिकार छीने जा रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत राज्य की जनता है। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे सब कुछ छीन लिया है। अब मेरे हाथ में सिर्फ जनता है।” साथ ही उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलकर काम करने का आरोप भी लगाया।
पहले भी लगाए थे आरोप
इससे पहले दिन में कोलकाता एयरपोर्ट पर भी बनर्जी ने इसी तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने चुनाव आयोग के छह साल पुराने एक दस्तावेज का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें कथित रूप से बीजेपी का कमल चिन्ह था। उन्होंने कहा, “पीछे से क्यों खेल रहे हैं? सामने आकर मुकाबला कीजिए।”
नामांकन को लेकर चिंता
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय वकीलों को साथ ले जाने की सलाह दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित असम में कई नामांकन रद्द किए गए हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अपने उम्मीदवारों से कहूंगी कि नामांकन दाखिल करते समय वकील साथ लेकर जाएं। असम में कई नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। मुझे बीजेपी और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है।”
(एजेंसी इनपुट के साथ)

