
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द मिल सकती है गुड न्यूज! जयशंकर की रुबियो से हुई बात
India-US relations: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। इस दौरान कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
India-US trade deal: एक तरफ टैरिफ की धमकी, दूसरी तरफ फोन पर कूटनीति। भारत-अमेरिका रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई ताजा बातचीत से संकेत मिल रहे हैं कि लंबे समय से लटकी ट्रेड डील पर अब जल्द कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। इस दौरान कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। जयशंकर और रुबियो के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा सहयोग, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र जैसे अहम विषय शामिल रहे। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बातचीत को अच्छा और सकारात्मक बताया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ अच्छी बातचीत की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और परमाणु सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की है और आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जयशंकर और रुबियो ने चल रही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में साझा रुचि पर चर्चा की।
ट्रेड डील क्यों अटकी हुई है?
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। इसके बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में थोड़ी तल्खी आ गई थी। दोनों देशों ने पिछले साल ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत की, लेकिन अमेरिका की ओर से भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को खोलने की मांग के चलते यह समझौता अब तक अटका हुआ है।
अमेरिका के राजदूत का बड़ा बयान
सोमवार को अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए भारत जितना महत्वपूर्ण देश कोई और नहीं है। जयशंकर और रुबियो की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। हालांकि भारतीय सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि इस फैसले का भारत पर न्यूनतम असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत और ईरान के बीच व्यापार बहुत सीमित है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और ईरान के बीच व्यापार फिलहाल 2 अरब डॉलर से भी कम है। पिछले साल यह आंकड़ा करीब 1.6 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल व्यापार का सिर्फ 0.15 प्रतिशत है। ईरान भारत के शीर्ष 50 व्यापारिक साझेदारों में भी शामिल नहीं है।

