
तमिलनाडु चुनाव 2026: अन्नामलाई को टिकट क्यों नहीं? सोशल मीडिया पर नाराज़गी
अन्नामलाई को टिकट न मिलने पर सोशल मीडिया पर नाराज़गी देखने को मिली, जहां उनके कुछ समर्थकों ने NOTA दबाने की धमकी दी और कुछ ने एक लोकप्रिय चेहरे को नजरअंदाज करने के फैसले पर सवाल उठाए।
तमिलनाडु में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच निराशा है, क्योंकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख नेता के अन्नामलाई को 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जारी 27 उम्मीदवारों की सूची में जगह नहीं दी गई है।
इसके बजाय पार्टी हाईकमान ने उन्हें पुडुचेरी, केरल और पूरे तमिलनाडु में एनडीए के लिए प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
बीजेपी, जो AIADMK के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा है, ने 3 अप्रैल को अपनी उम्मीदवार सूची जारी की। इसमें तमिलसाई सौंदर्याजन (मायलापुर), वनाथी श्रीनिवासन (कोयंबटूर नॉर्थ) और केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन (अविनाशी) जैसे नाम शामिल हैं।
हाईकमान का फैसला
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नयनार नागेंद्रन ने कहा कि अन्नामलाई को टिकट न देना “हाईकमान का निर्णय” है।
अन्नामलाई ने केरल के कन्नूर में प्रचार के दौरान कहा,“इस चुनाव में मेरी भूमिका पूरे तमिलनाडु में उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने की है। अभी मुझे 7 अप्रैल तक पुडुचेरी और केरल में प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है, और उसके बाद 23 अप्रैल तक पूरे राज्य में बीजेपी और एनडीए उम्मीदवारों के लिए प्रचार करूंगा।”
तमिलिसाई सौंदरराजन ने भी कहा कि अन्नामलाई को “उचित जिम्मेदारी” जरूर दी जाएगी।
‘राज्य का समर्पित सिपाही’
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अन्नामलाई को “राज्य का समर्पित सिपाही” बताते हुए कहा कि वे एक सीट तक सीमित रहने के बजाय पूरे राज्य में काम करना चाहते हैं।
यह फैसला कई हफ्तों की अंदरूनी खींचतान के बाद आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अन्नामलाई सीट बंटवारे से नाराज थे, जिसमें बीजेपी को पश्चिमी कोंगु क्षेत्र में 27 “कठिन” सीटें मिली थीं।
उन्होंने कोयंबटूर की सिंगानल्लूर या सुलूर जैसी मजबूत सीटों की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोयंबटूर नॉर्थ ऑफर की गई, जो पहले से वनाथी श्रीनिवासन के पास थी।
नाराजगी के चलते उन्होंने चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखाई और 29 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोयंबटूर रैली में भी शामिल नहीं हुए।
उनके समर्थकों ने पलानी में केंद्रीय मंत्री मुरुगन का घेराव करते हुए विरोध भी किया।
1 अप्रैल को पीयूष गोयल के बुलावे पर अन्नामलाई पुडुचेरी से चेन्नई लौटे और बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए।
कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें इरोड जिले की मोडकुरिची सीट से उतारा जा सकता है, लेकिन अंतिम सूची में यह सीट कीर्तिका शिवकुमार को दे दी गई।
रणनीतिक फैसला?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई की आक्रामक शैली, युवाओं में लोकप्रियता और भीड़ जुटाने की क्षमता उन्हें एक राज्यव्यापी स्टार प्रचारक बनाती है। इसलिए उन्हें एक सीट पर उतारने के बजाय पूरे राज्य में प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है।
साथ ही, ईके पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK के साथ गठबंधन की मजबूरियां भी इस फैसले में अहम रहीं। एनडीए का लक्ष्य सीधे मुकाबले में DMK सरकार को हराना है।
इस बीच अभिनेता विजय की पार्टी TVK भी चुनावी समीकरण को जटिल बना रही है।
सोशल मीडिया पर नाराज़गी
अन्नामलाई को टिकट न मिलने पर सोशल मीडिया पर विरोध देखने को मिला। कुछ समर्थकों ने NOTA दबाने की बात कही, जबकि कुछ ने इसे लोकप्रिय चेहरे को नजरअंदाज करने का गलत फैसला बताया।
हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यह एक व्यावहारिक कदम है—पहले चुनाव जीतना जरूरी है, पद बाद में देखे जा सकते हैं।
विश्लेषकों की राय
वरिष्ठ पत्रकारों और विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई ने खुद चुनाव लड़ने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।
कुछ का कहना है कि अगर वे खुद को भविष्य का मुख्यमंत्री चेहरा मानते हैं, तो उन्हें कम से कम एक सीट से चुनाव लड़ना चाहिए था।
दूसरी ओर, यह भी माना जा रहा है कि उनका चुनाव न लड़ना एनडीए के लिए झटका हो सकता है, क्योंकि उनके समर्थकों का मजबूत आधार है।
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने और चुनाव प्रचार तेज होने के साथ, बीजेपी के 27 उम्मीदवार एक कठिन मुकाबले में उतरेंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या अन्नामलाई की प्रचार में सक्रिय भूमिका उनकी गैरमौजूदगी की कमी पूरी कर पाएगी। चुनाव 23 अप्रैल को होंगे और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

