
ईरान संकट के बीच दुनिया के तेल बाज़ार में हड़कंप, भारत के पास तेल का कितने दिन का कोटा है?
फरवरी में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में करीब 74 दिनों तक मांग पूरी करने में सक्षम है।
पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की घोषणा से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में ईरान के इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है।
भारत के पास तेल रिजर्व कितना?
हालांकि भारत के लिए फिलहाल राहत की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि देश की ऊर्जा स्थिति मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल जैसे तैयार उत्पादों का लगभग 25 दिनों का स्टॉक परिवहन में है।
इससे पहले फरवरी में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में करीब 74 दिनों तक मांग पूरी करने में सक्षम है।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि भंडार का आकलन केवल भूमिगत गुफाओं (कैवर्न्स) में रखे तेल के आधार पर नहीं, बल्कि रिफाइनरियों में उपलब्ध स्टॉक को मिलाकर किया जाता है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में स्थापित भूमिगत भंडार के अलावा ओडिशा में भी नई सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर के सलाहकार इब्राहिम जब्बारी ने मंगलवार को दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी जहाज इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे ईरानी नौसेना और सेना की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस क्षेत्र से तेल निर्यात को रोक देगा और आवश्यकता पड़ने पर पाइपलाइनों को भी निष्क्रिय कर सकता है। जब्बारी ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अरबों डॉलर के कर्ज में डूबे हैं और इस क्षेत्र के तेल पर निर्भर हैं, लेकिन “हम तेल की एक बूंद भी उन्हें नहीं पहुंचने देंगे।”
समुद्री यातायात लगभग ठप
ईरान ने रविवार को जलडमरूमध्य बंद करने के अपने इरादे की घोषणा की थी। यह घोषणा उस समय आई जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य नेतृत्व की बैठक के कुछ घंटों बाद हवाई हमलों में कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई।
घोषणा के बाद से कच्चे तेल का लगभग 90 प्रतिशत समुद्री यातायात प्रभावित हो चुका है। जहां सामान्य तौर पर प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, वहीं रविवार को केवल तीन टैंकर ही पार कर सके और सोमवार को यह संख्या घटकर एक रह गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश में तेल टैंकरों सहित कम से कम छह जहाज क्षतिग्रस्त हुए हैं। फिलहाल दोनों ओर 700 से अधिक टैंकर फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ रहा है।
स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

