कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब, US-इजरायल और ईरान युद्ध के विकराल रूप से भड़की कीमत
x

कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब, US-इजरायल और ईरान युद्ध के विकराल रूप से भड़की कीमत

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की मुश्किलें बढ़ा दी है जो अपने खपत को पूरा करने के लिए 90 फीसदी कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है.


Click the Play button to hear this message in audio format

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब जा पहुंचा है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 89.49 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा जो कि 2024 के बाद उच्चतम स्तर है. एक दिन में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 23 फीसदी और पिछले एक महीने में 31 फीसदी का उछाल आ चुका है. फिलहाल क्रूड ऑयल 89.43 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की मुश्किलें बढ़ा दी है जो अपने खपत को पूरा करने के लिए 90 फीसदी कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है. सरकार ये दावा कर रही है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ब्लॉकेज की चिंताओं के बाद भी भारत के पास क्रू़ड ऑयस से लेकर पास पेट्रोलियम उत्पादों और LPG की पर्याप्त आपूर्ति है और देश “बहुत आरामदायक स्थिति” में है. सरकार के सूत्रों ने कहा, भारत के पास अलग-अलग स्रोतों से इतनी ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध है कि यदि Strait of Hormuz के जरिए सप्लाई प्रभावित भी होती है तो उसका असर सीमित रहेगा. देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का मौजूदा भंडार भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. सरकार ने कहा कि वो हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक क्षेत्रों से आयात बढ़ाने की योजना भी तैयार है, ताकि हॉर्मुज़ से जुड़े किसी भी संभावित व्यवधान की भरपाई की जा सके.

सरकार का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में काफी विविधता लाई है. 2022 से भारत रूस से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात कर रहा है जहां 2022 में रूस की हिस्सेदारी भारत के कुल कच्चे तेल आयात में केवल 0.2% थी, वहीं बाद के वर्षों में यह तेजी से बढ़ी है. फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20% रूस से किया, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है. एलपीजी सप्लाई को लेकर सरकार ने कहा है कि LPG के मोर्चे पर भी सरकार ने सभी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है जिससे देशभर में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे. जनवरी से अमेरिका से LPG की सप्लाई भारत में शुरू हो चुकी है. नवंबर 2025 में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिका के गल्फ कोस्ट से 2026 के लिए करीब 2.2 MTPA LPG एक साल में आयात करने का करार किया था.

हालांकि LNG की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है जो कतर से आयात होता है और कतर ने पूरी तरीके से एलएनजी प्रोडक्शन सप्लाई बंद कर दिय़ा है. इस बीच MRPL को बंद किए जाने की खबरों को भी सरकार ने गलत बताया है. सूत्रों के अनुसार एमआरपीएल रिफाइनरी पूरी तरह चालू है और उसके पास पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है.

उधर अमेरिका ने भारत को अगले ३० दिनों तक के लिए रूस से कच्चे तेल खरीदने की इजाजत दे दी है.

Read More
Next Story