Budget 2026: किस सेक्टर पर बरसी कृपा, कौन रह गया खाली हाथ?
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Budget 2026: किस सेक्टर पर बरसी कृपा, कौन रह गया खाली हाथ?

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स राहत, MSME और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देते हुए 2047 तक विकसित भारत का रोडमैप पेश किया।


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक दिशा मजबूत और स्थिर बनी हुई है तथा देश 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य फोकस आर्थिक विकास को गति देने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के तहत समावेशी प्रगति सुनिश्चित करने पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने असमंजस की बजाय निर्णायक कदम उठाए हैं, बड़े आर्थिक सुधार लागू किए हैं, वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता दी है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की रणनीति

सीतारमण ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में व्यापार और बहुपक्षवाद दबाव में हैं, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो रही हैं और पानी, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे हालात में भारत संतुलन और समावेशन के साथ आगे बढ़ते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाता रहेगा।

आयकर को लेकर बड़े फैसले

बजट में करदाताओं को राहत देते हुए संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव किया गया है। मामूली शुल्क के साथ करदाता इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल उद्देश्यों के लिए टीसीएस की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही विदेश यात्रा पैकेज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल से लागू होगा, जो छह दशक पुराने कर कानून की जगह लेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को मजबूती

सरकार ने 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है। साथ ही टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखने पर जोर दिया गया है।

पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और कार्गो मूवमेंट के लिए डंकुनी से सूरत तक एक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में 20 नए नेशनल वाटरवेज शुरू किए जाएंगे।

उद्योग, MSME और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

बजट में 10,000 करोड़ रुपये का MSME ग्रोथ फंड बनाने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने और खादी व हथकरघा को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का प्रस्ताव है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने तथा ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ मिनरल के लिए समर्पित कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी बजट का हिस्सा है।

कृषि, पर्यटन और निर्यात को बढ़ावा

सरकार ने मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए देश में पांच रीजनल हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना और भारतीय काजू व कोको को 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष कार्यक्रम की घोषणा की गई है।

बजट को लेकर सरकार का दावा

वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक मानते हुए सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन को मजबूत किया है। इन सुधारों के चलते देश ने करीब 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।

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