EU-India Free Trade Deal: भारत और यूरोप के लिए क्या है महत्व
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EU-India Free Trade Deal: भारत और यूरोप के लिए क्या है महत्व

भारत और EU के बीच यह FTA केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक और रक्षा साझेदारी का नया अध्याय है। वैश्विक अस्थिरता, और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह समझौता दोनों पक्षों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।


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भारत और यूरोपीय संघ (EU) जनवरी के अंतिम सप्ताह में अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। यह प्रक्रिया काफी समय से चल रही है और अब इसके फाइनल स्टेज में पहुंचने की संभावना है। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने हाल ही में नई दिल्ली का दौरा शुरू किया। इनमें यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सांतोस दा कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और EU की उपाध्यक्ष काजा कालास शामिल हैं। उर्सुला वॉन डेर लेयेन और कोस्टा भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल होंगे।

शिखर सम्मेलन पर सबकी निगाहें

उच्च स्तरीय अतिथि अगले दिन यानी 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे FTA वार्ताओं का समापन हो सकता है।

भारत-ईयू संबंधों की कुछ अहम बातें

* भारत और EU के बीच व्यापार का महत्व दोनों पक्षों की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

* द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में लगभग 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

* EU से भारत की वस्तु निर्यात में 2032 तक 107.6% की वृद्धि की संभावना, कुल 112.5 अरब यूरो तक।

* 2019-24 में सेवा व्यापार में भारतीय निर्यात 19 अरब यूरो से बढ़कर 37 अरब यूरो हुआ।

* 2024 तक EU में 9,31,607 भारतीय निवास कर रहे थे, जिनमें 16,268 ब्लू कार्ड धारक शामिल हैं।

* EU भारत का प्रमुख व्यापारिक साथी है, वस्त्र और सेवाओं दोनों में।

* पहला भारत-EU शिखर सम्मेलन जून 2000 में लिस्बन में हुआ।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

FTA को दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया है। भारत ने पिछले चार वर्षों में आठ FTA पूरे किए हैं, जबकि EU ने हाल ही में मर्कोसूर ट्रेडिंग ब्लॉक के साथ समझौता किया। कोस्टा के अनुसार, भारत EU का अहम साथी है और दोनों मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह संदेश वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन जैसी अस्थिरताओं के बीच और भी प्रासंगिक हो जाता है।

FTA के प्रमुख फायदे

आर्थिक और रक्षा हितों की सुरक्षा: वैश्विक अस्थिरता के दौर में दोनों पक्ष आर्थिक और रक्षा हित सुरक्षित करना चाहते हैं।

भारत का FTA फोकस: नए बाजारों तक पहुंच, वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते दबाव के बावजूद।

EU की रणनीति: आपूर्ति श्रृंखला को चीन से स्वतंत्र करना और भारत के विशाल बाजार से लाभ उठाना।

भारत-EU द्विपक्षीय वस्तु और सेवा व्यापार 2024-25 में 190 अरब डॉलर से अधिक।

भारत का EU निर्यात: वस्तुओं में 76 अरब डॉलर और सेवाओं में 30 अरब डॉलर।

टैरिफ और व्यापार

भारतीय वस्तुओं पर EU का औसत टैरिफ लगभग 4% है, जबकि वस्त्र और परिधान पर लगभग 10%। FTA के बाद भारतीय प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल होगी, जो 2023 में EU की टैरिफ कटौती समाप्त होने से प्रभावित हुई थी। IT सेवाओं और पेशेवरों के लिए भारत को बाजार पहुंच में सुधार की उम्मीद है।

संवेदनशील क्षेत्र और चुनौतियां

* कृषि और डेयरी को FTA के दायरे से बाहर रखा गया।

* भारत 95% उत्पादों पर टैरिफ हटाने के EU प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।

* वाहन, वाइन और शराब संवेदनशील क्षेत्र हैं।

* भारत धीरे-धीरे टैरिफ में कटौती या सीमित कोटा लागू करने पर विचार कर रहा है।

FTA के बाद यूरोपीय कारों की कीमत भारत में कम हो सकती है और वाइन की कीमत में भी गिरावट संभव है।

रक्षा साझेदारी में बड़ा बदलाव

FTA के आर्थिक समझौते के साथ EU-India Security & Defence Partnership भी शामिल है। यूरोप और भारत की रक्षा साझेदारी अब स्ट्रक्चर्ड औद्योगिक सहयोग की दिशा में बढ़ेगी। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद रोधी प्रयास और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा। EU-India Defence Industry Forum बनाया जाएगा, जो संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देगा। भारत डेटा सुरक्षा, पेशेवरों की आसान गतिशीलता और दोहरी सामाजिक सुरक्षा से छूट चाहता है, जबकि EU भारत के वित्तीय और कानूनी क्षेत्र में बेहतर पहुंच चाहता है।

FTA का सामरिक महत्व

भारत के रक्षा क्षेत्र में अब स्थायित्व और विश्वास है। यूरोप तकनीक, पूंजी और बाजार तक पहुंच के साथ साझेदारी पेश कर रहा है। FTA से भारतीय कंपनियां उच्च मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठेंगी और वैश्विक रक्षा निर्यात में मजबूत होंगी। यूरोप अपनी रक्षा निर्भरता अमेरिका पर कम करने के लिए साझेदारी बढ़ा रहा है।

भू-राजनीतिक महत्व

27 जनवरी का शिखर सम्मेलन भारत-EU को एक “थर्ड पोल” के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम करने में दोनों पक्षों को मदद मिलेगी। अमेरिकी उच्च टैरिफ के बाद भारतीय निर्यातकों को EU तक तत्काल वैकल्पिक पहुंच मिलेगी।

FTA पर अभी समय लगेगा

FTA के साइन होने के बाद भी इसे यूरोपीय संसद से रैटिफिकेशन की आवश्यकता होगी, जो लगभग एक साल ले सकती है। हालांकि, EU ने कहा कि एक बार मर्कोसूर देश रैटिफाई कर दे तो FTA अस्थायी रूप से लागू किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि में यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित होगा। विश्लेषक का कहना है कि FTA अमेरिका और चीन जैसी अस्थिर शक्तियों से व्यापार निर्भरता कम करने में मदद करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से बचाएगा।

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