590 करोड़ घोटाले के बाद हरियाणा का बड़ा एक्शन, सरकारी फंड पर रोक
x

590 करोड़ घोटाले के बाद हरियाणा का बड़ा एक्शन, सरकारी फंड पर रोक

हरियाणा सरकार ने 590 करोड़ की धोखाधड़ी के खुलासे के बाद IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से हटाया, खातों के ट्रांसफर के निर्देश दिए हैं।


Click the Play button to hear this message in audio format

हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज के लिए पैनल से बाहर कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, अगले आदेश तक इन बैंकों के माध्यम से कोई भी सरकारी धनराशि न तो जमा की जाएगी, न निवेश की जाएगी और न ही किसी प्रकार का लेनदेन किया जाएगा।

सर्कुलर में कहा गया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को हरियाणा में सरकारी कार्यों के लिए तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक डी-एम्पैनल किया जाता है। रविवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने खुलासा किया था कि उसके कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। बैंक ने तड़के जारी एक नियामकीय सूचना में बताया कि इस मामले की जानकारी बैंकिंग नियामक को दे दी गई है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

हरियाणा सरकार के परिपत्र में आगे कहा गया है कि अब से इन बैंकों में कोई भी सरकारी धन पार्क, जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा। 18 फरवरी को जारी इस आदेश के अनुसार, सभी संबंधित विभागों और संगठनों को निर्देश दिया गया है कि वे इन बैंकों में रखी गई शेष राशि को तत्काल स्थानांतरित करें और खातों को बंद करें।

वित्त विभाग ने यह भी संज्ञान लिया है कि कुछ बैंक उन शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं जिनके तहत विभागों और निगमों द्वारा सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) कराए जाते हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि कई मामलों में स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, जहां धन को अधिक ब्याज देने वाली लचीली जमा या अन्य सावधि योजनाओं में रखना था, बैंकों ने उसे बचत खातों में ही रखा, जिससे कम रिटर्न मिला और सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ।

यह परिपत्र बैंकों के साथ व्यवहार संबंधी संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत जारी किया गया है और इसे सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, सभी उपायुक्तों तथा राज्य में कार्यरत सार्वजनिक, निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को संबोधित किया गया है। यह भी पाया गया है कि कई विभाग और निगम नियमित रूप से अपने सावधि जमा और बैंक खातों का मिलान (रिकंसिलिएशन) नहीं कर रहे हैं, जिससे ऐसी अनियमितताओं का समय पर पता नहीं चल पाता।

इन परिस्थितियों को देखते हुए सभी विभागों, निगमों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को निर्देश दिए गए हैं कि सावधि जमा केवल स्वीकृत शर्तों और नियमों के अनुसार ही किए जाएं।यह नियमित रूप से सत्यापित किया जाए कि बैंक निर्धारित जमा निर्देशों का पालन कर रहे हैं।सभी सावधि जमा और संबंधित बैंक खातों का मासिक आधार पर मिलान किया जाए।

साथ ही निर्देश दिया गया है कि किसी भी विसंगति को तुरंत संबंधित बैंक के संज्ञान में लाया जाए और गंभीर मामलों की सूचना वित्त विभाग को दी जाए। परिपत्र में कहा गया है कि सभी विभाग, बोर्ड और निगम वित्त विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अपने-अपने बैंक खातों का मिलान 31 मार्च 2026 तक हर हाल में पूरा करें।इसके अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित अनुपालन रिपोर्ट 4 अप्रैल तक वित्त विभाग को प्रस्तुत करनी होगी।

(यह खबर पीटीआई की सिंडिकेटेड फीड से स्वतः प्रकाशित है। हेडलाइन को छोड़कर इसमें किसी प्रकार का संपादन नहीं किया गया है।)

Read More
Next Story