
Budget 2026: क्या टैक्सपेयर्स को मिलेगी फिर राहत! 12 लाख इनकम पर टैक्स फ्री के बाद अब आगे क्या?
नए इनकम टैक्स रिजिम में सरकार 12 लाख तक के इनकम पर टैक्स छूट देती है लेकिन सेविंग पर टैक्स डिडक्शन का इसमें प्रावधान नहीं है. ज्यादातर लोग जब नए रिजिम को अब चुन रहे तो क्या सेविंग को प्रोत्साहन के लिए बजट में बड़े एलान की उम्मीद की जा रही है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी 2026 को अपना 9वां और मोदी सरकार का 13वां पूर्ण बजट पेश करेंगी. बीते साल वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्सपेयर्स को अपने उस एलान चौंकाते हुए बड़ी राहत दी थी जिसमें उन्होंने 12 लाख रुपये तक सालाना इनकम वालों के लिए टैक्स छूट देने का एलान किया था. बजट पेश होने में अब चंद दिन ही रह गए हैं तो सवाल उठता है मोदी सरकार के पिटारे में इस वर्ष टैक्सपेयर्स, सैलरीड क्लास और पेंशनर्स को देने के लिए क्या है?
2020 में आया नया टैक्स रिजिम
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जब निर्मला सीतारमण ने जब बजट पेश किया था तब वो नई इनकम टैक्स रिजिम से लेकर आईं थीं. हालांकि नए टैक्स रिजिम में ना तो सेविंग ना ही इंश्योरेंस प्रीमियम ना मेडिक्लेम और ना होमलोन के ब्याज पर टैक्स डिड्क्शन का लाभ देने का प्रावधान है. नए टैक्स रिजिम में पहे स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ टैक्सपेयर्स को नहीं मिल रहा था. इसके चलते टैक्सपेयर्स नए टैक्स रिजिम को पसंद नहीं कर रहे थे. लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट करते हुए वित्त मंत्री ने नए टैक्स रिजिम को आकर्षक बनाने के लिए 7 लाख रुपये तक सालाना इनकम वालों को टैक्स से राहत देने का एलान किया. साथ ही नए टैक्स रिजिम के तहत 50,000 रुपये के सालाना स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ देने की घोषणा की. इन एलानों का मकसद नए टैक्स रिजिम को आकर्षक बनाना था.
नए रिजिम में 12 लाख तक के आय पर टैक्स नहीं
2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद जब मोदी सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आई तो 23 जुलाई 2024 को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाकर 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया लेकिन केवल उन टैक्सपेयर्स के लिए जो नई टैक्स रिजिम को चुनेंगे. इनकम टैक्स स्लैब में भी बदलाव कर टैक्सपेयर्स को राहत दी गई. लेकिन नए टैक्स रिजिम को आकर्षक बनाने के लिए सबसे बड़ी घोषणा वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में की गई. निर्मला सीतारमण ने नए टैक्स रिजिम के तहत 12 लाख रुपये तक सालाना कमाने वालों को इनकम टैक्स से राहत दे दी है. उन्होंने घोषणा किया कि 12 लाख रुपये तक सालाना कमाने वालों को अब इनकम टैक्स नहीं देना होगा. 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा अलग से.
वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट में कहा, “अब मुझे ये घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर देय नहीं होगा (यानी विशेष दरों वाली आय को छोड़कर औसतन 1 लाख रुपये प्रति माह की आय तक). सैलरीड टैक्सपेयर्स के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद ये लिमिट 12.75 लाख रुपये होगी. वित्त मंत्री ने कहा स्लैब और टैक्स रेट्स में बदलाव का फायदा सभी टैक्सपेयर्स को मिलेगा. इससे मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ कम होगा और उनके हाथों में ज्यादा पैसे घरेलू खपत, सेविंग्स और निवेश के लिए बचेंगे."
नए इनकम टैक्स रिजिम में टैक्स स्लैब पर नजर डालें तो
0-4 लाख - Nil
4-8 लाख - 5%
8-12 लाख - 10%
12-16 लाख - 15%
16-20 लाख - 20%
20- 24 लाख - 25%
24 लाख के ऊपर - 30%
घरेलू बचत बढ़ाने के लिए टैक्स प्रोत्साहन देने की मांग
नए टैक्स रिजिम को आकर्षक बनाने के लिए बीते 3 सालों में मोदी सरकार इसमें कई बार बदलाव किए. लेकिन निवेश और बचत पर इनकम टैक्स छूट का फायदा नहीं दिया गया जिससे लोगों में निवेश और बचत करने की प्रवृत्ति कम हुई है. 31 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को लेकर अर्थशास्त्रियों से सुझाव लेने के लिए नीति आयोग में बैठक की. इस बैठक में अर्थशास्त्रियों ने घरेलू बचत बढ़ाने के लिए टैक्स प्रोत्साहन देने की मांग की है. अर्थशास्त्रियों ने यह मुद्दा उठा कि नई इनकम टैक्स रिजिम में बचत को प्रोत्साहन देने वाले प्रावधान नहीं हैं, जिससे भविष्य में घरेलू बचत दर घट सकती है.
सेविंग पर टैक्स छूट के लिए देते हैं झूठी जानकारियां
द फेडरल देश ने जब चार्ट्ड अकाउंटेट और इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के पूर्व जज गोपाल केडिया से बात की तो उन्होंने कहा, मैं सेविंग के जरिए टैक्स छूट देने के खिलाफ हूं क्योंकि इसके चलते कानूनी विवाद बढ़ता है. उन्होंने कहा, लोग आईटीआर भरने के दौरान सेविंग्स की झूठी जानकारियां देकर टैक्स छूट क्लेम करते हैं. या गलत जानकारियां देकर HRA क्लेम करते हैं और तो और कुछ लोग ऐसी राजनीतिक पार्टियों को डोनेशन देकर टैक्स छूट हासिल करते हैं जिन दलों का कोई अस्तित्व ही नहीं होता है. गोपाल केडिया ने कहा, जिन्हें सेविंग पर टैक्स छूट हासिल करना चाहते हैं उनके लिए अभी भी ओल्ड टैक्स रिजिम उपलब्ध है.
सरकार का फोकस नए टैक्स रिजिम पर
मोदी सरकार नई इनकम टैक्स रिजिम को आकर्षक बनाने में जुटी है और ये डिफॉल्ट रिजिम हो चुका है. यानी अगर किसी को पुराने टैक्स रिजिम के तहत रिटर्न फाइल करना है तो उसे ITR भरने के दौरान ये विकल्प चुनना पड़ता है. ओल्ड इनकम टैक्स रिजिम को देखें तो पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले टैक्सपेयर्स को सरकार की ओर से कोई राहत नहीं दी गई. ना तो ओल्ड टैक्स रिजिम के तहत टैक्स रेट में कमी की गई और ना टैक्स स्लैब में ही कोई बदलाव किया गया है. केवल 2.50 लाख से 5 लाख रुपये तक के आय पर जो 12500 रुपये टैक्स बनता है सरकार उसपर रिबेट देती है. हालांकि ओल्ड इनकम टैक्स रिजिम में 80सी के तहत निवेश और बचत पर टैक्स छूट का लाभ मिलता आ रहा है. साथ ही 2 लाख रुपये तक होमलोन के ब्याज पर टैक्स डिडक्शन के साथ मेडिक्लेम के प्रीमियम के भुगतान पर भी टैक्स छूट का लाभ मिल रहा है.
ओल्ड टैक्स रिजिम पर नजर डालें तो
0 - 2.50 लाख - Nil
2.50 - 5 लाख - 5%
5-10 लाख - 20%
10 लाख से ऊपर - 30%
बचत पर टैक्स छूट नहीं, घट रहा सेविंग की प्रवृत्ति
घरेलू बचत भारत की सबसे बड़ी ताकत रही है. और बचत पर टैक्स छूट देने के चलते इसमें लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. 1970 से ही भारत के जीडीपी के मुकाबले घरेलू बचत में जोरदार उछाल देखने को मिला है. 70 के दशक में जहां घरेलू बचत जीडीपी का 13 फीसदी हुआ करता था वो 2008 में 38 फीसदी के हाई पर जा पहुंचा था जो चीन को छोड़कर विकसित और ब्रिक्स देशों से भी ज्यादा था. वित्त वर्ष 2011-12 में ये घटकर 34.6 फीसदी हो गई और 2022-23 में घटकर 30 फीसदी के नीचे 29.7 फीसदी रह गई. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में लोगों की बचत लगातार कम हो रही है. घरेलू बचत, जो पहले कुल बचत का बड़ा हिस्सा होती थी, अब पहले जैसी नहीं रही है. वहीं लोग बैंकों में बचत रखने की जगह म्यूचुअल फंड्स, इक्विटी, सोना और रियल एस्टेट में ज़्यादा निवेश कर रहे हैं. फाइनेंशियल सेविंग घट रही है क्योंकि बचत पर टैक्स छूट सरकार देना नहीं चाहती. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार सेविंग को प्रोत्साहन देने के लिए नई टैक्स रिजिम में निवेश और बचत पर टैक्स छूट का प्रावधान लेकर आएगी?

