Google ने ढूंढा H1B वीजा प्रतिबंधों का तोड़, बेंगलुरू में बना रहा है नया और विशालकाय ऑफिस
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बेंगलुरू में गूगल का एक विशाल नया ऑफिस कॉम्प्लेक्स तैयार किया जा रहा है, जिसका पहला टावर आने वाले महीनों में कर्मचारियों के लिए खुल जाएगा

Google ने ढूंढा H1B वीजा प्रतिबंधों का तोड़, बेंगलुरू में बना रहा है नया और विशालकाय ऑफिस

यह रणनीतिक कदम अमेरिका में भारतीय इंजीनियरों के लिए बढ़ती H-1B वीज़ा लागत से बचने के मकसद से उठाया जा रहा है। टेक दिग्गज कंपनी एआई और इंजीनियरिंग टैलेंट की सक्रिय रूप से भर्ती कर रही है, जो इस बात का संकेत है कि बड़ी टेक कंपनियां भारत में अपने वर्कफोर्स को लगातार बढ़ा रही हैं।


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ऐसा लग रहा है कि गूगल ने H-1B वीज़ा की पाबंदियों से बचने के लिए बीच का रास्ता तलाश लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट चुपचाप अपनी अब तक के सबसे बड़े विदेशी विस्तार प्लान पर काम कर रही है। इसके तहत बेंगलुरु में एक विशाल ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है, जिसमें करीब 20,000 नए कर्मचारी काम कर सकते हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित H-1B वीज़ा फीस में भारी बढ़ोतरी अमेरिका में भारतीय इंजीनियरों को लाने की लागत को बेहद महंगा बना रही है। वो वीजा फीस प्रति आवेदन 1 लाख डॉलर तक जा सकती है।

रिपोर्ट्स बता रही हैं कि अल्फाबेट ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड टेक कॉरिडोर में स्थित एलेम्बिक सिटी डेवलपमेंट में एक ऑफिस टावर लीज़ पर लिया है और दो अन्य टावरों के लिए विकल्प सुरक्षित कर लिए हैं। कुल मिलाकर यह क्षेत्रफल लगभग 24 लाख वर्ग फुट का है। पहला टावर आने वाले महीनों में कर्मचारियों के लिए खुल जाएगा, जबकि बाकी दो के अगले साल तक तैयार होने की उम्मीद है।

गूगल के लिए बेंगलुरु बना एआई टैलेंट हब

अगर अल्फाबेट अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल करता है, तो भारत में उसका कर्मचारी आधार मौजूदा 14,000 से दोगुने से भी ज़्यादा हो सकता है। कंपनी पहले ही बेंगलुरु में सैकड़ों इंजीनियरिंग पदों के लिए विज्ञापन दे चुकी है जिनमें एआई प्रैक्टिस डायरेक्टर, चिप डिज़ाइनर और मशीन लर्निंग विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें से कई पदों के लिए पीएचडी की ज़रूरत बताई गई है।

गूगल ने पिछले साल भारत में अपना सबसे बड़ा कैंपस खोला था, जिसमें इनडोर मिनी गोल्फ, पिकलबॉल कोर्ट और इलायची चाय परोसने वाले कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं हैं। यूट्यूब भी वहीं जेनरेटिव एआई टूल्स विकसित करने के लिए इंजीनियरों की भर्ती कर रहा है।

भारत में बिग टेक की भर्ती की होड़

इस रुझान में गूगल अकेला नहीं है। स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो के मुताबिक, फेसबुक, अमेज़न, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स और गूगल, इन सभी का भारत में संयुक्त कर्मचारी आधार पिछले एक साल में 16% बढ़ा है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि है।

ओपनएआई और एंथ्रोपिक ने भी हाल ही में भारत में अपने ऑपरेशंस शुरू किए हैं। एंथ्रोपिक ने जनवरी में माइक्रोसॉफ्ट की पूर्व एग्ज़ीक्यूटिव इरीना घोष को अपने भारत कारोबार का प्रमुख नियुक्त किया है।

उद्योग संगठन नैसकॉम का अनुमान है कि वैश्विक क्षमता केंद्र यानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा संचालित टेक हब 2030 तक भारत में 25 लाख लोगों को रोज़गार देंगे, जो वर्तमान में 19 लाख हैं। वॉशिंगटन की सख़्त होती इमिग्रेशन नीतियों से जूझ रही अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भारत अब एक स्पष्ट विकल्प बनता जा रहा है।

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