
साइकिल पर जंग की मार: 1 अप्रैल से महंगी हो सकती है गरीब की सवारी, सूखे मेवे और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ीं
सूखे मेवा व्यापारियों के मुताबिक, ईरान और अफगानिस्तान से आयात होने वाले प्रमुख उत्पादों की कीमतों में आपूर्ति बाधित होने और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण 80 से 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब भारतीय रिटेल बाजार पर सीधे तौर पर दिखने लगा है। सूखे मेवों और खाद्य तेलों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है। वहीं साइकिल उद्योग ने भी बढ़ती लागत और ईंधन संकट का हवाला देते हुए अगले महीने से कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर दी है।
सूखे मेवा व्यापारियों के मुताबिक, ईरान और अफगानिस्तान से आयात होने वाले प्रमुख उत्पादों की कीमतों में आपूर्ति बाधित होने और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण 80 से 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली के बाजारों से मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि पिस्ता की कीमत लगभग दोगुनी होकर ₹2,000 प्रति किलो से बढ़कर ₹4,000 प्रति किलो हो गई है, जबकि ईरान की प्रीमियम बादाम किस्म ‘ममरा गिरी’ ₹2,000–2,200 से बढ़कर ₹3,800–4,200 प्रति किलो हो गई है।
बताया जा रहा है कि फिलहाल व्यापारी देश में मौजूद पुराने स्टॉक पर निर्भर हैं, क्योंकि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फसल को नुकसान और सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका के चलते नई आपूर्ति अनिश्चित बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवे, जैसे गुरबंदी बादाम और किशमिश भी काफी महंगे हो गए हैं। गुरबंदी गिरी की कीमत 70–80% तक बढ़ गई है, जबकि किशमिश ₹600–700 से बढ़कर ₹900–1,000 प्रति किलो हो गई है। इनकी सप्लाई दुबई के रास्ते आती है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता से प्रभावित हुई है। हालांकि अमेरिका के कैलिफोर्निया बादाम की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो मुख्य रूप से शिपमेंट में देरी के कारण है।
रिटेलर्स ने खाद्य तेलों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी की ओर इशारा किया। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतें हाल के हफ्तों में ₹2 से ₹15 प्रति लीटर तक बढ़ी हैं।
इसका कारण वैश्विक आपूर्ति में कमी, आयात में गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बढ़े मालभाड़े को बताया जा रहा है। कारोबारी कह रहे हैं कि खाद्य तेलों के लिए भारत की आयात पर भारी निर्भरता के कारण घरेलू कीमतें वैश्विक उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होती हैं।
पैकेजिंग लागत भी बढ़ रही
दुआ ने चेतावनी दी कि आने वाले हफ्तों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री (जो पेट्रोलियम से बनती है) की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अभी बोतलबंद पानी और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसी पैकेज्ड वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं, लेकिन अगर स्थिति बनी रही तो इनमें भी बढ़ोतरी हो सकती है।
सिविल लाइंस के व्यापारी बलवंत राय ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए कहा कि पैकेजिंग लागत बढ़ने से निकट भविष्य में कई उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इन परिस्थितियों के बीच उद्योग से जुड़े लोगों ने आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
साइकिल उद्योग पर भी असर
बढ़ती लागत का असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी पड़ रहा है। साइकिल उद्योग ने 1 अप्रैल से बेसिक मॉडल की कीमत में लगभग ₹225 प्रति यूनिट बढ़ोतरी की घोषणा की है।
फिलहाल सामान्य काली साइकिल की कीमत ₹3,500 से ₹6,000 के बीच है।
स्टील की कीमत और LPG की कमी का दोहरा असर
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन (FICO) के अध्यक्ष गुरमीत सिंह कुलार के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि “यह फैसला स्टील की बढ़ती कीमतों और कमर्शियल LPG की भारी कमी के कारण लिया गया है, जो हीट ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है।”
उन्होंने बताया कि कई उद्योग LPG भट्टियों की जगह डीजल आधारित विकल्प अपना रहे हैं, जिससे बर्नर लागत में करीब 60% की बढ़ोतरी हो गई है और सिलेंडर की आपूर्ति में भी देरी हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि हीट ट्रीटमेंट, फोर्जिंग, साइकिल पार्ट्स और होजरी से जुड़े कई यूनिट्स LPG की कमी के कारण उत्पादन कम कर रहे हैं या बंद कर चुके हैं। औद्योगिक कैंटीनों में भी श्रमिकों के लिए भोजन बनाना मुश्किल हो रहा है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
कुलार ने सरकार से 422 किलोग्राम के औद्योगिक LPG सिलेंडरों की सीमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और औद्योगिक कैंटीनों के लिए 19 किलोग्राम सिलेंडर के उपयोग की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने कम से कम 10% बफर स्टॉक बनाए रखने की भी जरूरत बताई और चेतावनी दी कि लंबे समय तक व्यवधान से रोजगार और औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि LPG की कमी को लेकर MSME डेवलपमेंट एंड फैसिलिटेशन ऑफिस और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया है, ताकि आपूर्ति स्थिर की जा सके।
साइकिल कीमतों में और बढ़ोतरी
मीडिया रिपोर्ट में राणा साइकिल के राजेश बंसल और लुधियाना स्मॉल-स्केल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के हवाले से कहा गया है कि बच्चों की साइकिल की कीमत लगभग ₹100 प्रति पीस और काली साइकिल की कीमत ₹200 से ज्यादा बढ़ेगी।
हालांकि स्टील भारतीय कंपनियों से मिल रहा है, लेकिन इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत ₹22 प्रति लीटर बढ़ चुकी है, और संकट के समय कच्चे माल की कालाबाजारी भी कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ा रही है।

