शेयर बाजार में कैसे डूबे 12 लाख करोड़ रुपये?, दलाल स्ट्रीट में कोहराम की इनसाइड स्टोरी
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निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

शेयर बाजार में कैसे डूबे 12 लाख करोड़ रुपये?, दलाल स्ट्रीट में कोहराम की इनसाइड स्टोरी

गुरुवार को सेंसेक्स 2,500 अंक टूटा जबकि निफ्टी 23,000 के पास पहुंच गया। दलाल स्ट्रीट ‘ब्लडबाथ’ की 9 बड़ी वजहें यहां समझिए।


भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। इस तेज गिरावट ने हाल के सभी मुनाफे मिटा दिए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी इसके प्रमुख कारण रहे। वैश्विक बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई। HDFC Bank के शेयरों में गिरावट ने भी बाजार को नीचे खींचा।

गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 3% से ज्यादा गिर गए। BSE Sensex करीब 2,500 अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 23,000 के करीब बंद हुआ।

इस गिरावट से BSE में लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप में ₹11.5 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹427 लाख करोड़ रह गई।

सेंसेक्स 2,497 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक गिरकर 23,002 पर बंद हुआ और दिन के दौरान 23,000 के नीचे भी चला गया।

सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। HDFC Bank और Eternal में 5% से ज्यादा गिरावट आई। Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra और Larsen & Toubro में 4–5% की गिरावट रही।

सभी सेक्टरों में गिरावट रही—Nifty Auto 4% से ज्यादा गिरा और Nifty Realty लगभग 4% नीचे रहा। NSE पर 2,679 शेयर गिरे, 532 बढ़े और 95 स्थिर रहे।

बाजार गिरने के 9 बड़े कारण

1) कच्चे तेल की कीमत $116 के पार

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के लंबे समय तक बंद रहने से तेल की कीमत $116 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

कतर की कंपनी QatarEnergy ने बताया कि रास लाफान पर ईरानी मिसाइल हमले से भारी नुकसान हुआ। UAE ने भी गैस प्लांट बंद कर दिए।

2) फेड की सख्त नीति

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Jerome Powell ने ब्याज दरें स्थिर रखीं और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई।

3) HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट

HDFC Bank के शेयर लगभग 9% गिर गए, जिससे बाजार पर बड़ा असर पड़ा।

4) वैश्विक बाजारों में गिरावट

अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग और यूरोप के बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई।

5) अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछा

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ी, जिससे निवेशकों का रुझान शेयर बाजार से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर गया।

6) विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी निवेशकों ने लगातार 14वें दिन भारतीय बाजार से पैसे निकाले, जिससे बाजार पर दबाव बना।

7) साप्ताहिक एक्सपायरी का असर

गुरुवार को सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी थी, जिससे बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा।

8) प्रॉफिट बुकिंग

पिछले कुछ दिनों की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली की, जिससे बाजार गिरा।

9) रुपये पर दबाव

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

आगे क्या होगा?

इजरायल द्वारा ईरान के LNG प्लांट पर हमले के बाद अनिश्चितता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक $110 से ऊपर रहती है, तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था, GDP और कंपनियों की कमाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

हालांकि, यह भी संभव है कि युद्ध अचानक खत्म हो जाए और तेल की कीमतें तेजी से गिरें।

विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

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