
टैरिफ से वसूले गए 133 अरब डॉलर का अब क्या होगा?, क्या पैसा वापस करेंगे ट्रंप?
अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में पिछले वर्ष लौटते ही घोषित किए गए टैरिफ से अब तक 133 अरब डॉलर से अधिक की वसूली कर ली है, जिन्हें कुछ महीनों बाद लागू किया गया था।
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले तक ट्रंप प्रशासन दुनियाभर के देशों से टैरिफ के जरिये 133 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि वसूल चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे व्यापक और महत्वाकांक्षी टैरिफ को अमान्य करार दिए जाने से अब ये बड़ा सवाल अनुत्तरित रह गया है कि अब तक वसूले जा चुके 133 अरब डॉलर का क्या होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले से ट्रंप के लगाए टैरिफ को रद्द कर दिया था। न्यायाधीशों ने उन टैरिफ को रद्द कर दिया, जिन्हें ट्रंप ने जनवरी में व्हाइट हाउस लौटते ही घोषित किया था और अगस्त में लागू किया था। लेकिन अदालत ने पहले से वसूले गए 133 अरब डॉलर की वापसी पर कोई टिप्पणी नहीं की।
व्यवसाय पहले ही रिफंड की मांग कर रहे हैं, हालांकि आगे की राह आसान नहीं दिख रही है। व्यापार कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अंततः आयातकों को उनका पैसा मिल सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा।
एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के अनुसार, व्यापार वकील जॉयस एडेटुटु ने कहा, “कुछ समय तक यह प्रक्रिया ऊबड़-खाबड़ रहने वाली है।”
क्लार्क हिल लॉ फर्म के वकीलों की सलाह के मुताबिक, रिफंड की प्रक्रिया अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी, न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और अन्य निचली अदालतों के माध्यम से तय की जाएगी।
एडेटुटु ने कहा, “राशि बहुत बड़ी है। अदालतों के लिए भी मुश्किल होगी और आयातकों के लिए भी।” हालांकि उन्होंने जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस मजबूती से टैरिफ को खारिज किया है, उसके बाद किसी न किसी रूप में रिफंड का विकल्प देना कठिन नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
6-3 के फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों के कानून का उपयोग कर टैरिफ लगाना ट्रंप के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। उनके द्वारा नियुक्त तीन न्यायाधीशों में से दो भी बहुमत के साथ रहे।
मामला 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगभग हर देश पर लगाए गए दो अंकों वाले टैरिफ से जुड़ा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयात पर कर लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
दिसंबर के मध्य तक अमेरिकी कस्टम्स एजेंसी ने IEEPA के तहत 133 अरब डॉलर की वसूली कर ली थी। हालांकि उपभोक्ताओं को सीधे रिफंड मिलने की संभावना कम है, क्योंकि कंपनियों ने टैरिफ की लागत बढ़ी हुई कीमतों के रूप में ग्राहकों पर डाल दी थी। ऐसे में रिफंड अधिकतर व्यवसायों को ही मिल सकता है।
असहमति जताते हुए न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि अदालत ने रिफंड के सवाल को नजरअंदाज किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि “रिफंड प्रक्रिया अव्यवस्थित हो सकती है।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला आने वाले वर्षों तक अदालतों में चल सकता है।
क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
IEEPA टैरिफ हटने से महंगाई के दबाव में कुछ राहत मिल सकती है। टैक्स रिफंड की तरह ये भुगतान खर्च और विकास को थोड़ी बढ़त दे सकते हैं, हालांकि इसका समग्र प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
टीडी सिक्योरिटीज के अनुमान के अनुसार, संभावित रिफंड में 12 से 18 महीने लग सकते हैं। अमेरिकी कस्टम्स एजेंसी के पास शुल्क वापसी की प्रक्रिया मौजूद है, जिसे इस मामले में विस्तारित किया जा सकता है।
1990 के दशक में अदालतों ने निर्यात पर लगाए गए एक हार्बर मेंटेनेंस शुल्क को असंवैधानिक घोषित किया था और निर्यातकों को रिफंड के लिए आवेदन करने की व्यवस्था बनाई थी।
हालांकि, जहां हजारों आयातक और अरबों डॉलर एक साथ हैं, इस पैमाने का मामला पहले कभी सामने नहीं आया ।
व्यापार वकील एलेक्सिस अर्ली के हवाले से बताया गया है कि, “सिर्फ इसलिए कि प्रक्रिया कठिन है, सरकार गैरकानूनी रूप से वसूले गए शुल्क अपने पास नहीं रख सकती।”
कुछ कंपनियां जैसे कॉस्टको, रेव्लॉन और बम्बल बी फूड्स पहले ही रिफंड के लिए मुकदमा दायर कर चुकी हैं। आगे और कानूनी विवाद होने की संभावना है।
उपभोक्ताओं को सीधे कोई बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यह साबित करना कठिन होगा कि बढ़ी कीमतें सीधे किसी खास टैरिफ से जुड़ी थीं।
इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने अपने राज्य के 51.1 लाख परिवारों की ओर से रिफंड की मांग की है। उनका दावा है कि टैरिफ से प्रत्येक परिवार पर औसतन 1,700 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, कुल मिलाकर 8.7 अरब डॉलर।
नेवादा के कोषाध्यक्ष ज़ैक कोनाइन ने भी 2.1 अरब डॉलर की वापसी का अनुरोध संघीय सरकार को भेजा है। उनका कहना है कि वे नेवादा के परिवारों से वसूले गए हर डॉलर को वापस लाने की कोशिश करेंगे।

