बंगाल चुनाव से पहले बड़ा बवाल, एक ही बूथ से काटे 340 मुस्लिम वोटरों के नाम, BLO का नाम भी गायब
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बंगाल चुनाव से पहले बड़ा बवाल, एक ही बूथ से काटे 340 मुस्लिम वोटरों के नाम, BLO का नाम भी गायब

पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वैध दस्तावेज जमा करने के बावजूद करीब 340 मुस्लिम मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं, जिनमें खुद वहां के बूथ लेवल ऑफिसर भी शामिल है।


Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। बशीरहाट नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र (बूथ) से कथित तौर पर एक साथ 340 मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। यह मामला तब और भी अजीब हो गया जब पता चला कि उस बूथ के सरकारी अधिकारी यानी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) का अपना नाम भी लिस्ट से गायब है।

क्या है पूरा विवाद?

मामला बशीरहाट ब्लॉक-2 के बेगमपुर बीबीपुर ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 5 (बोरों गोबरा गांव) का है। इस बूथ पर कुल 992 रजिस्टर्ड मतदाता थे। विवाद की शुरुआत तब हुई जब चुनाव आयोग ने मंगलवार शाम को पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की। इस लिस्ट के आते ही गांव में हड़कंप मच गया। पता चला कि 38 लोगों के नाम तो सामान्य कारणों (जैसे मृत्यु या स्थान परिवर्तन) से हटाए गए थे, लेकिन इनके अलावा 340 अन्य मतदाताओं के नाम सीधे डिलीट कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी नाम मुस्लिम समुदाय से जुड़े हुए हैं।

'अंडर एडजुडिकेशन' का पेच

जानकारी के मुताबिक, इन 340 नामों को पहले ड्राफ्ट लिस्ट में 'अंडर एडजुडिकेशन' (जांच के अधीन) की श्रेणी में रखा गया था। चुनाव आयोग के नियमों के तहत इनकी पात्रता की जांच होनी थी। मंगलवार शाम 5 बजे जारी लिस्ट में इन सभी नामों को हटा दिया गया। इसमें सबसे बड़ा झटका खुद BLO मोहम्मद शफिउल आलम को लगा, जिनका अपना नाम भी डिलीट कर दिया गया है।

'हमें टारगेट किया गया'

जैसे ही यह जानकारी फैली, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। 100 से ज्यादा लोगों ने बीएलओ के घर और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रभावित मतदाताओं में से एक, काजीरुल मंडल ने बताया, "चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि 11 में से कोई भी एक वैध दस्तावेज देना काफी है। हममें से कई लोगों ने 3 से 4 दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी हमारे नाम काट दिए गए। यह हमें जानबूझकर टारगेट करने जैसा है।"

BLO की बेबसी और कानूनी लड़ाई

बीएलओ मोहम्मद शफिउल आलम ने इस मामले पर गहरी निराशा जताई है। उन्होंने बताया, "मैंने इस संबंध में बशीरहाट ब्लॉक-2 के बीडीओ (Block Development Officer) से संपर्क किया, लेकिन वहां से जवाब मिला कि अब इस स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता।" शफिउल आलम अब इस मामले को ट्रिब्यूनल में ले जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी ओर, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर से अभी तक इस मामले पर कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इस घटना ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

सियासी सरगर्मी तेज

बंगाल चुनावों से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर एक ही समुदाय के नाम हटने से राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह मतदाताओं को डराने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश है। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस विवाद को शांत करना और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।

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