
Budget 2026: ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन वॉर और चीन-पाक गठजोड़ के बाद आम बजट की अग्निपरीक्षा!
ऑपरेशन सिंदूर के साथ ही पाक-चीन-बांग्लादेश के बीच जो गठजोड़ हाल के दिनों में देखने को मिला है उसके बाद भारत की तीनों ऑर्म्ड फोर्सेज के सामने बड़ी चुनौती है. लेकिन इन चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूर है कि सरकार रक्षा बजट को बढ़ाये जो फिलहाल जीडीपी का केवल 1.9 फीसदी है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तब बजट पेश करने जा रही हैं जब साल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का रूप ले लिया. भारत-पाकिस्तान के बीच ये युद्ध जमीन पर ही नहीं बल्कि आसमान में भी लड़ा गया और इस मॉर्डन वॉरफेयर में पहली बार दोनों ही तरफ से ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. पर्दे के पीछे से चीन की ओर से पाकिस्तान को मदद की जा रही थी जिसने भारत के सामने आने वाले दिनों में नई चुनौतियां खड़ी कर दी है.
चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश से भारत को चुनौती
ऐसे में जब 1 फरवरी 2026 को जब वित्त मंत्री सीतारमण बजट पेश करेंगी जो खुद भी तब रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल चुकी हैं जब पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक किया था. ऐसे में देश की ऑर्म्ड फोर्सेज की जरूरतों को उनसे बेहतर कौन समझ सकता है. पाकिस्तान-चीन का ये गठजोड़, उसपर से चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां यानी भारत तीन तरफ से विदेशी चुनौतियों का सामना कर पड़ा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि नए वित्त वर्ष में भारत की ऑर्म्ड फोर्सेज को मॉर्डन वॉरफेयर के लिए तैयार करने के लिए क्या सरकार अपना खजाना खोलेगी? रक्षा मामलों से जुड़े जानकार आने वाले समय में भारत पाकिस्तान के बीच फिर से किसी तरह के टकराव की संभावना से इंकार नहीं कर रहे हैं जिसमें चीन भी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है. ऐसे परिस्थिति का सामना करने के लिए भारत को अभी से खुद को तैयार करना होगा. ऐसे में देश की ऑर्म्ड फोर्सेज की नजर निर्मला सीतारमण के बजट पर होगी.
सेना प्रमुख को डिफेंस बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद
बजट में डिफेंस के लिए अलोकेशन और उनकी मांगों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब पर 13 फरवरी 2026 को आर्मी डे से पहले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, ऑर्म्ड फोर्सेज को उम्मीद है कि डिफेंस सेक्टर के बजट में बढ़ोतरी की जाएगी जिससे स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री को और ज्यादा काम मिले और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके. जनरल द्विवेदी ने कहा, पैसों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से साफ संदेश है कि अगर सेना को खर्च करना है, तो धन की कमी नहीं होने दी जाएगी. जनरल द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा सेंटर का वर्ष” घोषित किया गया है. उन्होंने बताया कि, 2025 में रक्षा खरीद नीति में बदलाव, ढांचे को मजबूत करना और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक तकनीक को अपनाने पर जोर दिया गया है, जैसे ड्रोन और काउंटर-ड्रोन के लिए अलग यूनिट्स बनाने पर जोर दिया गया है. जनरल द्विवेदी ने कहा सेना रॉकेट और मिसाइल फोर्स बनाने पर विचार कर रही है, जैसा चीन और दूसरे देशों ने किया है.
ऑर्म्ड फोर्सेज को मुहैया कराया जाए जरूरी हथियार
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार से बजट में ऑर्म्ड फोर्सेज की मुराद पूरी होगी? क्या वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस बजट में भारी भरकम इजाफा करेंगी? द फेडरल ने मेजर जनरल (रिटायर्ड) पी के सहगल से बात की तो उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के समय जो खामियां नजर आई उसे दूर करने पर फोकस करना चाहिए. जैसे एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर (Akashteer) के केवल 107 यूनिट्स है जबकि हमारे पास 500 यूनिट्स होने चाहिए. आकाशतीर अत्याधुनिक, पूरी तरह से स्वचालित और स्वदेशी AI-संचालित एयर डिफेंस सिस्टम है. ये ड्रोन, मिसाइलों और विमानों जैसे हवाई खतरों को पहचानकर नष्ट करने में मदद करता है.
GDP का केवल 1.9 फीसदी रक्षा बजट पर खर्च
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का डिफेंस बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये रहा था जो कि 2023-24 के मुकाबले 9.5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी. भारत अपने डिफेंस सेक्टर पर जीडीपी का 1.9 फीसदी ही खर्च करता है जो कि बेहद कम है जबकि 2020-21 में 2.1 फीसदी खर्च किया गया था. कई जानकार मानते हैं कि भारत को जिस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है और जो वैश्विक हालात बने हुए हैं उसमें भारत को जीडीपी का 3-4 फीसदी डिफेंस पर खर्च करना चाहिए. रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने भी जीडीपी 3 फीसदी खर्च करने का सुझाव दिया है. डिफेंस बजट के कुल अलोकेशन का 46 फीसदी सैलेरी ऑपरेशंस पर खर्च हो जाता है 24 फीसदी पेंशन पर और केवल 26 फीसदी ही रकम ऑर्मड फोर्सेज के आधुनिकरण और जरूरतों पर खर्च किया जाता है.
एक्सपर्ट्स बोले - सरकार बढ़ाए रक्षा बजट
इसे ऐसे समझ सकते हैं 6.81 लाख करोड़ जो रक्षा बजट के लिए 2025-26 में आवंटित हुए थे उसमें से 1.80 लाख करोड़ ही डिफेंस सर्विसेज के कैपिटल आउटले पर खर्च करने के लिए प्रावधान किया गया. ऑर्म्ड फोर्सेज के लिए 3.12 लाख करोड़, पेंशन मद के लिए 1.60 लाख करोड़ और 28,683 करोड़ रुपये रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सिविल ऑर्गनाइजेशन पर खर्च करने के लिए प्रावधान किया गया. लेकिन आज के बदलते वैश्विक हालात और आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों और नई तकनीक से मजबूत करना जरूरी है. लेकिन सवाल उठता है कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए केवल 1.80 लाख करोड़ रुपये का आवंटन क्या काफी है? मेजर जनरल (रिटायर्ड) पी के सहगल के मुताबिक, रक्षा बजट को जीडीपी का 3 से 3.2 फीसदी करना चाहिए और कैपिटल एक्सपेंडिटर को जीडीपी का 1 फीसदी तक आवंटित करना चाहिए.
वित्त मंत्री सीतारमण के बजट से उम्मीदें
पिछले कुछ वर्षों में तीनों सेनाओं में हथियार और आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए कम बजट सेना को दिया जा रहा है. जबकि LOC हो या LAC या इंटरनेशनल बार्डर यहां सबसे ज्यादा मोर्चा सेना को लेना पड़ता है. आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी कह चुके हैं अभी भी इंटरनेशनल बार्डर और LOC पर 8 आतंकी शिविर सक्रिय है जिसमें 150 के करीब आतंकी कैंप में मौजूद हो सकते हैं. भारतीय वायुसेना के सामने भी कई चुनौतियां हैं. IAF के पास 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए लेकिन उसके पास 31 स्क्वाड्रन बचे हैं. इंजन और सप्लाई की दिक्कत के चलते तेजस लड़ाकू विमान का प्रोडक्शन तय रफ्तार से नहीं हो पा रहा है. जबकि चीन अपने एयर फोर्स को लगातार नई तकनीक, स्टेल्थ विमान और लंबी दूरी के हथियारों में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में निर्मला सीतारमण के बजट की भूमिका अहम हो जाती है. मेजर जनरल (रि) पी के सहगल के मुताबिक 114 राफेल विमानों के खरीद की प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए.
बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का दिखेगा असर
जाहिर है निर्मला सीतारमण के बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर दिख सकता है. भारत की ऑर्म्ड फोर्सेज को आधुनिक बनाने के लिए बजट में बड़े एलानों की उम्मीद की जा रही है.

