ट्रंप के दबाव के बावजूद फेड सख्त, ब्याज दर में कटौती नहीं
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ट्रंप के दबाव के बावजूद फेड सख्त, ब्याज दर में कटौती नहीं

फेड रिजर्व ने महंगाई और ईरान तनाव के बीच दरें स्थिर रखीं। 2026 तक महंगाई 2.7% रहने का अनुमान, जबकि रोजगार और अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता बरकरार।


अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अपेक्षाओं के अनुरूप ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश की अर्थव्यवस्था लगातार बनी हुई महंगाई, कमजोर होते श्रम बाजार और ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न अनिश्चितता का सामना कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बावजूद फेड ने दरों को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखा।

यह निर्णय 11-1 के मत से लिया गया, जिसमें संकेत दिया गया कि साल के अंत तक एक बार ब्याज दरों में कटौती संभव है। फेड ने अपने बयान में कहा कि मध्य पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी

फेडरल रिजर्व ने अपनी पसंदीदा महंगाई माप, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) के अनुमान को बढ़ा दिया है। अब 2026 के अंत तक महंगाई 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले 2.4 प्रतिशत था। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईरान युद्ध से जुड़े संभावित मूल्य दबावों के कारण बताई गई है।

कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन जैसे अस्थिर तत्व शामिल नहीं होते, उसे भी 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया गया है। फेड का दीर्घकालिक लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना है।

विकास और रोजगार पर नजर

फेड के ताजा अनुमानों के अनुसार, बेरोजगारी दर वर्ष के अंत तक 4.4 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमान के समान है। वहीं, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो दिसंबर के 2.3 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है।

हालांकि, फरवरी में आए कमजोर रोजगार आंकड़ों ने श्रम बाजार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा, फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ने का खतरा है।

नीतिगत दुविधा और अनिश्चितता

फेड का दोहरा उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित रखना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में नीति-निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन घटनाओं का अर्थव्यवस्था पर कितना और कितना लंबा असर पड़ेगा।

यह लगातार दूसरी बैठक है जब फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले, पिछले साल के अंत में फेड ने लगातार तीन बार दरों में कटौती की थी। जनवरी में जहां रोजगार बाजार को लेकर भरोसा दिख रहा था, वहीं अब स्थिति बदलती नजर आ रही है।

फेडरल रिजर्व के इस फैसले से संकेत मिलता है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव, बढ़ती महंगाई और कमजोर होते रोजगार बाजार के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है। आगे की मौद्रिक नीति काफी हद तक इन अनिश्चित परिस्थितियों के विकास पर निर्भर करेगी।


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