चेयरमैन के इस्तीफे के बाद HDFC में हलचल, तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स हटे
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चेयरमैन के इस्तीफे के बाद HDFC में हलचल, तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स हटे

HDFC बैंक ने AT-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया है। चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गवर्नेंस और आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं।


देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक में हाल के दिनों में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैंक ने “मिस-सेलिंग” (गलत तरीके से उत्पाद बेचने) से जुड़े मामलों को लेकर अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों से इस्तीफा ले लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि जिन तीन अधिकारियों को हटाया गया है उनके नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें एक बिजनेस डिवीजन का प्रमुख, एक एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट और एक सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट शामिल हैं।

इस मामले पर पूछे गए सवालों के जवाब में एचडीएफसी बैंक ने कहा कि यूएई के दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) स्थित उसकी शाखा में ग्राहक ऑनबोर्डिंग से जुड़े कुछ नियमों में खामियां पाई गई थीं। बैंक ने इस मामले की विस्तृत और निष्पक्ष समीक्षा की है और अपनी आंतरिक नीतियों के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही, बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि इन प्रक्रियाओं के तहत संबंधित कर्मियों में बदलाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

बैंक ने आगे कहा कि उसके पास मजबूत गवर्नेंस फ्रेमवर्क मौजूद हैं और वह नियामकीय अनुपालन के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।दरअसल, यह पूरा मामला क्रेडिट सुइस के अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स की गलत तरीके से बिक्री से जुड़ा बताया जा रहा है। दुबई शाखा में इन बॉन्ड्स को एनआरआई ग्राहकों को फिक्स्ड मैच्योरिटी बॉन्ड के रूप में पेश किया गया था, जबकि वास्तविकता में ये उच्च जोखिम वाले निवेश थे। बाद में क्रेडिट सुइस के दिवालिया होने और UBS द्वारा उसके अधिग्रहण के बाद इन बॉन्ड्स को पूरी तरह लिख-ऑफ कर दिया गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ शशिधर जगदीशन ने कहा कि इस तरह के मामले बैंक के 32 वर्षों के इतिहास में समय-समय पर सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा, “हर मामले को जवाबदेही के नजरिए से देखा जाता है। इसके लिए हमारे पास एक स्थापित प्रक्रिया और नीतियां हैं, जिनके तहत स्वतंत्र रूप से जांच और कार्रवाई की जाती है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि बैंक में निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी है और असहमति की स्थिति भी स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, यही एक मजबूत और सकारात्मक गवर्नेंस की पहचान है। उन्होंने संकेत दिया कि संभवतः इसी कारण से अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया होगा।

पूर्व नौकरशाह अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और प्रक्रियाएं हुईं जो उनके व्यक्तिगत “मूल्यों और नैतिकता” के अनुरूप नहीं थीं, इसलिए उन्होंने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का निर्णय लिया।

बैंक के स्वतंत्र निदेशक और ऑडिट कमेटी के अध्यक्ष एम. डी. रंगनाथ ने भी इस मामले पर कहा कि बैंक में किसी भी तरह की शिकायत या गड़बड़ी की जांच के लिए एक स्थापित प्रणाली है। आंतरिक ऑडिट और सतर्कता विभाग स्वतंत्र रूप से जांच करते हैं और मामले की गंभीरता के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच और कार्रवाई पूरी हो चुकी है और अब इसमें कुछ भी लंबित नहीं है।

गौरतलब है कि चक्रवर्ती और इन तीन अधिकारियों के इस्तीफे बैंक में हाल के समय में हुए कई हाई-प्रोफाइल एग्जिट्स की कड़ी का हिस्सा हैं। इससे पहले कॉर्पोरेट और बिजनेस बैंकिंग के ग्रुप हेड राहुल श्याम शुक्ला ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया था, जो 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। वहीं बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भावेश जावेरी ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया और वे 18 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं। इसके अलावा, जून 2025 में चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) विनय रजदान ने भी अपना पद छोड़ दिया था।


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