
भारत–यूरोपीय संघ के बीच बिजनेस डील फाइनल, आज हो सकती है आधिकारिक घोषणा
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि एफटीए के मसौदा पाठ की कानूनी जांच (लीगल स्क्रबिंग) जारी है; प्रयास रहेगा कि सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर किए जाएं।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने वस्तुओं, सेवाओं और आपसी सहयोग के अन्य पहलुओं को शामिल करने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ताएं पूरी कर ली हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस समझौते की घोषणा दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा आज किए जाने की उम्मीद है।
अग्रवाल ने सोमवार को कहा, “यह यूरोपीय संघ के साथ बेहतर आर्थिक एकीकरण के लिए एक संतुलित और भविष्य उन्मुख समझौता होगा। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को गति मिलेगी।” यह समझौता पिछले 18 वर्षों से बातचीत में था, लेकिन 2024 में इसे नई रफ्तार मिली। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए पारस्परिक (रिसिप्रोकल) टैरिफ ने दोनों पक्षों को कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस समझौते को तेजी से अंतिम रूप देने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, अधिकारियों के अनुसार इस समझौते के अनुमोदन (रैटिफिकेशन) में कुछ महीने लग सकते हैं और इसके 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना है। अगले दो हफ्तों में दोनों पक्ष समझौते का एक साफ़-सुथरा अंतिम मसौदा तैयार करेंगे, जिसकी 5–6 महीनों तक कानूनी जांच की जाएगी, उसके बाद इस पर हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद इसे यूरोपीय संसद से मंजूरी लेनी होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चूंकि इसमें “मिक्स्ड कॉम्पिटेंस” शामिल नहीं है, इसलिए 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के प्रत्येक सदस्य देश से अलग-अलग अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
इस समझौते के तहत भारत को कपड़ा, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे कई प्रमुख उत्पाद क्षेत्रों में शून्य शुल्क (जीरो-ड्यूटी) पहुंच मिलने की उम्मीद है। इसके बदले भारत ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे क्षेत्रों में रियायतें देगा।
एक टीवी इंटरव्यू में यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोश शेफचोविच ने कहा कि लक्ष्य 97–99 प्रतिशत वस्तुओं पर पूर्ण या आंशिक शुल्क कटौती का है, जबकि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ सीमित संख्या में वाहनों पर कम शुल्क और चरणबद्ध कटौती के “संयोजन” पर विचार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत, यूरोपीय संघ की तुलना में छोटा लेकिन तेज़ी से बढ़ता हुआ बाज़ार है और ऑटोमोबाइल क्षेत्र दोनों के लिए अहम है। यह एक पूरक क्षेत्र है, क्योंकि भारत में छोटी कारें बनती हैं, जबकि यूरोपीय वाहन निर्माता बड़े और तकनीकी रूप से अधिक उन्नत वाहनों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
शेफचोविच ने कहा, “हम ऐसे रास्तों की तलाश कर रहे हैं जो हमें समाधान खोजने, नई सप्लाई चेन बनाने और यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए बेहतर कारोबारी अवसर तैयार करने में मदद करें, साथ ही सहयोग की नई संभावनाएं खोलें।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस एफटीए का व्यापक रणनीतिक उद्देश्य मज़बूत सप्लाई चेन तैयार करना, जोखिम भरी निर्भरताओं को कम करना और भारत व यूरोपीय संघ दोनों में रोजगार सृजन करना है।

