शेयर बाजार में हाहाकार: विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹88,180 करोड़, जानें वजह
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शेयर बाजार में हाहाकार: विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹88,180 करोड़, जानें वजह

मार्च 2026 में FPIs की भारी बिकवाली से भारतीय बाजार पस्त। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता। वित्तीय सेवाओं पर सबसे ज्यादा मार।


Foreign Investors And Indian Share Market : भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना अब तक का सबसे कठिन दौर साबित हो रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस महीने अब तक भारतीय इक्विटी से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 बिलियन डॉलर) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में जहां 22,615 करोड़ रुपये का निवेश आया था, वहीं मार्च में हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक 'नेट सेलर्स' रहे हैं। इस ताजा निकासी के साथ, साल 2026 में अब तक कुल FPI आउटफ्लो 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।


निकासी के 5 प्रमुख कारण: क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?
बाजार विशेषज्ञों ने इस बिकवाली के पीछे वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

पश्चिम एशिया में युद्ध का तनाव: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से निवेशकों में डर का माहौल है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में संभावित व्यवधान की आशंका ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है।

कच्चे तेल की कीमतें ($100 के पार): ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारत की विकास दर और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर सीधा असर पड़ने की चिंता है।

रुपये में एतिहासिक गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹92 के करीब पहुंच गया है, जिससे विदेशी निवेशकों का रिटर्न कम हो रहा है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर-डेनोमिनेटेड एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं, जिससे पैसा उभरते बाजारों (जैसे भारत) से निकलकर अमेरिका जा रहा है।

मुनाफावसूली (Profit Booking): फरवरी में आए रिकॉर्ड निवेश के बाद निवेशक अब ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूल रहे हैं।

वित्तीय सेवा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा मार
सेक्टर के लिहाज से देखें तो 'फाइनेंशियल सर्विसेज' (Financial Services) को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। 15 मार्च को समाप्त हुए पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर से अकेले 31,831 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों को लेकर भी बाजार में संशय है, जिससे मार्जिन पर दबाव दिखने की आशंका जताई जा रही है।

क्या आगे और गिरेगा बाजार? विशेषज्ञों की राय
एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान के अनुसार, निकट भविष्य में बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। यदि तेल की कीमतों में अस्थिरता जारी रहती है या युद्ध और भड़कता है, तो निकासी का सिलसिला थमने वाला नहीं है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का समर्थन और अर्निंग्स में कोई सकारात्मक सरप्राइज बाजार को स्थिरता दे सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का मानना है कि FPIs की वापसी तभी संभव है जब भू-राजनीतिक तनाव कम हो और बाजार में स्थिरता लौटे।


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