
गैस संकट से देश के सिरेमिक हब मोरबी में मंडराया खतरा, कुछ ही दिनों में उद्योग बंद होने का डर
मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मोरबी की लगभग एक-चौथाई सिरेमिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं। अब सबसे बड़ा डर यह है कि अगर प्राकृतिक गैस नहीं मिली तो पूरा उद्योग ठप हो सकता है।
ईरान युद्ध से पैदा हुए गैस संकट की वजह से भारत के सिरेमिक हब मोरबी में चिंता गहराने लगी है। युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ के बंद होने का सीधा असर कई हजार किलोमीटर दूर भारत पर सीधा पड़ने लगा है। कहा जा रहा है कि अगर गैस की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो सिरेमिक उद्योग से जुड़ी कई कंपनियों के ऑपरेशन इस सप्ताह के अंत तक बंद हो सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मोरबी की लगभग एक-चौथाई सिरेमिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं। अब सबसे बड़ा डर यह है कि अगर प्राकृतिक गैस नहीं मिली तो पूरा उद्योग ठप हो सकता है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि इसका असर सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं रहेगा। लाखों ट्रांसपोर्टर, जो कच्चा माल लाते हैं और तैयार उत्पाद ले जाते हैं, वे भी प्रभावित होंगे। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र (कंस्ट्रक्शन सेक्टर) पर भी असर पड़ेगा, जहां इन टाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है और वहां काम करने वाले लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी भी प्रभावित होगी।
मोरबी शहर कई किलोमीटर तक फैली छोटी-बड़ी टाइल फैक्ट्रियों से भरा हुआ है। दिनभर ट्रकों की आवाजाही रहती है और हवा में धूल तैरती रहती है, जो मोरबी की पहचान को एक सिरेमिक हब के रूप में और मजबूत करती है।
यह क्षेत्र मुख्य रूप से पाटीदार समुदाय का गढ़ माना जाता है और भारत के कुल सिरेमिक निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा यहीं से आता है। वहीं गुजरात के कुल सिरेमिक उत्पादन का करीब 90 प्रतिशत भी मोरबी में ही होता है।
गुजरात सरकार के सूत्रों के अनुसार, मोरबी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक क्लस्टर है और भारत की सिरेमिक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है। दुनिया का सबसे बड़ा सिरेमिक क्लस्टर चीन में है।
गुजरात सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मोरबी जिले में लगभग 1,200 सिरेमिक इकाइयां हैं, जिनका सालाना उत्पादन लगभग 60 लाख टन है। इसके अलावा मोरबी का सिरेमिक उद्योग करीब 9 लाख लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार देता है।
पिछले दो वित्तीय वर्षों में राज्य सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के तहत मोरबी में 2,200 से अधिक लाभार्थियों को 115 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई।
वित्त वर्ष 2024-25 में मोरबी से लगभग 15,000 करोड़ रुपये का सिरेमिक निर्यात हुआ, जिसमें मुख्य बाजार अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ओमान और श्रीलंका रहे।

