एयर इंडिया की बड़ी चूक: कनाडा के लिए उड़ाया गलत विमान, 9 घंटे बाद वापसी
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एयर इंडिया की बड़ी चूक: कनाडा के लिए उड़ाया गलत विमान, 9 घंटे बाद वापसी

एयर इंडिया की लापरवाही: बिना मंजूरी वाले विमान ने कनाडा के लिए भरी उड़ान, 4 घंटे बाद चीन के ऊपर से मोड़ा गया रास्ता, 9 घंटे हवा में रहने के बाद दिल्ली लौटा विमान।


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Air India's Blunder : सरकारी से निजी हाथों (टाटा समूह) में जाने के बाद एयर इंडिया अपनी सेवाओं को सुधारने के दावे तो कर रही है, लेकिन शुक्रवार (20 मार्च 2026) को एक ऐसी 'ऑपरेशनल' गलती सामने आई जिसने एयरलाइन की योजना और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली से वैंकूवर (कनाडा) के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI185 को हवा में करीब साढ़े चार घंटे बिताने के बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा। वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे। एयरलाइन ने गलती से एक ऐसा विमान इस रूट पर तैनात कर दिया था, जिसे कनाडा के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने या वहां उतरने की नियामक मंजूरी (Regulatory Clearance) ही नहीं थी। कुल 9 घंटे की उड़ान के बाद यात्री वहीं उतर गए जहां से उन्होंने सफर शुरू किया था। इस घटना से न केवल यात्रियों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी हुई, बल्कि एयरलाइन को भी करोड़ों रुपये के ईंधन और ऑपरेशनल नुकसान का सामना करना पड़ा है।


चीन के आसमान से वापस मुड़ा विमान: क्या थी असली वजह?
फ्लाइट AI185 ने कल सुबह 11:34 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से वैंकूवर के लिए उड़ान भरी थी। विमान अपने निर्धारित पूर्वी मार्ग पर आगे बढ़ रहा था। जब विमान चीन के आसमान में कुनमिंग (Kunming) के पास पहुंचा, तब एयरलाइन प्रबंधन को अपनी बड़ी गलती का अहसास हुआ। दरअसल, कनाडा जाने के लिए एयर इंडिया के पास केवल बोइंग 777-300ER बेड़े को संचालित करने की मंजूरी है। लेकिन गलती से इस रूट पर बोइंग 777-200LR विमान को भेज दिया गया था। विमानन नियमों के अनुसार, अलग-अलग देशों की मंजूरियां विमान के प्रकार (Aircraft Type) या कभी-कभी विशिष्ट 'टेल नंबर' के आधार पर होती हैं। बिना वैध अनुमति के कनाडा के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होता, इसलिए बीच रास्ते से ही विमान को वापस दिल्ली बुला लिया गया।

9 घंटे की उड़ान और करोड़ों का 'तेल' स्वाहा
दिल्ली से रवाना होने के करीब 4 घंटे बाद वापस मुड़ने और फिर दिल्ली उतरने में कुल 9 घंटे का समय लगा। विमान शाम करीब 7:19 बजे दिल्ली में सुरक्षित उतरा। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान परिचालन स्थितियों के आधार पर प्रति घंटे लगभग 8 से 9 टन ईंधन जलाता है। ऐसे में 9 घंटे की इस बेकार उड़ान में एयरलाइन ने लगभग 70 से 80 टन ईंधन फूंक दिया, जिसकी कीमत करोड़ों में है। इसके अलावा यात्रियों के ठहरने और होटल के इंतजाम ने एयरलाइन के घाटे को और बढ़ा दिया है।

यात्रियों की परेशानी और एयर इंडिया का बयान
9 घंटे तक हवा में रहने के बाद जब यात्रियों को पता चला कि वे वैंकूवर के बजाय वापस दिल्ली पहुंच गए हैं, तो उनकी नाराजगी सातवें आसमान पर थी। एयर इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे "परिचालन संबंधी समस्या" (Operational Issue) बताया। एयरलाइन ने कहा, "विमान सुरक्षित रूप से उतरा और सभी यात्री व चालक दल नीचे उतर गए। मेहमानों को हुई असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है।" एयरलाइन ने दावा किया कि ग्राउंड टीम ने यात्रियों के लिए होटल और भोजन का प्रबंध किया और उन्हें आज सुबह दूसरी फ्लाइट से उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है।

विमानन क्षेत्र में जवाबदेही का सवाल
यह घटना एयर इंडिया के फ्लाइट डिस्पैच और शेड्यूलिंग विभाग की एक बड़ी विफलता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमान का चयन करने से पहले कई स्तरों पर जांच की जाती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बिना मंजूरी वाले विमान को रनवे तक पहुंचने और उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिल गई? इस चूक ने न केवल एयर इंडिया की छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय विमानन सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठाए हैं।


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