
भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: कृषि निर्यात के लिए अवसर या चुनौती?
टैरिफ रियायतों के बावजूद भारत को गैर-टैरिफ बाधाओं का सामना करना होगा। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवसर भारतीय कृषि और खाद्य निर्यात को नए बाजारों में फैलाने का एक महत्वपूर्ण मौका प्रदान करता है।
भारत ने लंबे समय से अमेरिका के कृषि और डेयरी बाजार खोलने के प्रयासों का विरोध किया है। इसी पृष्ठभूमि में 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ (EU) के लिए कृषि और खाद्य उत्पादों पर दिए गए व्यापक टैरिफ रियायतें थोड़ी चुनौतीपूर्ण लग सकती हैं। हालांकि, कृषि विशेषज्ञ इन चिंताओं को निराधार मानते हैं। उनका मानना है कि यह एफटीए भारतीय कृषि उत्पादों के लिए विस्तार का अवसर प्रदान करता है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका के बाजार से दूर जाने का मौका भी दे सकता है।
एफटीए से EU को क्या लाभ?
यूरोपीय आयोग (EC) ने भारतीय बाजार में अपने कृषि और खाद्य उत्पादों के प्रवेश का स्वागत किया है। भारत ने EU के लिए आयात टैरिफ 0-50 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले यह औसतन 36 प्रतिशत था और कुछ मामलों में 150 प्रतिशत तक जाती थी।
EC की फैक्टशीट के अनुसार टैरिफ में बदलाव इस प्रकार हैं:-
वाइन और शराब: प्रीमियम वाइन का टैरिफ 150% से घटाकर 20%, मीडियम रेंज के लिए 30%; स्पिरिट्स 150% से 40%, बीयर 110% से 40%
ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल: 45% से घटाकर शून्य
कीवी और नाशपाती: 33% से 10%; फलों का रस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर 55% से शून्य
प्रोसेस्ड फूड (ब्रेड, पास्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पेट फ़ूड): 50% से शून्य
भेड़ का मांस: 33% से शून्य; सॉसेज और अन्य मांस उत्पाद 110% से 50%
भारतीय कृषि क्षेत्र को क्या लाभ?
वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की फैक्टशीट में भारत के लाभ अस्पष्ट हैं। इसमें उल्लेख हैं:-
* चाय, कॉफी, मसाले और कुछ समुद्री उत्पादों पर “तत्काल टैरिफ खत्म”
* कुछ समुद्री उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड पर 3 और 5 साल में “शून्य टैरिफ”
* कुछ पोल्ट्री उत्पाद, संरक्षित सब्ज़ियां और बेकरी उत्पादों के लिए “सुविधाजनक टैरिफ”
* चाय, कॉफी, मसाले, अंगूर, खीरा, प्याज, ताजी सब्ज़ियों और फलों के लिए “प्राथमिक बाजार पहुंच”
* संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयाबीन और कुछ फल-सब्ज़ियों को “सुरक्षित रखा गया”
* SPS और TBT मामलों में सहयोग बढ़ाने के उपाय
* EU के समुद्री उत्पाद बाजार में शेलफिश, जमे हुए मछली और मूल्यवर्धित समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा
* संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए निर्यात वृद्धि
गैर-टैरिफ बाधाएं
Indian Express के राष्ट्रीय संपादक हरीश दामोदरन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने (EU) अपना कृषि बाजार खोला है। उन्होंने कुछ भी नहीं खोला। हालांकि, कमजोर रुपये के चलते भारतीय निर्यात प्रतिस्पर्धी बन गए हैं और “टैरिफ कोई बड़ी समस्या नहीं” है। उनके अनुसार, असली चुनौती गैर-टैरिफ बाधाएं हैं, जैसे EU के Sanitary & Phytosanitary Measures (SPS), जो मानव, पशु और पौधों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कठोर मानक लागू करते हैं। EC की फैक्टशीट के अनुसार, EU में आयातित सभी भारतीय उत्पादों को कड़े स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
विशेषज्ञों की राय
अशोक गुलाटी (ICRIER): आशावादी हैं कि भारत अपने कृषि निर्यात के लिए SPS चुनौतियों को पार कर सकता है, जैसा उसने अंगूर के निर्यात में किया था। उन्होंने भारतीय उत्पादकों को पेस्टीसाइड और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह दी।
हरीश दामोदरन: उन्होंने कहा कि EU टैरिफ रियायतें भारतीय किसानों के लिए गंभीर खतरा नहीं हैं। EU के निर्यात उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद हैं और बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे, जैसे अमेरिका के उत्पाद करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार खोलता है। गुलाटी की सलाह है कि भारतीय निर्यातक यह देखें कि क्या वे अमेरिका के बजाय EU बाजार में अपने उत्पाद भेज सकते हैं।

