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बजट 2026: मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत नहीं, पर इन 5 चीजों ने दी बड़ी राहत
बजट 2026 में टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं, लेकिन कैंसर की 17 दवाएं सस्ती हुईं। विदेशी टूर और पढ़ाई पर TCS घटकर 2% हुआ। जानें मध्यम वर्ग के लिए क्या है खास।
Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर दिया है। यह उनका लगातार नौवां बजट भाषण था। इस बजट से वेतनभोगी मध्यम वर्ग को टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव की उम्मीद थी। हालांकि, सरकार ने टैक्स की दरों में कोई प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया है। वित्त मंत्री ने नीतिगत निरंतरता (Policy Continuity) पर भरोसा जताया है। बजट को बारीकी से देखें तो मध्यम वर्ग के लिए राहत के कई रास्ते खोले गए हैं। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और विदेशी यात्रा से जुड़े खर्चों को कम करने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य अनुपालन के बोझ को कम करना है। साथ ही छोटे निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना है। बजट में घरेलू बचत को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए हैं।
इनकम टैक्स और स्टैंडर्ड डिडक्शन का गणित
वेतनभोगी वर्ग के लिए इस साल टैक्स स्लैब में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत नियम पिछले साल जैसे ही रहेंगे। वर्तमान में 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पूरी तरह टैक्स फ्री बनी रहेगी। यदि इसमें 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) जोड़ दी जाए, तो प्रभावी सीमा 12.75 लाख रुपये हो जाती है। सरकार ने कर संरचना को स्थिर रखकर निवेशकों को स्पष्ट संदेश दिया है। आयकर दाताओं को फिलहाल पुरानी दरों पर ही टैक्स का भुगतान करना होगा। हालांकि, टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को अब और अधिक सरल बनाया जाएगा।
विदेशी यात्रा और शिक्षा हुई सस्ती
मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत विदेशी लेन-देन (Overseas Remittances) में मिली है। सरकार ने उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत टीसीएस (TCS) दरों में भारी कटौती की है। विदेशी टूर पैकेज की खरीद पर लगने वाला TCS अब मात्र 2% रह जाएगा। पहले यह दर 5% से 20% के बीच हुआ करती थी। इसके अलावा, विदेश में शिक्षा और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर भी राहत मिली है। इन कार्यों के लिए अब 5% के बजाय केवल 2% TCS देना होगा। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जिनके बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। इससे शुरुआती नकदी का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
दवाओं और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के घटेंगे दाम
बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बड़ी संवेदनशीलता दिखाई गई है। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया गया है। इससे जानलेवा बीमारियों का इलाज मध्यम वर्ग के लिए किफायती हो जाएगा। इसके अलावा, सात अन्य दुर्लभ बीमारियों की दवाओं के व्यक्तिगत आयात पर भी छूट मिलेगी। रोजमर्रा की चीजों की बात करें तो टीवी और माइक्रोवेव ओवन सस्ते हो सकते हैं। इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण पुर्जों पर ड्यूटी घटाई गई है। चमड़े के सामान, जूते और फुटवियर उद्योग को भी करों में राहत दी गई है। इससे घरेलू बाजार में ब्रांडेड जूतों की कीमतें कम होने की उम्मीद है।
निवेशकों की सुरक्षा और अनुपालन में सरलता
छोटे और अल्पसंख्यक निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए बजट में बड़ा बदलाव है। अब कंपनियों द्वारा शेयर 'बायबैक' को डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन्स माना जाएगा। इससे निवेशकों पर टैक्स का बोझ तार्किक होगा। टैक्स फाइलिंग को लेकर भी सरकार ने लचीला रुख अपनाया है। व्यक्तिगत करदाता 31 जुलाई तक अपना ITR फाइल कर सकेंगे। गैर-ऑडिट व्यवसायों और ट्रस्टों के लिए यह समयसीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज को अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। फॉर्म 15G और 15H जमा करने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू होगा। इससे वरिष्ठ नागरिकों को बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
रोजगार और बुनियादी ढांचे पर फोकस
देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। सरकार का मुख्य ध्यान पर्यटन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों पर है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से युवाओं के लिए नौकरियों के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र में छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं प्रस्तावित हैं। डिजिटल बुनियादी ढांचे और नई तकनीक पर भी बजट में विशेष आवंटन किया गया है। यह बजट मध्यम वर्ग के लिए प्रत्यक्ष राहत न सही, पर विकास के नए अवसर जरूर लाया है।

