LPG संकट के बीच हर घर PNG मिशन! 2034 तक 12.6 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य, लालफीताशाही बनी रुकावट
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LPG संकट के बीच 'हर घर PNG मिशन'! 2034 तक 12.6 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य, लालफीताशाही बनी रुकावट

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 1.9 लाख एलपीजी उपभोक्ता PNG में शिफ्ट हो चुके हैं. देश में पहला पीएनजी कनेक्शन 1972 में वडोदरा में दिया गया था.


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अमेरिका - इजरायल के ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध (United States-Israel Iran War) के बाद से खाना पकाने के लिए लिए जरूरी एलपीजी की किल्लत से पूरे देश जूझ रहा है. ऐसे में सरकार को बड़ा फोकस PNG कनेक्शन के विस्तार की ओर है. केंद्र सरकार घरेलू उपभोक्ताओं से घर में खाना पकाने के लिए पीएनजी कनेक्शन (PNG Connection) लेने की अपील कर रही है. तो बड़े शहरों और शहरी इलाकों के कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं से आग्रह किया जा रहा वे जल्द से जल्द PNG पर शिफ्ट हों, ताकि एलपीजी की उपलब्धता पर बन रहे दबाव को कम किया जा सके. 2034 तक सरकार 12.6 करोड़ PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया है जबकि 5 वर्षों में 90 लाख से भी कम PNG कनेक्शन दिए गए हैं. लेकिन सरकारी लाल-फीताशाही स्थानीय अड़चनें सरकार के इस लक्ष्य पर पानी फेर सकती है.

1.9 लाख उपभोक्ता LPG से PNG में शिफ्ट

देश के कई राज्यों से लेकर मेट्रो शहर हैं जहां अभी भी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का विस्तार नहीं हुआ है जिससे उपभोक्ताओं को पाइप के जरिए खाना पकाने वाले गैस की सप्लाई की जा सके. देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 733 जिलों में CGD योजना लागू है और अब तक देश के लगभग पूरे 307 भौगोलिक क्षेत्र को इस योजना के दायरे में लाया जा चुका है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सरकार लगातार लोगों से एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट करने के लिए अनुरोध कर रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि, जब से ये संकट शुरू हुआ है तबसे 1.9 लाख एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में शिफ्ट हो चुके हैं. साथ ही सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है और लोगों को एलपीजी से पीएनजी में पलायन के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

2034 तक 12.6 करोड़ PNG कनेक्शन

संसद के बजत सत्र के दौरान 19 मार्च 2026 को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में बताया कि, सरकार ने साल 2034 तक 12.6 करोड़ PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है. 31 दिसंबर 2025 तक देश में 1,62,43,675 घरेलू PNG कनेक्शन दिए जा चुके हैं. पेट्रोलियम राज्यमंत्री ने कहा, PNG नेटवर्क के विस्तार में सबसे बड़ी समस्या अलग-अलग विभागों से अनुमति मिलने में देरी है, जिसके कारण कई जगहों पर पाइपलाइन और गैस कनेक्शन का काम धीमा हो जाता है. उन्होंने कहा, राज्यों और संबंधित एजेंसियों से कहा गया है कि मंजूरी प्रक्रिया को तेज किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइप गैस पहुंचाई जा सके और LPG पर निर्भरता कम हो.

अति महत्वाकांक्षी है सरकार का लक्ष्य

देश में कुल पीएनजी कनेक्शन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 27 फीसदी, गुजरात की 26 फीसदी, उत्तर प्रदेश की 13 फीसदी, दिल्ली एनसीआर की 12 फीसदी, कर्नाटक की 3 फीसदी और बाकी दूसरे राज्यों - केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर 19 फीसदी है. पीएनजी ग्राहकों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र 42,86,784 कनेक्शन के साथ पहले नंबर पर है. 37,58,211 कनेक्शन के साथ गुजरात दूसरे, 20,78,890 कनेक्शन के साथ उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर और 18,39,567 कनेक्शन के साथ दिल्ली एनसीआर चौथे स्थान पर है. सरकार ये दावा कर रही है कि अगले 9 वर्षों में देश में कुल घरेलू पीएनजी कनेक्शन की संख्या बढ़कर 12.6 करोड़ हो जाएगी जो भी 1.62 करोड़ है. यानी मौजूदा समय से करीब 8 गुना ज्यादा. जबकि बीते 5 वर्षों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए दिए गए घरेलू PNG कनेक्शन की संख्या 90 लाख भी नहीं है. ऐसे में सरकार का ये लक्ष्य अति महत्वाकांक्षी नजर आता है.

वित्त वर्ष घरेलू PNG कनेक्शन

2020-21 16,17,459

2021-22 16,24,382

2022-23 17,26,567

2023-24 18,93,282

2024-२५ 21,18,955

राज्यों को जल्द मंजूरी देने के निर्देश

केंद्र सरकार ने 16 मार्च 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार के लिए जरूरी मंजूरियां तेजी से देने को कहा है. इसके बाद 18 मार्च को सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया कि जो राज्य LPG से PNG की ओर बदलाव में मदद करेंगे, उन्हें 10 फीसदी एडिशनल कमर्शियल LPG आवंटन दिया जाएगा. सरकार ने 19 मार्च को सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े लंबित मामलों को तुरंत मंजूरी दी जाए और जहां PNG उपलब्ध है, वहां सरकारी दफ्तरों, कॉलोनियों और कैंटीनों में LPG की जगह PNG का इस्तेमाल शुरू किया जाए. 20 मार्च को जारी निर्देश में सभी मंत्रालयों से कहा गया कि वे अपने विभागों और संस्थानों में PNG कनेक्शन की संभावित मांग का आकलन करें और इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें. सरकार के निर्देश के बाद Petroleum and Explosives Safety Organisation ने अपने सभी दफ्तरों को आदेश दिया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और 10 दिन के भीतर मंजूरी दी जाए.

'हर घर PNG' स्कीम शुरू करने की सिफारिश

विजन 2040 (Vision 2040) के नाम से भारत में प्राकृतिक गैस के इंफ्रास्ट्रक्चर (Natural Gas Infrastructure) को मजबूत करने के लिए डी के सर्राफ (D K Sarraf) की अध्यक्षता वाली हाई लेवल एक्सपर्ट कमिटी ने नवंबर 2025 में पेट्रोलियम एंड नैचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board) को जो अपनी रिपोर्ट सौंपी है उसमें घरेलू उभोक्ताओं के बीच PNG कनेक्शंस को बढ़ावा देने के लिए हर घर PNG - प्रज्वला स्कीम शुरू (‘Har Ghar PNG’ - Prajwala scheme) करने की सिफारिश की गई है जिससे देश के टीयर -2, टीयर -3 और ग्रामीण इलाकों में घरेलू उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी अपनाने के लिए बढ़ावा दिया जा सके. साथ ही इसके लिए सरकार को एलपीजी कनेक्शन को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) और प्रधानमंत्री जनधन योजना ( Pradhan Mantri Jan-Dhan Yojana) के तर्ज पर डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) वाली फिस्कल इंसेंटिव स्कीम (Fiscal Incentive Scheme) शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है. इसके तहत उपभोक्ताओं को एक बार लगने वाले कनेक्शन चार्ज पर सब्सिडी के साथ गैस के खपत पर भी आर्थिक सहायता दी जाए जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए PNG कनेक्शन LPG से सस्ती पड़े.

LPG के समान मिले PNG उपभोक्ता को सुविधा

रिपोर्ट के मुताबिक इससे देश में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को बढ़ाने, आखिरी घर तक पाइपलाइन गैस पहुंचाना और स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी. सिफारिश में कहा गया है कि ‘प्रज्वला योजना’ के जरिए PNG उपभोक्ताओं को भी वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो LPG उपभोक्ताओं को सरकारी योजनाओं के तहत मिलती है. इससे प्राकृतिक गैस और LPG के बीच बराबरी का माहौल बनेगा और ज्यादा लोग पाइप गैस कनेक्शन लेने के प्रेरित होंगे. ये स्कीम खास तौर पर उन नए गैस वितरण डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्रों के लिए अहम साबित हो सकती है जिन्हें हाल के वर्षों में मंजूरी दी गई है और जिनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार शामिल हैं. योजना लागू होने पर इन परिवारों को भी PNG का वही लाभ मिल सकेगा, जो अभी LPG उपभोक्ताओं को मिलता है.

PNG कनेक्शन पर मिल रही छूट-डिस्काउंट

सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे रेस्टोरेंट, होटल और कैंटीन जैसे कमर्शियल प्रतिष्ठानों को PNG कनेक्शन देने को प्राथमिकता दे जिससे कमर्शियल LPG की कमी को कम किया जा सके. सरकार की अपील का असर ये है कि IGL, MGL, GAIL Gas और BPCL जैसी कंपनियों ने घरेलू और कमर्शियल PNG कनेक्शन लेने वालों को वित्तीय इंसेंटिव भी दे रही है. दिल्ली एनसीआर में PNG सप्लाई करने वाली इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) नए कनेक्शन लेने पर 500 रुपये तक का मुफ्त गैस दे रही है. मुंबई में महानगर गैस नया कनेक्शन लेने वालों को रजिस्ट्रेशन चार्ज पर 500 रुपये तक की छूट दे रही है. IGL के पास हर रोज 1500 नए पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन आ रहे हैं. पेट्रोलियम एंड नैचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को आवेदन मिलने से लेकर गैस सप्लाई शुरू करने तक का समय कम करने का निर्देश दिया है.

LPG किल्लत के चलते बढ़ा संकट

अमेरिका - इजरायल के ईरान के बीच युद्ध शुरू करने के बाद से ही देश के कई शहरों में उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के संकट का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को एलपीजी सिलेंडर रिफिल कराने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है या फिर सिलेंडर लेने के लिए घंटों लाइन में भी खड़ा होना पड़ रहा है. एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के बीच हालांकि पाइप के सहारे घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रोकटोक के PNG की सप्लाई की जा रही है. जबकि उद्योगों और कमर्शियल उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का करीब 80 फीसदी गैस उपलब्ध कराई जा रही है. दरअसल भारत अपने जरूरत का 50 फीसदी गैस खुद उत्पादन करता है जबकि 50 फीसदी आयात पर निर्भर है.

सरकार घरेलू उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत देने के लिए एडमिनिस्टरड प्राइस मैकेनिज्म (APM) के तहत सस्ती घरेलू प्राकृतिक गैस सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर (CGD Sector) को उपलब्ध कराती है. यह गैस खास तौर पर घरेलू PNG और CNG के लिए दी जाती है, ताकि आम लोगों पर ईंधन का बोझ कम रहे. वहीं औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी करने के लिए LNG का आयात किया जाता है, क्योंकि घरेलू उत्पादन से पूरी मांग पूरी नहीं की जा सकती है.

1972 में दिया गया था पहला PNG कनेक्शन

देश में PNG और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर का विस्तार पिछले पांच दशकों से चल रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में इसकी हिस्सेदारी लगभग स्थिर हो गई है. भारत में पहला घरेलू PNG कनेक्शन 1972 में वडोदरा गैस लिमिटेड द्वारा वडोदरा में दिया गया था, जिसके बाद दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में CGD नेटवर्क का विस्तार हुआ. 2006 में PNGRB के गठन के बाद CGD सेक्टर को संगठित ढांचा मिला. इसके बाद पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ और अलग-अलग चरणों में CGD बोली प्रक्रिया के जरिए देश के कई शहरों और जिलों में पाइप गैस पहुंचाने की योजना शुरू की गई. सरकार ने गैस को सस्ता और आसानी से उपलब्ध बनाने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए हैं. इनमें “वन नेशन, वन गैस ग्रिड” के तहत यूनिफाइड टैरिफ लागू करना और घरेलू गैस की कीमत तय करने की नई व्यवस्था शामिल है. जानकारों का मानना है कि अगर पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार तेज नहीं हुआ और नए उपभोक्ताओं को नहीं जोड़ा गया, तो CGD सेक्टर की ग्रोथ फीकी रह सकती है.

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