
जिन EPFO ग्राहकों ने जमा धन का क्लेम नहीं किया, उनके पैसे वापस लौटाए जाएँगे
मंत्रालय के अनुसार, इन खातों में से कुछ 20 साल पुराने हैं, जिनमें पिछले तीन वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ है, जिससे वे निष्क्रिय हो गए हैं।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के निष्क्रिय खातों में पड़े बिना दावा किए गए जमा धन को उसके ग्राहकों को लौटाने का फैसला किया है। इस पहल से 31 लाख से अधिक ग्राहकों को लाभ मिलने का अनुमान है, जिनमें से पहले चरण (पायलट फेज) में लगभग 7 लाख ग्राहकों को लाभ दिया जाएगा। यह जानकारी श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने दी।
इस सिलसिले में सोमवार को मंत्री मंडाविया की अध्यक्षता में हुई मंत्रालय की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में फैसला लिया गया।
EPFO के पास करीब 31.86 लाख निष्क्रिय खाते हैं, जिनमें कुल 10,903 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से लगभग 7.11 लाख खातों में 1,000 रुपये तक की बिना दावा की गई राशि है, जिसकी कुल रकम 30.52 करोड़ रुपये है।
मंत्रालय के अनुसार, इन खातों में से कुछ 20 साल पुराने हैं, जिनमें पिछले तीन वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ है, जिससे वे निष्क्रिय हो गए हैं।
पायलट चरण के लिए चिन्हित 7 लाख खातों में आधार बैंक खातों से लिंक है और विवरण EPFO के पास उपलब्ध है। इससे रिटायरमेंट फंड संस्था के लिए संबंधित राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा करना संभव होगा।
EPF एवं MP अधिनियम के अनुसार, EPFO के लाभार्थियों को अपनी जमा राशि निकालने के लिए दावा प्रस्तुत करना होता है। हालांकि, यह देखा गया है कि कई मामलों में जमा राशि बहुत कम होती है, जबकि उसे निकालने की प्रक्रिया जटिल और कागजी कार्यवाही वाली होती है। इसके चलते बड़ी संख्या में निष्क्रिय खाते और बिना दावा किए गए जमा धन EPFO के पास जमा होते गए हैं।
मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति
श्रम मंत्री ने यह भी बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए चलाई जा रही श्रम कल्याण योजना में अब मेधावी छात्रों के लिए अधिकतम 25,000 रुपये तक की अतिरिक्त छात्रवृत्ति जोड़ी जाएगी। यह सहायता पहले से दी जा रही कल्याण आधारित छात्रवृत्ति के अतिरिक्त होगी।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, “समानता बढ़ाने, अनचाहे बहिष्कार को दूर करने और नीति में स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया जा रहा है। इसके तहत जो छात्र मंत्रालय की कल्याण आधारित छात्रवृत्ति ले रहे हैं, वे पात्रता के अनुसार केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य एजेंसी से मेधावी छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर सकेंगे।”
इस वर्ष अब तक 1.6 लाख छात्रों ने इस कल्याण आधारित वित्तीय सहायता का लाभ उठाया है, जिस पर 77.9 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जबकि वर्ष 2024-25 में 92,118 लाभार्थियों को 31.65 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा और कल्याण उपाय, जिसमें शिक्षा भी शामिल है, प्रदान करना है।

