India EU Trade Deal : कार प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। अगर आप भी मर्सिडीज या बीएमडब्ल्यू जैसी कारों का सपना देखते हैं, तो खुश हो जाइए। भारत सरकार और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता होने वाला है। सूत्रों की मानें तो यह समझौता मंगलवार तक हो सकता है। इसे व्यापार जगत में 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। मोदी सरकार विदेशी कारों पर लगने वाले भारी टैक्स को कम करने जा रही है। इसका सीधा फायदा भारतीय ग्राहकों को मिलेगा। अब तक भारत में विदेशी कारों पर बहुत ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी। लेकिन अब सरकार अपने बाजार को दुनिया के लिए खोलने की तैयारी कर रही है। यह भारतीय ऑटो सेक्टर के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। इससे देश में यूरोप की लग्जरी कारें काफी सस्ती हो जाएंगी।
110% से सीधे 40% पर आएगा टैक्स
सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर सहमत हो गई है। अभी यह ड्यूटी 110% तक है। इसे घटाकर सीधे 40% किया जाएगा। यह कटौती यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर लागू होगी। इसका फायदा उन कारों को मिलेगा जिनकी कीमत 15,000 यूरो से ज्यादा है। यानी करीब 17,739 डॉलर से महंगी कारों पर छूट मिलेगी। आने वाले समय में इसे और घटाकर 10% तक लाया जाएगा। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों को फायदा होगा। वे अब आसानी से भारतीय बाजार में अपनी कारें बेच सकेंगी।
मंगलवार को हो सकता है बड़ा ऐलान
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। अब यह बातचीत अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि मंगलवार को इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का ऐलान हो जाएगा। दोनों पक्ष इस समझौते की शर्तों को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि, सूत्रों ने अपनी पहचान गुप्त रखी है। बातचीत अभी गोपनीय है और इसमें अंतिम समय में बदलाव भी हो सकते हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूरोपीय आयोग ने भी अभी चुप्पी साधी हुई है।
साल में 2 लाख कारों को मिलेगा फायदा
नई दिल्ली ने इंपोर्ट ड्यूटी घटाने के लिए एक कोटा तय किया है। प्रस्ताव के मुताबिक, सालाना करीब 2 लाख कारों पर कम टैक्स लगेगा। यह छूट पेट्रोल और डीजल इंजन वाली कारों के लिए है। यह भारत सरकार का अब तक का सबसे आक्रामक कदम है। इस कोटे की संख्या में अंतिम समय में बदलाव हो सकता है। इसका मकसद विदेशी कंपनियों को भारत में मौका देना है। इससे वे यहां अपना बाजार बढ़ा सकेंगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अभी राहत नहीं सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर सावधानी बरती है। अगले पांच साल तक ईवी पर इंपोर्ट ड्यूटी में कोई कटौती नहीं होगी। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरेलू कंपनियों को बचाया जा सके। टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियां ईवी सेक्टर में बड़ा निवेश कर रही हैं। सरकार नहीं चाहती कि विदेशी कंपनियों के आने से उन्हें नुकसान हो। पांच साल बाद ईवी पर भी ड्यूटी कम की जाएगी।
कपड़ा और ज्वैलरी सेक्टर को भी मिलेगी संजीवनी यह समझौता सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। इससे भारत के अन्य सेक्टरों को भी बड़ा फायदा होगा। भारत से कपड़ा और ज्वैलरी का निर्यात बढ़ेगा। अगस्त के बाद से अमेरिका ने इन पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो रहा था। यूरोपीय बाजार खुलने से इन नुकसानों की भरपाई हो सकेगी। यह भारत के व्यापार के लिए एक बड़ा अवसर है।
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार
बिक्री के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। हम अमेरिका और चीन के बाद आते हैं। लेकिन हमारा बाजार विदेशी कारों के लिए काफी बंद रहा है। अभी भारत में इंपोर्टेड कारों पर 70% से 110% तक टैक्स लगता है। टेस्ला के एलन मस्क भी इसकी आलोचना कर चुके हैं। अब कम टैक्स होने से कंपनियां अपनी कारें सस्ती बेच सकेंगी। वे स्थानीय स्तर पर निर्माण करने से पहले बाजार को परख सकेंगी।
सुजुकी और देसी कंपनियों का दबदबा
अभी भारतीय बाजार पर मारुति सुजुकी का कब्जा है। इसके अलावा टाटा और महिंद्रा की भी अच्छी पकड़ है। इन तीनों के पास बाजार का दो-तिहाई हिस्सा है। यूरोपीय कार कंपनियों की हिस्सेदारी 4% से भी कम है। ज्यादा टैक्स के कारण वे यहां पैर नहीं जमा पाईं। रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां अब नई रणनीति बना रही हैं। भारत का कार बाजार 2030 तक 60 लाख यूनिट सालाना होने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए विदेशी कंपनियां निवेश की कतार में हैं।
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