
ईरान-इजराइल तनाव से कच्चे तेल में उछाल, वैश्विक बाजार सहमे
मध्य-पूर्व में युद्ध तेज होने से कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर के करीब पहुंचीं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में खतरे और आपूर्ति संकट से वैश्विक बाजार व अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा।
मध्य-पूर्व में युद्ध तेज होने के साथ सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, हालांकि बाद में इनमें कुछ गिरावट भी दर्ज की गई। ईरान से जुड़े युद्ध के बढ़ने से क्षेत्र में तेल उत्पादन और शिपिंग पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत दिन की शुरुआत में बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन बाद में यह घटकर लगभग 107.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं अमेरिका में उत्पादित हल्के मीठे कच्चे तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी बढ़कर 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, जो बाद में गिरकर करीब 103 डॉलर प्रति बैरल रह गई।
युद्ध के चलते नागरिक ढांचे पर हमलों का असर भी बढ़ता जा रहा है। बहरीन ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने पेयजल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण एक डीसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया। दूसरी ओर, इजराइल द्वारा रात में किए गए हमलों के बाद तेहरान के तेल डिपो में आग और धुआं देखा गया।
अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका यह युद्ध उन देशों और इलाकों को भी अपनी चपेट में ले रहा है जो पर्शियन गल्फ से तेल और गैस के उत्पादन और परिवहन के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
हालांकि बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई, जब यह खबर सामने आई कि ग्रुप ऑफ सेवन (G7) के कुछ औद्योगिक देश बाजार पर दबाव कम करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार जारी करने पर विचार कर रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल करने के विचार को कमतर बताते हुए कहा कि देश में तेल की आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतें जल्द कम हो जाएंगी।
स्वतंत्र शोध संस्था रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, हर दिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का करीब 20% है, आम तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता है।
लेकिन ईरान की संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। यह जलमार्ग उत्तर में ईरान से घिरा है और इसके जरिए सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान से तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
निर्यात में आई बाधाओं के कारण इराक, कुवैत और यूएई ने अपने तेल उत्पादन में कटौती कर दी है, क्योंकि भंडारण टैंक तेजी से भर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान, इजराइल और अमेरिका ने भी कई तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
तेल और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतें ईंधन की लागत को ऊपर धकेल रही हैं, जिसका असर अन्य उद्योगों पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं, जो मध्य-पूर्व से ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं, इस झटके के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।ब्रेंट और अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव आखिरी बार 2022 में ऐसे स्तरों के आसपास पहुंचे थे, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था।
ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ती है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव पड़ता है और उपभोक्ता खर्च घटता है, जो कई बड़ी अर्थव्यस्थाओं के विकास का प्रमुख आधार है।सोमवार को टोक्यो का निक्केई 225 सूचकांक 5.2% गिर गया, जबकि अन्य बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी वायदा बाजार भी 1.5% से अधिक नीचे रहे।
शुक्रवार को S&P 500 सूचकांक 1.3% गिरा, जबकि डाउ जोन्स एक समय 945 अंक तक लुढ़क गया और अंत में लगभग 450 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट भी 1.6% नीचे चला गया।
अमेरिका में ईंधन की कीमतों में भी तेजी आई है। AAA मोटर क्लब के अनुसार रविवार को एक गैलन सामान्य पेट्रोल की कीमत 3.45 डॉलर हो गई, जो एक सप्ताह पहले से लगभग 47 सेंट अधिक है। वहीं डीजल की कीमत लगभग 4.60 डॉलर प्रति गैलन रही, जो एक हफ्ते में करीब 83 सेंट बढ़ी है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने CNN के कार्यक्रम “स्टेट ऑफ द यूनियन” में कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें जल्द ही फिर 3 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ जाएंगी।
उन्होंने कहा, “समय सीमा का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन सबसे खराब स्थिति में भी यह मामला हफ्तों का है, महीनों का नहीं।”हालांकि कुछ विश्लेषकों और निवेशकों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसे संभालना मुश्किल हो सकता है।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि रविवार तड़के तेहरान के तेल डिपो और पेट्रोलियम ट्रांसफर टर्मिनल पर इजराइली हमलों में चार लोगों की मौत हो गई।इजराइली सेना का कहना है कि इन डिपो का इस्तेमाल ईरान की सेना मिसाइल लॉन्च करने के लिए ईंधन आपूर्ति के रूप में कर रही थी। वहीं ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने चेतावनी दी कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर और गंभीर होता जाएगा।
ईरान रोजाना लगभग 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिनमें से अधिकांश चीन को जाता है। यदि युद्ध के कारण यह आपूर्ति बाधित होती है तो चीन को अन्य स्रोतों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
युद्ध के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि यह तेल जितनी तेज नहीं रही। रविवार देर तक इसकी कीमत लगभग 3.33 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक फीट थी, जो शुक्रवार के 3.19 डॉलर के बंद भाव से 4.6% अधिक है। पिछले सप्ताह इसमें लगभग 11% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

