बजट 2026: राजकोषीय मजबूती पर जोर और सर्विस एक्सपोर्ट का बड़ा लक्ष्य
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बजट 2026: राजकोषीय मजबूती पर जोर और सर्विस एक्सपोर्ट का बड़ा लक्ष्य

वित्त मंत्री ने घाटा 4.3% तक घटाने का लक्ष्य रखा। सर्विस एक्सपोर्ट को 2047 तक 10% करने और डिफेंस से लेकर विदेशी निवेश तक के लिए बड़े नीतिगत बदलावों का ऐलान किया।


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Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट 2026 पिछले बजट की ही एक निरंतरता है, जिसमें विस्तार के बजाय 'राजकोषीय मजबूती' (Fiscal Consolidation) पर कड़ा ध्यान केंद्रित किया गया है। यह फैसला कई जानकारों के लिए अप्रत्याशित है, क्योंकि हाल ही में जारी वित्त वर्ष 2026 के अग्रिम अनुमानों में वास्तविक जीडीपी विकास दर पहली छमाही के 8 प्रतिशत से गिरकर पूरे साल के लिए 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था के मुख्य इंजन 'निजी अंतिम उपभोग व्यय' (PFCE) की वृद्धि भी 7.5 प्रतिशत से घटकर 7.1 प्रतिशत पर आ गई है। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है, जिसका उद्देश्य राजकोषीय घाटे और कर्ज के बोझ को कम कर भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को और अधिक स्थिर बनाना है।

राजकोषीय मजबूती और बजट अनुमान

सरकार ने राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2026 (RE) के 4.4 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इसी तरह, प्राथमिक घाटे को 0.8 प्रतिशत से घटाकर 0.7 प्रतिशत पर लाया जाएगा। कुल कर्ज को जीडीपी के 56.1 प्रतिशत से कम कर 55.6 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। वित्त मंत्री के सामने राजस्व प्राप्ति (Revenue Receipt) की चुनौती भी है, जिसकी वृद्धि दर पिछले साल के 10.1 प्रतिशत से गिरकर वित्त वर्ष 2027 (BE) में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राजस्व घाटा फिलहाल जीडीपी के 1.5 प्रतिशत पर बरकरार है।


पूंजीगत व्यय (Capex) और विकास की रणनीति


विकास की मुख्य कमान अब भी सरकारी पूंजीगत व्यय के पास है। इसका आवंटन वित्त वर्ष 2026 (BE) के ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो 8.9 प्रतिशत की वृद्धि है। अन्य प्रमुख फोकस क्षेत्रों में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना, नई तकनीक में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, और टैरिफ बाधाओं को कम कर निर्यात को बढ़ाना शामिल है।


रक्षा बजट और 'ऑपरेशन सिंदूर'


यह जानकर हैरानी हो सकती है कि रक्षा आवंटन जीडीपी के 1.6 प्रतिशत (RE) से घटकर 1.5 प्रतिशत रह गया है, हालांकि पूर्ण राशि के रूप में यह ₹0.2 लाख करोड़ अधिक है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के माहौल में घरेलू रक्षा उत्पादन और लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक बड़े उछाल की उम्मीद थी, लेकिन बजट आवंटन ने संतुलन बनाए रखा है।


सर्विस एक्सपोर्ट: विकसित भारत का कोर ड्राइवर


इस बजट को सर्विस एक्सपोर्ट को "कोर ड्राइवर" बनाने के वादे के लिए याद किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि वैश्विक सेवाओं में भारत की हिस्सेदारी 4.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 10 प्रतिशत की जाए। इसके लिए एक उच्च स्तरीय 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' स्थायी समिति गठित की जाएगी। यह समिति न केवल विकास के क्षेत्रों की पहचान करेगी, बल्कि एआई (AI) और कौशल आवश्यकताओं से जुड़ी चुनौतियों का भी अध्ययन करेगी।


FDI और व्यापार बाधाओं में ढील


बीमा क्षेत्र में 100% FDI के बाद अब पोर्टफोलियो निवेश योजना के माध्यम से निवेश सीमाएं बढ़ाई गई हैं। व्यक्तिगत सीमा 5% से 10% और कुल सीमा 10% से 24% की गई है। विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने और डेटा सेंटर सेवाओं के लिए 15% का 'सेफ हार्बर' देने का प्रस्ताव है। व्यापार के मोर्चे पर, यूरोपीय संघ (EU) के साथ समझौतों के तहत विमान पुर्जों और परमाणु संयंत्र उपकरणों पर टैरिफ हटाया गया है।



कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा का सच


विकास और खपत को बढ़ाने के लिए सरकार ने कई योजनाओं की सूची दी है, लेकिन आवंटन और खर्च का अंतर चिंताजनक है। कृषि क्षेत्र में ₹3,833 करोड़ की वृद्धि की गई है, जबकि पिछले साल ₹6,985 करोड़ खर्च ही नहीं हुए। यही स्थिति ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य-शिक्षा क्षेत्र की है, जहाँ जीडीपी के प्रतिशत के रूप में आवंटन दशकों से स्थिर है।



टैक्स और राज्यों की स्थिति


मध्यम वर्ग के लिए कोई नई राहत नहीं है, बल्कि शेयर बाजार निवेश पर एसटीटी (STT) बढ़ा दिया गया है। फ्यूचर्स पर यह 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% होगा। बायबैक पर अब शेयरधारकों को कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। राज्यों के लिए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें निराशाजनक रहीं, क्योंकि अनुदान राशि में ₹23,556 करोड़ की कटौती की गई है।

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