
2025 में सोने-चांदी ने काटा गदर, क्या 2026 में $5,000 पार करेगा गोल्ड?
सोने ने 65% और चांदी ने 140% से ज्यादा रिटर्न देकर निवेशकों को चौंकाया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में भी कीमती धातुओं में तेजी बनी रह सकती है।
Silver And Gold : साल 2025 सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए यादगार साबित हुआ। जहां सोने ने करीब 65 प्रतिशत का दमदार रिटर्न दिया, वहीं चांदी ने 140 प्रतिशत से ज्यादा की जबरदस्त तेजी दिखाकर मार्केट को हैरान कर दिया। ग्लोबल अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल टेंशन और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर निवेशकों को सेफ हेवन एसेट्स की ओर मोड़ दिया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ट्रेंड यहीं थमने वाला नहीं है। 2026 में भी सोना-चांदी निवेशकों को मजबूत रिटर्न दे सकते हैं, हालांकि रास्ते में करेक्शन और वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। इंडिया से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक, बुलियन सेगमेंट में फिलहाल बुल्स हावी नजर आ रहे हैं।
सोने ने क्यों दिया शानदार मुनाफा
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्छीगर के मुताबिक, 2025 ने साफ कर दिया कि जब भी ग्लोबल हालात डगमगाते हैं, निवेशक सबसे पहले सोने की शरण लेते हैं। इंटरनेशनल मार्केट में इस समय सोना करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का आकलन है कि अगर मौजूदा हालात बने रहते हैं तो सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस का लेवल भी टेस्ट कर सकता है। यानी मौजूदा कीमतों से करीब 700 डॉलर प्रति औंस की और तेजी की गुंजाइश अभी बाकी है। डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, सेंट्रल बैंकों की खरीद और जियोपॉलिटिकल रिस्क, सोने के लिए सपोर्टिंग फैक्टर बने हुए हैं।
चांदी में अभी बाकी है चमक
चांदी ने 2025 में सोने से भी ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। फिलहाल चांदी करीब 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले महीनों में यह 85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
इसका मतलब है कि 2026 में भी चांदी निवेशकों को करीब 20 प्रतिशत तक का अतिरिक्त रिटर्न दे सकती है। इंडस्ट्रियल डिमांड, ग्रीन एनर्जी सेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में बढ़ता इस्तेमाल चांदी के लिए पॉजिटिव ट्रिगर माना जा रहा है।
ग्लोबल टेंशन ने बढ़ाई सेफ हेवन की डिमांड
दुनिया भर में हालात फिलहाल सहज नहीं हैं। अमेरिका के टैरिफ से जुड़े फैसले, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति और हर कुछ महीनों में उभरने वाला कोई नया जियोपॉलिटिकल रिस्क, निवेशकों को लगातार सतर्क बनाए हुए है। ऐसे माहौल में सोना और चांदी एक बार फिर सेफ हेवन एसेट्स के तौर पर उभरे हैं।
डायमंड मार्केट में बदला ट्रेंड
डायमंड बाजार की बात करें तो यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। फिलहाल लैब-ग्रोउन डायमंड्स की डिमांड नेचुरल डायमंड्स से कहीं ज्यादा बनी हुई है। वजह साफ है कम कीमत और आसानी से उपलब्धता।
हालांकि नेचुरल डायमंड्स की कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि तीन से चार साल बाद इसमें धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन फिलहाल डायमंड मार्केट थोड़ा ठंडा ही रहने के आसार हैं।
आगे का आउटलुक क्या कहता है
ब्रोकरेज फर्म नुवामा प्रोफेशनल क्लाइंट्स ग्रुप के मुताबिक, सोना और चांदी का ओवरऑल ट्रेंड फिलहाल बुलिश बना रह सकता है। बीच-बीच में करेक्शन और कंसॉलिडेशन जरूर देखने को मिलेंगे, लेकिन लॉन्ग टर्म स्टोरी अभी भी पॉजिटिव नजर आ रही है।
कुल मिलाकर, 2025 की चमक के बाद 2026 में भी कीमती धातुएं निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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