
TVK प्रमुख विजय की चुनाव आयोग से मांग, तमिलनाडु के DGP-CS को तुरंत हटाएं
विजय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख तमिलनाडु के शीर्ष अधिकारियों के तबादले की मांग की। भेदभावपूर्ण व्यवहार और चुनावी रैलियों में बाधा डालने का लगाया गंभीर आरोप।
Tamil Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु की राजनीति में 'थलापति' विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा दांव खेला है। पार्टी प्रमुख विजय ने चुनाव आयोग (ECI) से तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुख्य सचिव सहित कई वरिष्ठ आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के तत्काल तबादले की मांग की है। विजय का आरोप है कि राज्य का प्रशासनिक और पुलिस तंत्र सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहा है और उनकी पार्टी के चुनावी अभियानों में जानबूझकर बाधाएं डाली जा रही हैं। शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के साथ हुई बैठक के बाद विजय ने यह औपचारिक प्रतिनिधित्व सौंपा।
इन बड़े अधिकारियों के तबादले की है मांग
विजय ने चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में राज्य के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित पदों पर तैनात अधिकारियों को हटाने का आग्रह किया है:
पुलिस नेतृत्व: तमिलनाडु के डीजीपी, चेन्नई पुलिस कमिश्नर, एडीजीपी (कानून-व्यवस्था), और इंटेलिजेंस विंग के प्रमुख।
प्रशासनिक नेतृत्व: राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, सार्वजनिक सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव-1।
इसके अलावा, चेन्नई सिटी कॉरपोरेशन के प्रशासन पर भी सवाल उठाए गए हैं। विजय का तर्क है कि इन अधिकारियों की "तटस्थता" संदिग्ध है और वे विपक्ष के खिलाफ मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं।
भेदभाव और बाधाओं के गंभीर आरोप
TVK प्रमुख ने चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतों की एक लंबी सूची रखी है। इसमें पेराम्बूर में एक बड़ी रैली की अनुमति न देना, आयोजन स्थलों पर बैरिकेडिंग करना और गड्ढे खोदकर भौतिक बाधाएं डालना शामिल है। विजय ने आरोप लगाया कि "भीड़ नियंत्रण" के नाम पर उनकी पार्टी को अनुमति देने से इनकार किया जा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल को रोड शो और रैलियों के लिए उदारतापूर्वक अनुमति दी जा रही है। उन्होंने विलीवक्कम स्थित पार्टी कार्यालय को बंद करने की कोशिशों और पार्टी समर्थकों की शिकायतों पर पुलिस की निष्क्रियता पर भी कड़ा ऐतराज जताया है।
करूर भगदड़ और अदालती कार्यवाही का हवाला
रिपोर्ट में सितंबर 2025 में करूर रैली के दौरान हुई दुखद भगदड़ का भी जिक्र है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य को रैलियों के लिए एक 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया था। विजय की पार्टी ने इस प्रस्तावित SOP पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त दलों के साथ भेदभाव करती है। उन्होंने मांग की है कि चुनाव आचार संहिता (MCC) के दौरान केवल 'सुविधा पोर्टल' (Suvidha Portal) और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का ही पालन होना चाहिए।
चुनाव आयोग से विजय की प्रमुख मांगें
विजय ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग से निम्नलिखित कदम उठाने का अनुरोध किया है:
विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति: चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष और पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए जाएं।
तत्काल तबादले: चिन्हित किए गए वरिष्ठ अधिकारियों का तुरंत स्थानांतरण किया जाए।
समान अवसर: सुविधा पोर्टल के माध्यम से सभी दलों के लिए पारदर्शी और समान अनुमति प्रणाली सुनिश्चित हो।
निर्णयों की समीक्षा: 15 मार्च (आचार संहिता लागू होने) के बाद लिए गए सभी प्रशासनिक निर्णयों की जांच की जाए।
लोकतंत्र के लिए 'समान अवसर' की मांग
प्रतिनिधित्व के अंत में विजय ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा नहीं की गई, तो तमिलनाडु के लोगों को स्वतंत्र चुनावी माहौल में मतदान करने के मौलिक अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है। विजय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केवल संविधान के तहत गारंटीकृत "समान अवसर" की मांग कर रही है। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।
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