Gold-Silver Crash: सोना-चांदी धड़ाम, 3 घंटे में डूबे 2 ट्रिलियन डॉलर
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Gold-Silver Crash: सोना-चांदी धड़ाम, 3 घंटे में डूबे 2 ट्रिलियन डॉलर

ग्लोबल मार्केट में कोहराम के बीच सोना और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। एडम कोबेइसी ने इसे बड़ा संकट बताया है। जानें क्यों टूटा सुरक्षित निवेश का भरोसा।


Slow Down In Gold And Silver : ग्लोबल मार्केट में निवेश की दृष्टि से सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सोना और चांदी के बाजार में सोमवार को एक बड़ा भूचाल आ गया। 'द कोबेइसी लेटर' के संस्थापक एडम कोबेइसी ने इसे इस दशक की सबसे तनावपूर्ण घटना करार दिया है। महज तीन घंटे के कारोबार में कीमती धातुओं की मार्केट वैल्यू से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 166 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। यह गिरावट तब देखने को मिली जब ईरान के साथ युद्ध की स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर युद्ध के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार इतिहास उलट गया। निवेशक सुरक्षित निवेश के बजाय बिकवाली की होड़ में नजर आए। इसने पूरी दुनिया के एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है।


बॉन्ड मार्केट ने बिगाड़ा खेल
इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड मार्केट को माना जा रहा है। अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी नोट की यील्ड बढ़कर 4.4 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। महज कुछ ही हफ्तों में इसमें भारी उछाल आया है। बड़े निवेशक अब सोने के बजाय सरकारी पेपर यानी ट्रेजरी में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं। सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जबकि ट्रेजरी अब अच्छा रिटर्न दे रही है। इसी वजह से बड़े फंड हाउस सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट में डाल रहे हैं। इसके चलते सोने की चमक फीकी पड़ गई है।

डॉलर की मजबूती और मार्जिन कॉल
ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी डॉलर एक बार फिर 'अल्टीमेट सेफ हेवन' बनकर उभरा है। डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा, बाजार में भारी मात्रा में लेवरेज यानी उधार लेकर की गई पोजिशनिंग भी इस तबाही का कारण बनी। जैसे ही कीमतें एक खास स्तर से नीचे गिरीं, स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गए। मार्जिन कॉल आने की वजह से बड़े निवेशकों को अपनी होल्डिंग मजबूरी में बेचनी पड़ी। लिक्विडिटी की कमी ने इस बिकवाली को और ज्यादा हिंसक बना दिया।

भारतीय बाजार में भी हाहाकार
भारतीय बाजारों में भी इस वैश्विक मंदी का साफ असर देखा गया। बेंगलुरु के ट्रेडर नवीन के अनुसार, यह कोई सामान्य गिरावट नहीं बल्कि 'फोर्स्ड डी-लेवरेजिंग' है। 23 मार्च को दोपहर 12:15 बजे एमसीएक्स (MCX) पर अप्रैल 2026 के गोल्ड फ्यूचर्स में 8.11 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। चांदी के भाव तो 10.72 प्रतिशत तक टूटकर 2,02,465 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। गोल्ड ईटीएफ (ETF) में भी 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। तांबा और जिंक जैसी बेस मेटल्स भी इस बिकवाली की चपेट में आ गई हैं।

क्या टूट रहा है पुराना नियम?
बाजार के जानकारों का मानना है कि 'सेफ हेवन' का पुराना स्क्रिप्ट अब बदल रहा है। युद्ध और महंगाई के समय सोने को सबसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन उच्च यील्ड और मजबूत डॉलर ने इस धारणा को चुनौती दी है। अगर यह दबाव जारी रहता है, तो इसका असर आने वाले दिनों में क्रेडिट मार्केट और इमर्जिंग मार्केट्स पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक इस बात से डरे हुए हैं कि क्या कोई बड़ा खिलाड़ी मार्केट में लिक्विडेट हुआ है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।


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