बजट 2026: भाग ए नहीं, भाग बी से सरकार दिखाएगी आर्थिक रोडमैप
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बजट 2026: भाग ए नहीं, भाग बी से सरकार दिखाएगी आर्थिक रोडमैप

मोदी सरकार का तीसरा बजट 1 फरवरी को पेश होगा। इसमें भाग बी पर जोर रहेगा, जहां दीर्घकालिक सुधार, आर्थिक दृष्टि और भारत के वैश्विक लक्ष्य तय होंगे।


नरेंद्र मोदी सरकार का तीसरा बजट रविवार (1 फरवरी) को पेश किया जाएगा और यह कई पहलुओं में एक विशिष्ट बजट होगा। यह केवल दूसरी बार होगा जब किसी रविवार को बजट संसद में पेश किया जाएगा (यशवंत सिन्हा द्वारा 1999 में प्रस्तुत बजट के बाद)। इसके साथ ही, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लगातार नौवां बजट पेश कर रिकॉर्ड कायम करेंगी।भाग ए की जगह भाग बी पर जोर?

हालांकि, वर्ष 2026 का बजट एक और दृष्टि से भी अब तक के सभी बजटों से अलग हो सकता है। रविवार को निर्मला सीतारमण के भाषण में वित्तीय दस्तावेज़ के भाग ए के बजाय भाग बी पर अधिक विस्तार से चर्चा किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह बजट सुधारों पर केंद्रित होगा।

परंपरागत रूप से वित्त मंत्री बजट के पहले हिस्से (भाग ए) पर अधिक ध्यान देते रहे हैं, जिसमें अर्थव्यवस्था की स्थिति की समीक्षा और व्यापक नीतिगत दिशा का खाका प्रस्तुत किया जाता है। वहीं दूसरा हिस्सा (भाग बी) आमतौर पर कर संबंधी घोषणाओं, नीतिगत फैसलों और समापन टिप्पणियों तक सीमित रहता है।

सरकार पेश करेगी दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टि

खबरों के मुताबिक, रविवार को जिस भाग बी पर वित्त मंत्री विशेष रूप से ध्यान देंगी, उसमें देश के अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर जोर दिया जाएगा। इसमें 21वीं सदी की दूसरी तिमाही में प्रवेश कर रही दुनिया के परिप्रेक्ष्य में और भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष के करीब पहुंचते समय देश की व्यापक आर्थिक दृष्टि और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया जाएगा।

रिपोर्टों के अनुसार, वित्त मंत्री के ताजा बजट भाषण में प्रमुखता से शामिल होने वाला यह “प्लान बी” वैश्विक मंच पर भारत की स्थानीय ताकतों को प्रदर्शित करने का रोडमैप भी प्रस्तुत करेगा, जिसमें भारत की मौजूदा क्षमताओं और दीर्घकालिक संभावनाओं को उजागर किया जाएगा।

भारत की आर्थिक सोच पर रहेंगी विशेषज्ञों की नजरें

इस बजट से भारत और विदेशों के अर्थशास्त्रियों व विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित होने की उम्मीद है, क्योंकि इसके व्यापक आर्थिक प्रभावों और नीतिगत दिशा पर सभी की नजरें टिकी होंगी। यह खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल (जो 2024 में शुरू हुआ) में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की बात जोर-शोर से कर रही है।

आगामी बजट के क्रॉस-सेक्टर सुधारों पर आधारित होने की संभावना है, जिनका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना होगा। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका द्वारा उत्पन्न टैरिफ संबंधी चुनौतियों के बीच इस बजट पर और भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।

भाग बी में निर्यातकों और निर्माताओं दोनों के लिए एक अधिक एकीकृत और प्रभावी इकोसिस्टम तैयार करने हेतु ढांचागत बदलावों को भी प्रमुखता से उजागर किए जाने की उम्मीद है।

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