
तमिलनाडु चुनाव में डुप्लीकेट की भारी डिमांड, अभिनेता-से-राजनेता बने नेताओं के हमशक्लों की इन दिनोंं मौज
तमिलनाडु में फिल्मों और राजनीति का गहरा संबंध रहा है, जहां वर्षों से कई अभिनेता राजनीति में आते रहे हैं। इस साझा क्षेत्र में हमशक्ल भी खूब फलते-फूलते हैं, क्योंकि जनता अपने पसंदीदा सितारों के प्रति गहरी दीवानगी रखती है। राजनीतिक दल ऐसे पेशेवर हमशक्लों की सूची बनाए रखते हैं और चुनाव प्रचार में उनका उपयोग करते हैं।
नमक्कल, तमिलनाडु के 56 वर्षीय अभिनेता कुमार ‘विजयकांत’ पिछले 15 वर्षों से राज्य में चुनावों से पहले देशिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (DMDK) के लिए प्रचार कर रहे हैं। उनकी खासियत (USP) यह है कि वे दिवंगत पार्टी संस्थापक और प्रमुख विजयकांत के हमशक्ल हैं और ‘कैप्टन’ के नाम से मशहूर विजयकांत की आवाज़ और हाव-भाव की नकल भी कर सकते हैं।
2023 में विजयकांत के निधन ने कुमार को झकझोर दिया था। वे कहते हैं, “मैं कैप्टन के हमशक्ल के रूप में पहचान पाने का आदी था। मुझे चिंता थी कि उनके निधन का मेरे पेशे पर क्या असर पड़ेगा।”
हालांकि, 23 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले उनकी सारी चिंताएं दूर हो गई हैं। विजयकांत की पत्नी प्रेमलता विजयकांत के नेतृत्व में DMDK ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) गठबंधन के साथ हाथ मिला लिया है और कुमार फिर से चुनावी मैदान में सक्रिय हो गए हैं।
वे कहते हैं, “तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से पार्टी यूनिट्स मुझे प्रचार के लिए बुला रही हैं। मुझे नियमित कार्यक्रम मिल रहे हैं और मैं रोज़ाना लगभग 5000 रुपये कमा रहा हूं।”
तमिलनाडु में अभिनेता, राजनीतिक नेता और अभिनेता-से-राजनेता बने नेताओं के हमशक्लों के लिए चुनाव का मौसम किसी त्योहार से कम नहीं होता, जो अतिरिक्त कमाई का मौका लेकर आता है।
जहां कुमार विजयकांत की नकल के लिए जाने जाते हैं, वहीं रत्ना दिवंगत एआईएडीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता से मिलती-जुलती दिखती हैं। एंटनी पिछले 20 वर्षों से दो अभिनेता-राजनेताओं—पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और शिवाजी गणेशन—की नकल करते रहे हैं।
सेलम ‘स्टालिन’ सईद ने शुरुआत में सुपरस्टार रजनीकांत की नकल की, लेकिन बाद में वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हमशक्ल बन गए। वहीं, सेंथिल अभिनेता-से-राजनेता बने विजय से काफी मिलते-जुलते हैं, जिनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) आगामी चुनावों में पहली बार उतरने जा रही है।
इनमें से अधिकतर हमशक्ल अपनी पहचान एक ही नाम से रखते हैं या अपने नाम के साथ उस स्टार का नाम जोड़ लेते हैं, जिसकी वे नकल करते हैं (जैसे कुमार और सेलम)।
तमिलनाडु में फिल्मों और राजनीति का अक्सर आपस में गहरा मेल रहा है, जहां वर्षों से कई अभिनेता राजनीति में आते रहे हैं। जहां एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और जे. जयललिता जैसे लोकप्रिय सितारे राज्य के मुख्यमंत्री बने, वहीं विजयकांत — जो 2011 से 2016 के बीच तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे — कमल हासन (जिन्होंने 2018 में मक्कल नीधि मइयम पार्टी बनाई, लेकिन इस चुनाव में नहीं लड़ रहे हैं) और खुशबू सुंदर ने भी राजनीति में कदम रखा। विजय इस सूची में सबसे नया नाम हैं। सुपरस्टार रजनीकांत ने भी राजनीति में आने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर स्वास्थ्य कारणों से यह विचार छोड़ दिया।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) जैसी पार्टियां लंबे समय से सिनेमा का उपयोग राजनीति और सामाजिक संदेश फैलाने के माध्यम के रूप में करती रही हैं। DMK के संस्थापक सी.एन. अन्नादुरै और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि इस परंपरा के अग्रदूत रहे हैं।
एम.के. स्टालिन के हमशक्ल सेलम। फोटो: विशेष व्यवस्था
सिनेमा और राजनीति के इस मेल वाले क्षेत्र में हमशक्ल खूब फलते-फूलते हैं, क्योंकि वे जनता के अपने पसंदीदा सितारों के प्रति अटूट आकर्षण को पूरा करते हैं।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक के. मुरुगन का मानना है कि आज के समय में हमशक्लों का प्रभाव शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण तमिलनाडु में अधिक देखने को मिलता है।
वे कहते हैं, “राजनीतिक दल मुख्य रूप से दूर-दराज़ के क्षेत्रों में अभिनेताओं के हमशक्लों का उपयोग करते हैं। शहरी इलाकों में इनके लिए उतना उत्साह नहीं होता। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग फिल्मी सितारों के प्रति गहरा आकर्षण रखते हैं, यही वजह है कि वहां हमशक्लों को ज्यादा स्वीकार किया जाता है।”
राजनीतिक दलों का कहना है कि वे अपने नेताओं के “पेशेवर हमशक्लों” की सूची बनाए रखते हैं।
मदुरै में DMK के पूर्व जिला सचिव बी. वेलमुरुगन बताते हैं, “हमशक्ल की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है, इसलिए हम इसमें कोई समझौता नहीं करते। हम आमतौर पर अनुभवी कलाकारों को ही लेते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि कैसे व्यवहार करना है। हमें उन्हें अलग से कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ती। हमशक्ल पूरे चुनावी अभियान में रंग भर देते हैं।”
तिरुनेलवेली में एआईएडीएमके के संगठन सचिव संपत कुमार भी इससे सहमत हैं। वे कहते हैं, “हम आमतौर पर नियमित कलाकारों को ही काम पर रखते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता तय करते हैं कि सूची में कौन होगा और उसी आधार पर उन्हें बुलाया जाता है। कुछ हमशक्ल अपने प्रदर्शन से कमाल कर सकते हैं।”
हमशक्लों के मुताबिक, उन्हें काम पर रखने वाली पार्टियां उन्हें एक संक्षिप्त ब्रीफ देती हैं। कुमार बताते हैं, “हम ज्यादा बोलते नहीं हैं, ज्यादातर अभिनेता-राजनेताओं के हाव-भाव और चाल-ढाल की नकल करते हैं।”
हमशक्ल अपने काम को बेहद गंभीरता से लेते हैं। तेनकासी जिले की 50 वर्षीय रत्ना के लिए जयललिता की नकल करना केवल हाव-भाव तक सीमित नहीं है। वे कहती हैं, “मैं मेकअप और कॉस्ट्यूम को लेकर बहुत सजग रहती हूं। मैंने कपड़ों और कॉस्मेटिक्स का एक खास कलेक्शन तैयार किया है। एक हमशक्ल के लिए लुक बहुत महत्वपूर्ण होता है। पहनावे और रूप-रंग दोनों में परफेक्शन जरूरी है, वरना पहचान नहीं मिलती। मैंने सालों की मेहनत और समर्पण से यह कला सीखी है।”
उनके पति, 56 वर्षीय जी. सेल्वराज, 2005 से विजयकांत के हमशक्ल हैं। वे कहते हैं, “मैं कई कार्यक्रमों में शामिल हुआ हूं। लोग मेरे पास आते हैं, हाथ मिलाते हैं और कभी-कभी मुझे ऐसे छूते हैं जैसे मैं असली अभिनेता-राजनेता हूं। उनके (विजयकांत के) निधन के बाद भी मुझे जनता का वही स्नेह महसूस होता है।”
दिलचस्प बात यह है कि इस दंपति की 28 वर्षीय बहू गौरी अब जयललिता की हमशक्ल के रूप में शुरुआत कर रही हैं। सेल्वराज मुस्कुराते हुए कहते हैं, “हम पूरा परिवार ही हमशक्लों का है। मैं और मेरी पत्नी लंबे समय से यह काम कर रहे हैं, लेकिन मेरी बहू इस क्षेत्र में नई है।”
रत्ना, जे. जयललिता की हमशक्ल। फोटो: विशेष व्यवस्था
अक्सर पेशेवर जरूरतें ही यह तय करती हैं कि हमशक्ल का रूप और नकल कैसी होगी।
चेन्नई के 60 वर्षीय एंटनी, जो एमजीआर और शिवाजी गणेशन दोनों की नकल कर सकते हैं, पिछले 20 वर्षों से यह काम कर रहे हैं। वे कहते हैं, “मैं आमतौर पर मंदिर उत्सव, शादियों और जन्मदिन समारोहों पर ध्यान देता हूं, लेकिन चुनाव के समय हमारे जैसे कलाकारों के लिए अच्छी कमाई का मौका होता है। मुझे एक दिन के प्रचार के लिए लगभग 5000 रुपये मिलते हैं।”
वे बताते हैं कि हालांकि वे शिवाजी गणेशन की नकल बेहतर करते हैं, लेकिन फिलहाल एमजीआर की नकल पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि पार्टियों की यही मांग है। “मुझे एमजीआर और शिवाजी गणेशन दोनों पसंद हैं। मेरी पहचान ज्यादा शिवाजी गणेशन की नकल से है, लेकिन चुनाव के समय पार्टियां मुझसे एमजीआर की नकल के लिए संपर्क करती हैं।”
सिर्फ अच्छा हमशक्ल होना ही चुनावी सीजन में काम पाने के लिए काफी नहीं होता, बल्कि उस स्टार का राजनीतिक प्रभाव भी मायने रखता है जिसकी नकल की जा रही है। 42 वर्षीय सेंथिल कुमार विजय के फैन और हमशक्ल हैं, लेकिन चूंकि टीवीके नेता राजनीति में नए हैं, इसलिए उन्हें चुनावी कार्यक्रम कम मिल रहे हैं।
वे कहते हैं, “मेरे दोस्त डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के लिए पूरे दिन के कार्यक्रम कर रहे हैं, जबकि मुझे पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। चुनावी परिदृश्य में डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा ही इसकी वजह हो सकता है।” सेंथिल 2014 से विजय की नकल कर रहे हैं।
कभी-कभी व्यावहारिक जरूरतें किसी कलाकार की दिशा भी बदल देती हैं। 62 वर्षीय सेलम स्टालिन सईद ने शुरुआत रजनीकांत के हमशक्ल के रूप में की थी। वे कहते हैं, “मैं एक डांसर था और रजनीकांत का प्रशंसक भी। उनकी शैली की नकल करना मेरी पसंद से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में मैंने एमके स्टालिन की नकल शुरू कर दी। चूंकि रजनीकांत राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, इसलिए चुनाव के दौरान स्टालिन के हमशक्ल की मांग ज्यादा होती है।”
सेलम इस समय पुडुचेरी में डीएमके के लिए प्रचार कर रहे हैं और कुछ दिनों में चेन्नई जाने वाले हैं।
चुनावी प्रचार में घंटों बिताना हमेशा आसान नहीं होता। स्टालिन के हमशक्ल बताते हैं, “हमसे उम्मीद की जाती है कि हम उम्मीदवार के साथ मतदाताओं के घर-घर जाएं। तेज धूप में पूरे दिन पैदल चलकर जितने ज्यादा घरों तक पहुंच सकें, कोशिश करते हैं। जिम्मेदारियां यहीं खत्म नहीं होतीं। रात में भी हमें मतदाताओं से जुड़ना होता है, जिसके लिए हमें वैन से ले जाया जाता है।”
सेल्वराज, विजयकांत के हमशक्ल। फोटो: विशेष व्यवस्था
हालांकि कलाकार अक्सर जिनकी नकल करते हैं उनके प्रशंसक होते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक सोच उनके काम में ज्यादा मायने नहीं रखती।
कनागरज, जो विजयकांत के हमशक्ल के रूप में प्रचार के लिए मदुरै जा रहे हैं, कहते हैं, “मेरा कई पार्टियों से वैचारिक मतभेद है, लेकिन जब मुझे हमशक्ल के रूप में काम मिलता है तो मैं उसे स्वीकार कर लेता हूं, क्योंकि यही मेरी आय का स्रोत है। मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी का वास्तविक समर्थन नहीं करता। हमशक्ल कलाकार के लिए राजनीति पीछे रहती है, सबसे अहम है रोज़ी-रोटी कमाना। अतिरिक्त कमाई के लिए यह सही समय होता है।”
इन कलाकारों को यह भी पता है कि चुनाव के दौरान मिलने वाला काम अस्थायी होता है। जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, राजनीतिक दलों के साथ उनका जुड़ाव भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद वे फिर मंदिर उत्सवों, शादियों, जन्मदिन पार्टियों या ब्रांड प्रमोशन जैसे कार्यक्रमों में प्रदर्शन करते हैं, जहां आमदनी समय और जगह के अनुसार 3000-4000 रुपये तक होती है, या पूरे दिन के कार्यक्रम के लिए 10,000 रुपये तक भी मिल सकते हैं। लेकिन अगला काम कब मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती, इसलिए चुनाव के दौरान होने वाली अतिरिक्त कमाई उनके लिए राहत लेकर आती है।
जीवनयापन के लिए धैर्य और परिवार का सहयोग जरूरी होता है। सेंथिल की पत्नी एक डांसर हैं और वे उनका समर्थन करती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि सेंथिल ने विजय के प्रति अपने लगाव के कारण यह रास्ता चुना है। वे कहते हैं, “जब मेरे पास नियमित कार्यक्रम नहीं होते या बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए पैसे कम पड़ते हैं, तो वह मेरी मदद करती हैं।”
अक्सर परिवार भी उन सितारों के प्रति कलाकारों के लगाव को साझा करते हैं जिनकी वे नकल करते हैं। सेलम के परिवार के लिए यह मायने रखता है कि वे मुख्यमंत्री के हमशक्ल हैं। वहीं, एंटनी के परिवार को एमजीआर और शिवाजी गणेशन की फिल्में पसंद हैं, इसलिए वे उनके इस काम को भी पसंद करते हैं।
जहां तक कुमार के परिवार की बात है, उनकी गृहिणी पत्नी और दो बच्चे—एक बेटा जो बीएससी का छात्र है और एक बेटी जो कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही है—भी उनके काम से खुश हैं। कुमार कहते हैं, “क्योंकि उन्हें विजयकांत पसंद हैं।”

