मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने की सरकार की योजना, ₹1 प्रति GB टैक्स की प्लानिंग
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IIFL के अनुसार, ऐसा टैक्स गरीब लोगों पर ज्यादा बोझ डालेगा, क्योंकि उनके पास Wi-Fi या ब्रॉडबैंड जैसी सुविधाएं कम होती हैं।

मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने की सरकार की योजना, ₹1 प्रति GB टैक्स की प्लानिंग

IIFL के मुताबिक ₹1 प्रति GB डेटा टैक्स से सरकार को ₹30,000 करोड़ तक की कमाई हो सकती है, लेकिन इससे मोबाइल बिल 20% तक बढ़ सकते हैं और गरीब लोगों पर ज्यादा असर पड़ने के कारण इस प्रस्ताव का विरोध भी हो सकता है।


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सरकार आपके मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने का इरादा कर रही है। IIFL कैपिटल ने अनुमान लगाया है, उसके मुताबिक मोबाइल डेटा पर सरकाकर अगर ₹1 प्रति GB टैक्स लगाती है तो इससे सरकार को लगभग ₹30,000 करोड़ का राजस्व मिल सकता है।

हालांकि, संस्था ने चेतावनी दी है कि इससे मोबाइल रिचार्ज या बिल में करीब 20% तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कुल प्रभावी टैक्स 29–40% तक पहुंच सकता है, जिसमें 18% GST भी शामिल है।

सरकार का उद्देश्य दोहरा नजर आता है—एक ओर सेक्टर से अधिक राजस्व जुटाना और दूसरी ओर गैर-जरूरी डेटा खपत को हतोत्साहित करना। दूसरे शब्दों में, शॉर्ट वीडियो, रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट, खासकर युवाओं और किशोरों के बीच, की अधिक खपत को कम करना।

राजकोषीय पहलू

IIFL के अनुसार, यदि भारतीयों द्वारा सालाना डेटा उपयोग 293,293 पेटाबाइट माना जाए, तो ₹1 प्रति GB टैक्स से सरकार को ₹279,709 मिलियन (लगभग ₹27,971 करोड़) की आय हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है,“अगर रिपोर्ट किए गए मोबाइल डेटा ट्रैफिक पर ₹1/GB टैक्स लगाया जाए, तो सरकार की सालाना आय इंडस्ट्री के मोबाइल राजस्व का लगभग 10% और GDP का 0.1% होगी। इस लिहाज से राजकोषीय लाभ बहुत ज्यादा नहीं दिखते।”

यूजर्स पर असर

IIFL ने यह भी कहा कि यह तरीका उन उपभोक्ताओं के लिए अनुचित होगा जो आम दिनों में 2GB/दिन से कम डेटा इस्तेमाल करते हैं और महीने में केवल कुछ दिनों के लिए ज्यादा डेटा की जरूरत होती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बहुत कम देशों—जैसे युगांडा, हंगरी, तंजानिया और जाम्बिया—ने डेटा टैक्स लागू किया है, जिनमें हंगरी ने बाद में इस प्रस्ताव को वापस ले लिया।

गरीब तबके पर ज्यादा बोझ

IIFL के मुताबिक, ऐसा टैक्स “रिग्रेसिव” होगा, यानी इसका असर कम आय वाले लोगों पर ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि उनके पास Wi-Fi या फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की सुविधा कम होती है।

इसके अलावा, यह टेलीकॉम कंपनियों की टैरिफ बढ़ाने की क्षमता को सीमित कर सकता है और उन्हें अपने प्लान स्ट्रक्चर में बदलाव करने पर मजबूर कर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया,“अगर ₹1/GB टैक्स को डेली डेटा अलाउंस वाले पैक्स पर लागू किया जाता है, तो उपभोक्ताओं के खर्च में 9–19% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, वास्तविक डेटा उपयोग पर टैक्स लगाना ज्यादा उचित हो सकता है, लेकिन इसे बारीकी से मॉनिटर करना सरकार और TRAI के लिए मुश्किल होगा।”

लागू होने की संभावना कम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि “अच्छे” और “बुरे” डेटा उपयोग की पहचान करना मुश्किल है। अगर सभी तरह के डेटा पर समान टैक्स लगाया गया, तो शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे जरूरी उपयोग भी महंगे हो जाएंगे।

“डेटा यूज टैक्स एक रिग्रेसिव कदम होगा क्योंकि अमीर वर्ग के लोगों के पास घर और ऑफिस में Wi-Fi की सुविधा होती है। हमें लगता है कि टेलीकॉम कंपनियां, उपभोक्ता समूह और OTT प्लेटफॉर्म TRAI की कंसल्टेशन प्रक्रिया में इसका विरोध करेंगे, जिससे इसके लागू होने की संभावना काफी कम है।”

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