
वीरप्पन की विरासत पर सियासत, बेटी और पत्नी चुनाव मैदान में
तमिलनाडु चुनाव में वीरप्पन का परिवार मैदान में उतरकर उनकी छवि को अपराधी से तमिल अधिकारों के रक्षक के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें कुख्यात डकैत वीरप्पन के परिवार ने चुनावी मैदान में उतरकर उनकी छवि को नया रूप देने की कोशिश की है। परिवार उनके अतीत को एक तस्कर और अपराधी के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्रवादी और तमिल अधिकारों के रक्षक के रूप में पेश करना चाहता है।
परिवार की चुनावी एंट्री
वीरप्पन की बड़ी बेटी विद्यारानी मेट्टूर सीट से नाम तमिलर काटची की उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं उनकी पत्नी Muthulakshmi कृष्णगिरी सीट से Tamilaga Vazhvurimai Katchi की ओर से मैदान में हैं। दोनों पार्टियां तमिल राष्ट्रवाद की विचारधारा को अपने अभियान का मुख्य आधार बना रही हैं।
बेटी का राजनीतिक एजेंडा
पेशे से वकील विध्यारानी इस चुनाव के जरिए अपने पिता की छवि को बदलने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि उनके पिता को गलत तरीके से समझा गया और वे वास्तव में शोषण के खिलाफ खड़े होने वाले व्यक्ति थे। इस सोच को समर्थन देते हुए NTK प्रमुख Seeman ने एक विवादित बयान में वीरप्पन की तुलना Velupillai Prabhakaran से करते हुए कहा कि ''अगर प्रभाकरन हमारी जाति के रक्षक थे, तो वीरप्पन हमारे जंगलों के रक्षक थे।”
यह विध्यारानी का पहला चुनाव नहीं है। इससे पहले उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में कृष्णगिरी सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें एक लाख से अधिक वोट मिले थे। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Pattali Makkal Katchi (PMK) से की, फिर 2020 में Bharatiya Janata Party (भाजपा) में शामिल हुईं और बाद में 2024 में NTK का हिस्सा बन गईं।
विध्यारानी का कहना है कि उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से NTK जॉइन किया। वह अपने प्रचार में रोजगार, बुनियादी ढांचे और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जोर दे रही हैं।
पत्नी का फोकस: ग्रामीण मुद्दे
कृष्णगिरी में वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी भी चुनावी मैदान में हैं। उनका अभियान स्थानीय मुद्दों, खासकर किसानों की समस्याओं पर केंद्रित है।वह पानी की उपलब्धता, फसल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही हैं। मुथुलक्ष्मी इससे पहले 2006 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ चुकी हैं।
जनता का समर्थन मिलने का दावा
हालांकि दोनों उम्मीदवारों का संबंध देश के सबसे कुख्यात अपराधियों में से एक से रहा है, फिर भी उनका दावा है कि उन्हें जनता का समर्थन और स्वीकार्यता मिल रही है।इस चुनाव में उनका उद्देश्य न केवल राजनीतिक जीत हासिल करना है, बल्कि वीरप्पन की छवि को एक नए दृष्टिकोण से स्थापित करना भी है।

