डिजिटल अरेस्ट से ज्यादा बड़े हैं बैंकिंग फ्रॉड, RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
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डिजिटल अरेस्ट से ज्यादा बड़े हैं बैंकिंग फ्रॉड, RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

बैंकिंग फ्रॉड एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें धोखा या गलत तरीकों से बैंक या उसके ग्राहकों से पैसा या संपत्ति हासिल की जाती है।


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हाल के दिनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर ठग लोगों से पैसे ऐंठते हैं। ऐसे मामलों की काफी चर्चा होती है, लेकिन ये ठगी की रकम के लिहाज से छोटे अपराध माने जाते हैं। असल में, देश में होने वाले बड़े बैंकिंग फ्रॉड ज्यादातर औपचारिक सेक्टर से जुड़े होते हैं। इनमें अमीर व्यक्ति और बड़ी कंपनियां शामिल रहती हैं, जो सीधे बैंक अधिकारियों के संपर्क में रहकर कर्ज लेते हैं। इसी वजह से ऐसे फ्रॉड अक्सर सुर्खियों में नहीं आ पाते। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्तियां और प्रगति 2024-25’ में साफ तौर पर कही गई है। यह रिपोर्ट सोमवार, 29 दिसंबर को जारी की गई।

कर्ज के जरिए सबसे ज्यादा बैंकिंग फ्रॉड

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बैंकिंग फ्रॉड का सबसे बड़ा हिस्सा ‘एडवांस’ (Advances) के जरिए होता है। RBI के अनुसार, एडवांस में कैश क्रेडिट, टर्म लोन, बिल्स और अन्य कर्ज शामिल होते हैं। इस तरह के फ्रॉड में कुछ कर्ज लेने वाले लोग जानबूझकर धोखाधड़ी करते हैं। वे बिना कर्ज चुकाने की मंशा के बैंक से बड़ी रकम का लोन ले लेते हैं, जिससे बैंकों को भारी नुकसान होता है। आमतौर पर ये मामले कॉरपोरेट कंपनियों को दिए गए बड़े कर्ज से जुड़े होते हैं।

बैंकिंग फ्रॉड क्या होता है?

बैंकिंग फ्रॉड एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें धोखा या गलत तरीकों से बैंक या उसके ग्राहकों से पैसा या संपत्ति हासिल की जाती है। इसमें फर्जी लोन आवेदन, पहचान की चोरी, फिशिंग, अनधिकृत खाते से पैसे निकालना जैसे तरीके शामिल होते हैं।

10 साल में 91% फ्रॉड

वित्त वर्ष 2016 से 2025 तक के 10 सालों में बैंकों ने कुल 4.98 लाख करोड़ रुपये के बैंकिंग फ्रॉड की रिपोर्ट की। इनमें से 4.55 लाख करोड़ रुपये यानी 91.4 फीसदी फ्रॉड केवल एडवांस (कर्ज) से जुड़े थे।

FY26 की पहली छमाही में भी वही हाल

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में कुल 21,515 करोड़ रुपये के बैंकिंग फ्रॉड सामने आए। इसमें से 81 फीसदी फ्रॉड एडवांस से जुड़े थे। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान फ्रॉड की राशि 30 फीसदी बढ़ गई, जबकि मामलों की संख्या में 72 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यानी मामले कम हुए, लेकिन रकम कहीं ज्यादा रही।

2018 के बाद अचानक बढ़े बड़े फ्रॉड

FY18 के बाद बैंकिंग फ्रॉड में अचानक तेज बढ़ोतरी देखी गई। इस दौरान कई बड़े बैंक और NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां) घोटालों में फंसीं। इनमें PNB, Yes Bank, ICICI Bank, लक्ष्मी विलास बैंक, IL&FS, HDIL और DHFL जैसे नाम शामिल हैं।

कार्ड और इंटरनेट फ्रॉड की रकम कम

डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, मैलवेयर और पहचान चोरी जैसे तरीकों से होने वाले कार्ड और इंटरनेट फ्रॉड की रकम अपेक्षाकृत बहुत कम है। FY16 से FY26 के बीच ऐसे फ्रॉड की कुल राशि 2,192 करोड़ रुपये रही, जो कुल बैंकिंग फ्रॉड का सिर्फ 0.6 फीसदी है। FY26 की पहली छमाही में यह हिस्सा घटकर 0.07 फीसदी रह गया। हालांकि, ऐसे फ्रॉड की संख्या बहुत ज्यादा होती है, इसी वजह से ये मामले अक्सर खबरों में बने रहते हैं।

FY25 में बैंकिंग फ्रॉड पर RBI की अहम टिप्पणियां

RBI की रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 को लेकर कुछ अहम बातें कही गई हैं:-

सरकारी बैंक

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में फ्रॉड की रकम के लिहाज से 70.7 फीसदी हिस्सा रहा। इन बैंकों में एडवांस से जुड़े फ्रॉड की संख्या और रकम दोनों सबसे ज्यादा रही।

निजी बैंक

निजी बैंकों (PVBs) में फ्रॉड के 59.3 फीसदी मामले दर्ज हुए। यहां कार्ड और इंटरनेट फ्रॉड के मामले ज्यादा थे, लेकिन रकम का बड़ा हिस्सा फिर भी कर्ज से जुड़े फ्रॉड का रहा।

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