
बैंकों में जमा पैसे निकालकर शेयर बाजार में लगा रहे निवेशक, संसदीय समिति ने जताई चिंता
घरेलू जमा बैंकों से निकलकर शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने के चलते बैंकों के सामने नगदी का संकट पैदा हो सकता है.
Household Deposits Update: भारी रिटर्न के चक्कर में निवेशक हाल के वर्षों में बैंकों में जमा अपने डिपॉजिट्स को निकाल कर अब शेयर मार्केट से जुड़े फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं. लेकिन वित्त मंत्रालय (Ministry Of Finance) के अधीन आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज इसे उचित नहीं मानता है. डिपार्टमेंट ने निवेशकों में निवेश की बदलती हुई इस प्रवृति पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इसमें शामिल जोखिमों की समझ ना होने के चलते ऐसे निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है. तो वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थाई समिति ने भी कहा है कि इसके चलते बैंकों के सामने नगदी का संकट खड़ा हो सकता है.
शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड में निवेश लुभा रहा निवेशकों को
कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) के बाद से शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करने वाले निवेशकों की बाढ़ आ गई है. रिकॉर्ड संख्या में डिमैट खाते (Demat Accounts) खुले तो म्यूचुअल फंड्स (Mutuals Funds) के फोलियो संख्या में भी जोरदार तेजी आई है और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने 25000 करोड़ रुपये का निवेश बाजार में आ रहा है.
घरेलू निवेशकों को हो सकता है भारी नुकसान
ऐसे में घरेलू बचत को बैंकों से निकालकर मार्केट लिंक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में शिफ्ट करने के मुद्दे पर, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डिमांड ऑफ ग्रॉंट्स (Demand Of Grants) को लेकर वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थाई समिति को सौंपे गए अपने जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (Department Of Financial Services) ने बताया कि, उच्च रिटर्न की तलाश में, बैंकों से मार्केट लिंक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की ओर घरेलू डिपॉजिट्स के शिफ्ट किए जाने से घरेलू निवेशकों को बाजार के बड़े जोखिम और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. डिपार्टमेंट ने कहा, बाजार में गिरावट या अस्थिरता के दौरान, जोखिमों के अपर्याप्त आकलन और वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण घरेलू निवेशकों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बैंकों के सामने नगदी का संकट!
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने स्थाई समिति को बताया कि, इसके अलावा, फाइनेंशियल सेविंग यानी वित्तीय बचत में गिरावट, बैंकिंग सेक्टर के लिए नगदी बनाए रखने के नजरिए से बड़ी चुनौती उत्पन्न कर सकती है. बैंकों से घरेलू बचत की निकासी सस्ते फंड्स के सोर्स तक उनकी पहुंच को बाधित कर सकती है, जिससे बैंकों के लिए पूंजी की लागत (Cost Of Funds) में वृद्धि हो सकती है.
घरेलू बचत के बैंकों में घटने पर संसदीय समिति भी चिंतित
वित्त मंत्रालय के इस जवाब पर संसदीय समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि वो बैंकिंग सेक्टर के फाइनेंशियल हेल्थ में आई मजबूती को स्वीकार करती है. लेकिन जिस प्रकार घरेलू जमा बैंकों से शिफ्ट होकर मार्केट-लिंक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में जाने और बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, समिति मानती है कि बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. स्थाई समिति ने कहा, वित्तीय बचत में गिरावट बैंकों के लिए नगदी की चुनौती पेश कर रही है जिससे बैंकों के लिए सस्ते फंड्स को जुटाने में दिक्कतें आ सकती है. समिति ने अपनी सिफारिश में कहा कि बैंकों को अपनी फंडिंग सोर्स में विविधता लाने के साथ, AI के इस्तेमाल, लागत कम करने और डिजिटल बैंकिंग इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए.