मदर ऑफ ऑल डील्स: EU प्रमुख ने कहा– भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता जल्द
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'मदर ऑफ ऑल डील्स': EU प्रमुख ने कहा– भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता जल्द

India EU Deal: उर्सुला वॉन डेर लेयन की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौते की स्थिति अभी भी अनिश्चित है।


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India-EU Trade Deal: दावोस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने घोषणा की कि EU और भारत इतिहास के सबसे बड़े व्यापार समझौते के कगार पर हैं। यह सिर्फ दो देशों के बीच समझौता नहीं, बल्कि दुनिया के आर्थिक नक्शे को ही बदल देने वाला कदम हो सकता है। अगर ये समझौता फाइनल हुआ तो यूरोप को 'पहले कदम का फायदा' मिलेगा और भारत के लिए वैश्विक बाजार के नए रास्ते खुलेंगे। वहीं अमेरिका और चीन की रणनीतियां भी इस खेल में पीछे हटती नजर आएंगी।

उर्सुला वॉन डेर लेयन की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौते की स्थिति अभी भी अनिश्चित है और अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर उच्च टैरिफ और पिछले अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकियों के बीच में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उर्सुला ने दावोस में अपने भाषण में कहा कि अगले वीकेंड भारत यात्रा पर जाऊंगी। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम ऐतिहासिक व्यापार समझौते के कगार पर हैं। कुछ लोग इसे ‘सभी समझौतों की मां’ भी कहते हैं। यह समझौता दो अरब लोगों के बाजार का निर्माण करेगा, जो वैश्विक GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा है और यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और गतिशील महाद्वीप के साथ पहले कदम का फायदा देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप इस सदी के विकास केंद्रों और आर्थिक ताकतों के साथ व्यापार करना चाहता है, चाहे वह लैटिन अमेरिका हो या इंडो-पैसिफिक। उन्होंने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित EU टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप हमेशा दुनिया को चुनेगा और दुनिया यूरोप को चुनने के लिए तैयार है।

भारत की गणतंत्र दिवस पर विशेष मेहमान

उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कॉस्टा अगले सप्ताह भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। वे 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी 27 जनवरी को करेंगे। पिछले हफ्ते वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल ने आगामी भारत-EU व्यापार समझौते को भी “सभी व्यापार समझौतों की मां” बताया था। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापक होगा और दोनों पक्षों के हित और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखेगा।

लंबा इतिहास और तेजी से बढ़ते कदम

भारत-EU व्यापार समझौता दशकों से तैयार हो रहा है। दोनों देशों ने जुलाई 2022 में वार्ता फिर से शुरू करने के बाद समझौते के करीब पहुंचना शुरू किया। पहली वार्ता 2007 में हुई थी, लेकिन 2013 में इसे रोक दिया गया था। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन द्वारा व्यापार नीतियों में बदलाव और प्रोटेक्शनिस्ट उपायों को बढ़ावा देने के बाद वार्ताओं में तेजी आई। यह भी देखा गया कि चीन की साझा चुनौतियों ने दोनों पक्षों को समझौते की ओर प्रेरित किया। भारत विशेष रूप से सोलर एनर्जी सेक्टर में मूल्य निर्धारण और उत्पादन बढ़ाने में चुनौतियों का सामना कर रहा है। वहीं EU को चीन के महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में प्रभुत्व की चिंता है, क्योंकि चीन कई क्षेत्रों में वैश्विक निर्माण में अग्रणी है।

फायदा और बाजार पहुंच

भारत कर्मचारी-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, जूते, रत्न और आभूषण में बाजार पहुंच पाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, EU को अपने ऑटोमोबाइल और पेय पदार्थों के लिए भारतीय बाजार में अवसर मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और EU के बीच 24 अध्यायों में से 20 पर समझौता हो चुका है और EU नेताओं की इस महीने की यात्रा से पहले समझौते पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य है।

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