पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर के साथ ओवैसी का गठबंधन, टीएमसी की टेंशन बढ़ी
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माना जा रहा है कि हुमायूं कबीर और ओवैसी का गठबंधन ममता के मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है

पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर के साथ ओवैसी का गठबंधन, टीएमसी की टेंशन बढ़ी

पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है। हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम के गठबंधन से टीएमसी के मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगने का खतरा है।


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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा दिखाई दे रहा है। सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को जहां बीजेपी से सीधी टक्कर मिल रही है, वहीं दूसरी ओर हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम के गठबंधन से उसके पारंपरिक मुस्लिम वोटबैंक में भी सेंध लगने की आशंका है।

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन का एलान किया है। हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, लेकिन पिछले साल पार्टी से निष्कासन के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली थी।

182 सीटों पर लड़ने की तैयारी

हुमायूं कबीर ने आगामी चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। अब तक वे 15 सीटों पर उम्मीदवार घोषित भी कर चुके हैं। वे खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे और नौवाला सीट से भी मैदान में उतरने की योजना है।

बाबरी मस्जिद मुद्दे से बढ़ा प्रभाव

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर हुमायूं कबीर चर्चा में रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना के लिए उन्हें बड़े स्तर पर चंदा मिला है। इस मुद्दे के चलते इलाके में उनका जनाधार मजबूत हुआ है, जिसका असर चुनाव में दिख सकता है।

मुस्लिम वोटबैंक पर नजर

पश्चिम बंगाल की करीब 85 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ये सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में फैली हैं, जहां मुस्लिम आबादी 35% से 66% तक है।

2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इन 85 में से 75 सीटों पर जीत हासिल की थी। खासकर मुर्शिदाबाद, जहां 22 सीटें हैं, वहां हुमायूं कबीर का प्रभाव टीएमसी के लिए चुनौती बन सकता है।

टीएमसी की बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि अगर हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम का गठबंधन मुस्लिम बहुल सीटों पर कुछ प्रतिशत वोट भी काटने में सफल रहा, तो टीएमसी के जीत के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

इसके अलावा कांग्रेस और वाम दल भी इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। ऐसे में बहुकोणीय मुकाबले के चलते टीएमसी के लिए चुनौती और बढ़ गई है।

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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