
पुडुचेरी चुनाव: फंड के लिए BJP के साथ रहना जरूरी, मंत्री का बयान
पुडुचेरी चुनाव से पहले, के लक्ष्मीनारायणन ने वित्तीय आधार पर BJP के साथ गठबंधन का बचाव किया और गठबंधन में किसी भी तरह के मतभेद को खारिज किया।
“पुडुचेरी को आर्थिक रूप से टिके रहने के लिए केंद्र की पार्टी के साथ तालमेल रखना ही होगा,” मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन ने कहा, और केंद्र से मिलने वाले फंड पर निर्भरता को रेखांकित किया। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनावों से पहले गठबंधन की राजनीति और राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) मुख्य मुद्दे बन गए हैं।
The Federal ने AINRC सरकार के मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन से NDA गठबंधन, केंद्र-राज्य संबंधों और पुडुचेरी के राजनीतिक भविष्य पर बातचीत की।
BJP के साथ गठबंधन क्यों जरूरी?
लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि पुडुचेरी एक छोटा केंद्र शासित प्रदेश है, जिसकी आबादी लगभग 14 लाख है और आय के संसाधन सीमित हैं।
उन्होंने कहा, “फ्रांसीसी उपनिवेश से भारत में विलय के बाद से ही पुडुचेरी केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर रहा है। ऐसे में केंद्र की पार्टी के साथ रहना स्वाभाविक है। इससे हमें ज्यादा फंड मिलता है। हमारी आबादी कम है, इसलिए हम ज्यादा टैक्स भी नहीं लगा सकते। इसलिए सत्तारूढ़ पार्टी के साथ रहना हमारे लिए सुविधाजनक और लाभकारी है।” इसी आधार पर AINRC ने भाजपा के साथ गठबंधन किया।
केंद्रीय फंड में कमी का मुद्दा
विश्लेषकों के इस सवाल पर कि पुडुचेरी को मिलने वाला केंद्रीय फंड समय के साथ कम हुआ है, उन्होंने कहा कि यह सही है।
उन्होंने बताया कि एक समय यह फंड 65–75% तक था, लेकिन कांग्रेस की सरकार के दौरान इसमें कमी शुरू हुई और बाद में यह घटकर करीब 17% रह गया।
हालांकि, AINRC-BJP गठबंधन के सत्ता में आने के बाद यह बढ़कर लगभग 27% हो गया है।
गठबंधन में ‘मतभेद’ या ‘बातचीत’?
BJP और AINRC के बीच मतभेद की खबरों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि यह केवल बातचीत (नेगोशिएशन) का हिस्सा है।
“हम 2014 से BJP के साथ हैं। हर पार्टी गठबंधन से पहले मोलभाव करती है। एक बार समझौता हो जाए, तो कोई समस्या नहीं रहती,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में गठबंधन सरकार स्थिर रही है और मतभेद शासन पर असर नहीं डालते।
LJK को शामिल करने पर विवाद
लक्ष्मीनारायणन ने माना कि LJK को गठबंधन में शामिल करने को लेकर मतभेद था। लेकिन उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया गया कि पुराने गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
“जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री आश्वासन देते हैं, तो वह पर्याप्त होता है,” उन्होंने कहा।
क्या BJP का दबाव था?
इस सवाल पर उन्होंने कहा,“स्पष्ट रूप से हमारा गठबंधन सिर्फ BJP के साथ है। समझौते में भी यही लिखा है। BJP के अपने आंतरिक समझौते हो सकते हैं, लेकिन हमारा गठबंधन केवल BJP के साथ ही है।”
सरकार बनने पर क्या दबाव रहेगा?
उन्होंने कहा कि यह बाद की बात है। सीट बंटवारे में BJP ज्यादा सीट मांग सकती है, लेकिन पुडुचेरी में NDA का नेतृत्व AINRC के पास है।
मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी गठबंधन का चेहरा हैं और अंतिम फैसला उन्हीं का होगा। संविधान के अनुसार कैबिनेट गठन और विभागों का बंटवारा मुख्यमंत्री का अधिकार है।
क्या BJP क्षेत्रीय दलों को खत्म कर रही है?
इस पर उन्होंने कहा,“राजनीति हमेशा बदलती रहती है। लेकिन यहां स्थिति अलग है—पार्टियां खुद BJP के साथ आ रही हैं।”
स्टेटहुड और स्वायत्तता का सवाल
उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों में, जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब भी पुडुचेरी को राज्य का दर्जा नहीं मिल पाया।
“केंद्र में कोई भी सरकार हो, वह ज्यादा अधिकार देने से हिचकती रही है,” उन्होंने कहा।
केंद्र का रुख क्या है?
केंद्र का तर्क है कि संविधान के अनुसार केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन केंद्र के हाथ में होना चाहिए।
“अगर ज्यादा अधिकार चाहिए, तो संविधान में संशोधन करना होगा,” उन्होंने कहा।
बार-बार प्रस्ताव, फिर भी प्रगति क्यों नहीं?
उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य का दर्जा देने के लिए कई प्रस्ताव पारित हुए हैं, लेकिन केंद्र की किसी भी सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
“यह एक खुला सच है। फिर भी यह मांग जारी रहेगी, क्योंकि शासन जनता की इच्छा के अनुसार होना चाहिए—यही लोकतंत्र का मूल है।”

