इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल के दामों में उबाल, 82 डॉलर के पार पहुंची कीमत
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इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल के दामों में उबाल, 82 डॉलर के पार पहुंची कीमत

मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. अगर युद्ध जैसे हालात बने और Strait of Hormuz से तेल जाना बंद हुआ तो दुनियाभर में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा और कीमतें तेजी से बढ़ेंगी.


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क्या कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार जाएगा? क्यों 2 मार्च को एक ही दिन में 10 फीसदी के उछाल के साथ कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है. अमेरिका और इजरायल ने 'Operation Epic Fury’ के तहत 28 फरवरी को अमेरिका इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला बोला जिसमें वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई. इसके बाद से ही पूरे मिडिल ईस्ट और पश्चिम एशिया में भारी तनाव है.

कच्चे तेल के दामों में उबाल

लेकिन इजरायल और अमेरिका के इस दुस्साहस के बाद ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के 8 मित्र देशों में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों समेत इन देशों में आर्थिक तंत्र पर चोट करना शुरू कर दिया है. ईरान ने बदला लेने के लिए 8 खाड़ी के देशों जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं वहां मिसाइल ड्रोन से हमला बोला है. ईरान जिन देशों पर अटैक कर रहा ये कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादक देश हैं. ऐसे में अब ये माना जा रहा है दुनियाभर में कच्चे तेल की किल्लत पैदा हो सकती है जिससे कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है.

Strait of Hormuz से सप्लाई बंद

पेट्रोलियम मामलों के जानकार नरेंद्र तनेजा ने कहा, इजरायल अमेरिका ने जो ईरान में किया वो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, हमारे लिए चिंता का विषय है कि भारत 89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है जिसमें से 60 फीसदी खाड़ी के देशों से आता है यानी जो 50 लाख बैरल भारत कच्चा तेल आयात करता है उसमें 60 फीसदी इन देशों से आयात होता है. नरेंद्र तनेजा ने कहा, अगर Strait of Hormuz बंद होता है तो विवाद बढ़ेगा. उन्होंने कहा ईरान ने Strait of Hormuz बंद करने की धमकी दी है लेकिन ये रूट अभी बंद नहीं हुआ है. उन्होंने उम्मीद जताई की ये युद्ध ईरान ने इस रूट में माइंस बिछाया तो देशों को पीछे हटना पड़ सकता है. उन्होंने कहा, ये युद्ध 6-7 दिन से ज्यादा नहीं चलेगा. वहीं कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा ऊपर नहीं जाएगी क्योंकि सप्लाई की दिक्कत नहीं है. लेकिन युद्ध लंबा खींचा तो दिक्कतें बढ़ सकती है.

100 डॉलर के पार जाएगा कच्चा तेल

जानकारों के मुताबिक, अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. अगर युद्ध जैसे हालात बने और Strait of Hormuz से तेल जाना बंद हुआ तो दुनियाभर में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा और कीमतें तेजी से बढ़ेंगी. 2026 में भारत में खपत होने वाले कुल कच्चे तेल में 51 फीसदी Strait of Hormuz के रास्ते आता है तो 56 फीसदी LNG और 83 फीसदी एलपीजी इस रास्ते से इंपोर्ट होकर आता है. ऐसे में इस क्षेत्र में अंशाति भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है और ये सभी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती है. यूके के बैंक Barclays ने अनुमान जताया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते सप्लाई में रूकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है.

क्या पेट्रोल डीजल होगा महंगा?

बीते कुछ महीनों से कच्चा तेल 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा था. लेकिन कच्चे तेल के दामों में आई तेजी के चलते सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा. और युद्ध लंबा खींचा को मुश्किलें और बढ़ सकती है जिसके बाद सरकार को पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है.

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