
Gold price: US फेड विवाद और ईरान संकट का असर, सोने की कीमत में जबरदस्त उछाल
Gold prices high: निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की ओर रुझान दिखाया है, जो सोने की मांग को और मजबूती दे रहा है।
gold at record high: जब भी दुनिया में अनिश्चितता का दौर चलता है और आशंका के बादल गहराने लगते है तो लोग सबसे सुरक्षित निवेश 'सोने' पर भरोसा जताने लगाते है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब अमेरिका में फेडरल रिज़र्व और जस्टिस डिपार्टमेंट के बीच बढ़ते टकराव व ईरान में विरोध-प्रदर्शनों के बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश करना शुरू कर दिया और सोना इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमत लगभग $4,600 प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गई, जो ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब है।
DOJ ने फेडरल रिजर्व को किया नोटिस जारी
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पावेल ने कहा कि DOJ ने उन्हें और केंद्रीय बैंक को ग्रैंड जूरी सबपोना जारी किया है और अपराधिक अभियोजन की धमकी दी है, जो कि उनके जून 2025 के सेंट्रल बैंक मुख्यालय की मरम्मत से जुड़े कार्यों पर कांग्रेस testimony से संबंधित है। इस कदम को फेडरल बैंक की स्वतंत्रता पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह तनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और फेड की नीतियों के बीच बढ़ती अनबन का हिस्सा है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्तियों जैसे सोना को प्राथमिकता दी है।
ईरान में विरोध और सुरक्षित निवेश की मांग
दूसरी तरफ ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और संभावित राजनीतिक उथल-पुथल से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में बढ़ोतरी हुई है। इससे कच्चे तेल बाजार और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे निवेशकों ने कीमती धातुओं की ओर रुख तेज किया है।
सोने के भाव में उछाल
वैश्विक बाजार में सोने की कीमत लगभग $4,600 प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गई, जो ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब है। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की ओर रुझान दिखाया है, जो सोने की मांग को और मजबूती दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार कई तरह के जोखिमों को एक साथ संभाल रहा । भू-राजनीति, आर्थिक नीति पर असमंजस और संस्थागत दबावों के चलते सुरक्षा संपत्तियों का प्रीमियम बढ़ा है।
निवेशकों की धारणा
यह उछाल उस समय आया है, जब सोना पहले ही रिकॉर्ड-सेटिंग वर्ष से उभर रहा है, जिसमें ब्याज दरों के गिरने, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख ने मिलकर सोने का आकर्षण बढ़ाया था। कई निवेश प्रबंधकों ने अभी भी अपनी लंबी-अवधि की सोच के चलते सोने में निवेश बनाए रखा है।

