टैक्स नियमों में बड़े बदलावों की विस्तृत रिपोर्ट, जानें बजट में क्या हैं नए प्रावधान
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टैक्स नियमों में बड़े बदलावों की विस्तृत रिपोर्ट, जानें बजट में क्या हैं नए प्रावधान

बजट 2026-27 में सरकार ने टैक्स नियमों को आसान बनाया है। मोटर दुर्घटना मुआवजे पर अब टैक्स नहीं लगेगा और विदेशी संपत्ति घोषित करने का नया मौका मिला है।


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Budget 2026 FAQ : वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट 2026-27 के कर प्रस्तावों को मुख्य रूप से सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इन श्रेणियों में 'ईज ऑफ लिविंग', दंड और अभियोजन का युक्तिकरण, और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। सरकार ने इस बार प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने पर जोर दिया है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को भारत के विकास इंजन के रूप में समर्थन देने के लिए नए प्रावधान पेश किए गए हैं। कॉर्पोरेट टैक्स व्यवस्था को भी वैश्विक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से तर्कसंगत बनाया गया है। इसके अलावा, मोटर वाहन दुर्घटना दावों से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स की छूट देना एक बड़ा विधायी बदलाव है। यह रिपोर्ट बजट के उन्हीं तकनीकी और नीतिगत पहलुओं का विश्लेषण करती है जो देश की अर्थव्यवस्था और कर व्यवस्था को नई दिशा देंगे।


ईज ऑफ लिविंग: मोटर दुर्घटना के मुआवजे पर अब कोई टैक्स नहीं

बजट 2026 का सबसे राहत भरा फैसला दुर्घटना पीड़ितों के लिए है। अब मोटर वाहन दुर्घटना ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह छूट पीड़ित व्यक्ति और उसके परिवार (कानूनी वारिस) दोनों को मिलेगी। पहले 50 हजार से ज्यादा के ब्याज पर टैक्स कटता था, जिसे अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इससे हादसे का शिकार हुए परिवारों को अब मुआवजे की पूरी रकम मिल सकेगी।


डिजिटल तरीके से टैक्स का काम हुआ आसान

अब टैक्स से जुड़े कागजी काम के लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। अगर आप अपना टीडीएस (TDS) कम करवाना चाहते हैं, तो अब ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। शेयरों या म्यूचुअल फंड से मिलने वाले पैसे के लिए भी नियम आसान हुए हैं। अब आप सीधे 'डिपॉजिटरी' में अपना फॉर्म 15G या 15H जमा कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि लोग घर बैठे ही अपना सारा टैक्स का काम निपटा सकें। इससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता भी आएगी।


आईटी सेक्टर और वैश्विक निवेश पर जोर
बजट प्रस्तावों में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को भारत के विकास का मुख्य इंजन माना गया है। वैश्विक व्यवसायों को आकर्षित करने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स दरों में कुछ विशिष्ट सुधार किए गए हैं। सहकारिता क्षेत्र के लिए भी कर नियमों को तर्कसंगत बनाया गया है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष कर के अन्य प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए कर व्यवस्था को प्रतिस्पर्धी और स्थिर रखने का प्रयास किया गया है।

विदेशी संपत्ति बताने का एक और सुनहरा मौका

सरकार ने 'FAST-DS 2026' नाम से एक नई योजना शुरू की है। यह उन लोगों के लिए है जिनकी विदेश में कोई संपत्ति या बैंक खाता है जिसे उन्होंने पहले नहीं बताया था। 1 करोड़ रुपये तक की ऐसी संपत्ति पर 30% टैक्स और उतना ही जुर्माना देकर उसे कानूनी बनाया जा सकता है। यह उन कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छा है जिन्हें विदेशी कंपनियों से शेयर (ESOPs) मिले थे। इस योजना का लाभ लेकर आप भविष्य की कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने से बच सकते हैं।

रिटर्न भरने की तारीख और सुधार का मौका

अगर आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) समय पर नहीं भर पाए, तो अब सुधार का ज्यादा वक्त मिलेगा। सरकार ने संशोधित रिटर्न (Revised Return) भरने का समय बढ़ाकर 12 महीने कर दिया है। हालांकि, देरी से रिटर्न भरने पर 1,000 से 5,000 रुपये तक की फीस देनी पड़ सकती है। इसके अलावा, ट्रस्ट और कुछ बिजनेस के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। इससे व्यापारियों को अपना हिसाब-किताब पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।

जमीन-जायदाद की खरीद के लिए सरल नियम

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं जो भारत में नहीं रहता (NRI), तो भी नियम अब आसान हैं। पहले इसके लिए खरीदार को अलग से 'TAN' नंबर लेना पड़ता था। अब आप अपने सामान्य 'PAN' कार्ड का इस्तेमाल करके ही टैक्स काट सकते हैं। यह नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने की संभावना है। इससे मकान या जमीन खरीदते समय होने वाली कानूनी उलझनें काफी कम हो जाएंगी।

पारदर्शिता और विकास पर जोर

कुल मिलाकर, बजट 2026 का जोर टैक्स के नियमों को सरल और स्पष्ट बनाने पर है। सरकार चाहती है कि लोग बिना डरे अपना टैक्स भरें। नियमों में किए गए ये बदलाव न केवल आम आदमी को राहत देंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे। चाहे वह डिजिटल सुधार हों या दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाली छूट, हर कदम आम जनता की सुविधा के लिए उठाया गया है।

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