Budget 2026: सोना-चांदी खरीदने और निवेश के नए नियम, जानें अब कितना टैक्स?
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Budget 2026: सोना-चांदी खरीदने और निवेश के नए नियम, जानें अब कितना टैक्स?

बजट 2026 में गोल्ड-सिल्वर निवेश पर टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं। MCX पर कीमतें 13,000 रुपये तक गिरीं। विरासत में मिले सोने और ETF पर जानें टैक्स का पूरा गणित।


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Budget 2026 Gold And Silver : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसने सर्राफा बाजार के समीकरण बदल दिए हैं। पिछले एक साल से सोने और चांदी की कीमतों में आ रही रिकॉर्डतोड़ तेजी के कारण इस बार निवेशकों और आम जनता की निगाहें पूरी तरह बजट पर टिकी थीं। बजट भाषण के दौरान और उसके तुरंत बाद एमसीएक्स (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी गिरावट देखी गई, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। हालांकि, सरकार ने गोल्ड और सिल्वर में निवेश के बुनियादी नियमों में किसी बड़े फेरबदल का ऐलान नहीं किया, लेकिन बाजार ने इसे भारी बिकवाली के साथ लिया। कीमतों में आई कमी के बीच अब खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि वर्तमान में सोने की खरीद, उसकी होल्डिंग और उसे बेचने पर टैक्स की क्या स्थिति रहेगी।

बाजार में मची खलबली:चांदी 26,000 रुपये तक टूटी


बजट 2026 के पेश होने के साथ ही कमोडिटी मार्केट में हलचल मच गई। एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम 13,000 रुपये तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। चांदी की स्थिति और भी खराब रही, जहाँ इसमें 26,000 रुपये तक की रेकॉर्ड गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले सोने और चांदी की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर थीं, इसलिए बजट में किसी नई राहत की उम्मीद न दिखने पर मुनाफावसूली हावी हो गई। हालांकि, बजट के बाद सोने के भाव में थोड़ा सुधार देखने को मिला, लेकिन चांदी की गिरावट ने ज्वेलर्स और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।


फिजिकल गोल्ड पर जीएसटी और मेकिंग चार्ज का बोझ

भारत में आज भी भौतिक सोना (Physical Gold) खरीदना सबसे पसंदीदा निवेश माना जाता है। इस पर लगने वाले टैक्स की बात करें तो सोने की खरीद पर 3 फीसदी जीएसटी (GST) देना अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि आप आभूषण बनवा रहे हैं, तो मेकिंग चार्ज पर अलग से 5 फीसदी जीएसटी का प्रावधान है। डिजिटल गोल्ड और सिल्वर के मामले में भी 3 फीसदी जीएसटी लगता है, लेकिन यहाँ राहत की बात यह है कि आपको 5 फीसदी का मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता। डिजिटल गोल्ड को सुरक्षित रखने की लागत भी फिजिकल गोल्ड के मुकाबले कम आती है।


होल्डिंग पीरियड और टैक्स का गणित

यदि आप निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी रखते हैं, तो इसे बेचने पर होने वाले लाभ पर टैक्स देना होता है। यह टैक्स आपके होल्डिंग पीरियड पर निर्भर करता है:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): यदि आप फिजिकल गोल्ड को 24 महीने से कम समय तक अपने पास रखते हैं, तो इसे बेचने पर होने वाला मुनाफा आपकी सालाना आय में जोड़ा जाता है। इसके बाद आपके आयकर स्लैब (Slab Rates) के अनुसार टैक्स लगता है।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): यदि सोने को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो इस पर 12.5 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अब इसमें इनडेक्सेशन (Indexation) का लाभ नहीं मिलता है।


विरासत में मिले सोने पर सरकार का रुख

भारत में पारिवारिक विरासत के रूप में मिलने वाले सोने पर कोई टैक्स नहीं है। माता-पिता, पति-पत्नी या भाई-बहनों से उपहार के तौर पर मिले सोने और चांदी पर आपको कोई कर नहीं चुकाना होता। हालांकि, यदि आप किसी गैर-रिश्तेदार से 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का सोना तोहफे में लेते हैं, तो वह 'आय' माना जाएगा और आपको उस पर टैक्स देना होगा। जब आप विरासत में मिले इस सोने को बाजार में बेचते हैं, तो कैपिटल गेन की गणना उस कीमत से की जाती है, जिस पर मूल मालिक (जैसे आपके दादा या पिता) ने इसे खरीदा था।


ईटीएफ और म्यूचुअल फंड के विशेष नियम

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) को अब लिस्टेड सिक्योरिटीज की श्रेणी में रखा गया है। अगर आप इन्हें 12 महीने तक होल्ड करते हैं, तो लाभ पर स्लैब रेट से टैक्स लगेगा। लेकिन 12 महीने से अधिक होने पर बिना इनडेक्सेशन के 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। वहीं, गोल्ड और सिल्वर म्यूचुअल फंड के लिए लॉन्ग टर्म की अवधि 24 महीने तय की गई है। 24 महीने से ज्यादा निवेश रखने पर ही आपको 12.5 फीसदी का टैक्स लाभ मिलता है।

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