Budget 2026: कौन बना विनर और कौन बना लूजर, देखें लिस्ट
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Budget 2026: कौन बना विनर और कौन बना लूजर, देखें लिस्ट

बजट 2026 का पूरा रिपोर्ट कार्ड। मध्यम वर्ग, युवा और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, लेकिन कुछ मोर्चों पर लगी चपत। जानें बजट 2026 के नफे-नुकसान की पूरी कहानी।


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Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा है। 85 मिनट के भाषण में सरकार ने 'विकसित भारत' के रोडमैप को सामने रखा, जिसमें समाज के हर वर्ग को कुछ न कुछ देने की कोशिश की गई। हालांकि, हर बजट की तरह इस बार भी कुछ क्षेत्रों को बड़ी राहत मिली है, तो कुछ को निराशा का सामना करना पड़ा है। जहाँ एक ओर आयकर दाताओं और भविष्य के डिजिटल क्रिएटर्स (GenZ) के लिए सरकार ने खजाना खोला है, वहीं कुछ आयातित वस्तुओं और पुरानी टैक्स व्यवस्था पर निर्भर लोगों को थोड़ी चपत भी लगी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बजट के बाद आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और कौन से सेक्टर इस बजट के असली 'सुपरस्टार' बनकर उभरे हैं।



बजट 2026 के 'विनर्स' (किसे क्या मिला?)

1. टैक्सपेयर्स (मध्यम वर्ग): नया आयकर अधिनियम और सरल फॉर्म आने से करदाताओं को कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। 1 अप्रैल से लागू होने वाला नया सिस्टम 'ईज ऑफ फाइलिंग' को बढ़ावा देगा।

2. युवा और डिजिटल क्रिएटर्स (GenZ): 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में 'कंटेंट क्रिएटर लैब' खुलने से गेमिंग और एनिमेशन के शौकीनों के लिए करियर के नए द्वार खुल गए हैं। यह 'ऑरेंज इकनॉमी' के लिए एक बड़ा बूस्ट है।

3. किसान (विशेष फसल उत्पादक): काजू, अखरोट, बादाम और औषधीय खेती करने वाले किसान इस बजट के बड़े विजेता हैं। सरकार की प्रोत्साहन नीति से इनकी फसलें अब ग्लोबल ब्रांड बनेंगी।

4. फौजी और रक्षा क्षेत्र: बजट में 15% की भारी वृद्धि के साथ रक्षा क्षेत्र को आधुनिक हथियारों और स्वदेशी तकनीक के लिए पर्याप्त फंड मिला है।

5. महिलाएं: हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल और 'शी-मार्ट्स' की घोषणा से महिला सुरक्षा और महिला उद्यमियों को नया मंच मिला है।

6. मरीज और हेल्थ सेक्टर: गंभीर रोगों की दवाएं सस्ती होने से आम आदमी को बड़ी राहत मिली है। साथ ही 5 क्षेत्रीय चिकित्सा हब बनने से स्वास्थ्य सेवाएं और सुलभ होंगी।



बजट 2026 के 'लूजर्स' (किसे हुई निराशा?)

1. पारंपरिक निवेशक (सोना-चांदी): बजट में सोने-चांदी के निवेश नियमों में कोई बदलाव न होने और बाजार की अनिश्चितता के कारण निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव (गिरावट) का सामना करना पड़ा है।

2. तटीय समुदाय (केरल जैसे राज्य):
शशि थरूर और अन्य विपक्षी नेताओं के अनुसार, समुद्री कटाव और तटीय सुरक्षा के लिए किसी विशेष 'वॉर-फुटिंग' पैकेज का न होना तटीय राज्यों के लिए निराशाजनक रहा।

3. आयातित लक्जरी सामान: सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत पर जोर देने के कारण कुछ विदेशी सामानों और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स पर शुल्क बढ़ने से वे महंगे हो सकते हैं।

4. पुराने टैक्स सिस्टम के समर्थक: सरकार का पूरा ध्यान नए आयकर अधिनियम और डिजिटल फॉर्म पर है, जिससे पुरानी व्यवस्था का लाभ ले रहे लोगों को नए सिस्टम में शिफ्ट होने का दबाव महसूस होगा।


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