लंबी खिंची जंग तो महंगाई मार डालेगी, पेट्रोल-डीजल से लेकर सोना-चांदी सब में आएगा उछाल
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अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग की वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपए तक महंगे हो सकते हैं

लंबी खिंची जंग तो महंगाई मार डालेगी, पेट्रोल-डीजल से लेकर सोना-चांदी सब में आएगा उछाल

अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने का असर भारत को भी महंगाई बढ़ने के रूप में झेलना पड़ सकते है। अगर जंग लंबी चली और तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' बंद हुआ तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं।


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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संभावित खतरे ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान इस अहम समुद्री मार्ग को ब्लॉक करता है, तो इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

पेट्रोल-डीजल के दामों में तेज उछाल की आशंका

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹95 प्रति लीटर से बढ़कर ₹105 तक पहुंच सकती है, जबकि डीजल ₹88 से बढ़कर ₹96 प्रति लीटर तक जा सकता है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब 50% क्रूड होर्मुज के रास्ते आता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई घट सकती है और कच्चे तेल की कीमत 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

सोना-चांदी में रिकॉर्ड तेजी संभव

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार, युद्ध जैसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपये तक जा सकता है।

चांदी की कीमत, जो अभी लगभग 2.67 लाख रुपये प्रति किलो है, बढ़कर 3.50 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

शेयर बाजार में गिरावट का अनुमान

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि तनाव बढ़ने की स्थिति में शेयर बाजार में 1 से 1.5% तक की गिरावट आ सकती है। इसका मतलब है कि सेंसेक्स करीब 1300 अंक और निफ्टी लगभग 300 अंक तक टूट सकता है।

युद्ध या वैश्विक संकट की आशंका में निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज स्ट्रेट लगभग 167 किमी लंबा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों छोर लगभग 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। समुद्री यातायात के लिए यहां 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन निर्धारित है।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं।

भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से अधिक हिस्सा भी इसी रास्ते से जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजियरिंग उत्पाद शामिल हैं। हर दिन लगभग 1.78 से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से गुजरता है। ईरान स्वयं रोजाना करीब 17 लाख बैरल पेट्रोलियम इसी रास्ते से निर्यात करता है।

होर्मुज बंद हुआ तो ईरान को भी बड़ा नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को भी गंभीर झटका लगेगा क्योंकि वह अपना तेल निर्यात नहीं कर पाएगा।

ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। सप्लाई बाधित होने पर दोनों देशों के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में ईरान ने 2018 के बाद सबसे अधिक तेल इसी मार्ग से परिवहन किया है।

सऊदी अरब के पास वैकल्पिक रास्ता

सऊदी अरब के पास ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ का विकल्प है। यह 746 मील लंबी पाइपलाइन देश के एक छोर से रेड सी टर्मिनल तक जाती है और इसके जरिए रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा सकता है।

भारत की तैयारी: वैकल्पिक आयात और रणनीतिक भंडार

सरकार संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से तेल की खरीद बढ़ा रहा है। जरूरत पड़ने पर भारत अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से भी तेल जारी कर सकता है।

अगर होर्मुज में संकट गहराता है तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, शेयर बाजार और कीमती धातुओं तक फैल सकता है। फिलहाल बाजार हालात पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन जोखिम की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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